Thursday, June 25, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(सोलहम कड़ी)

छोटका बेटा जन्मक बाद टिस्को से संबध s गेलाह बड़का बेटा भास्कर(पुत्तु )ओहि समय मे सवा दू बरखक छलाह छोटका बेटा मयुर (विक्की) मात्र तीन मासक हिनका अयलाक किछुए मास बाद बाबुजी केर बदली राँची s गेलैन्ह माँ सब जमशेदपुर सँ चलि गेलिह ओहि समय मे टिस्को के घर भेटय मे किछु दिक्कत छलैक वरिष्टता के आधार पर घर भेटैत छलैक हम सब एकटा छोट छीन घर s s रहय लगलहुँ

कलाकार मन बेसी दिन चुप नहि बैस सकैत छैक ताहू मे लल्लन जी सन कलाकार अपन व्यस्तताक बावजूद टिस्को के नौकरी मे अयलाक किछुए समय बाद सँ अपन नाट्य सांस्कृतिक गतिविधि मे सक्रिय s गेलाह ओहि समय मे टिस्को केर पदाधिकारी कर्मचारी सब के द्वारा कर्मचारी सब के लेल सुरक्षा नाटकक आयोजन कएल जाइत छलैक ओहि नाटक सब पर खर्च सेहो बहुत कम कयल जाइत छलैक नाटक सब एक दम नीरस संदेश मात्र के लेल रहैत छलैक दर्शक सेहो मात्र अपन विभागक किछु आन विभागक लोक जे सब नाटक मे भाग लेत छलाह रहैत छलैक कार्य भार स्म्भरलाक किछुए मास बाद अपन विभागक सुरक्षा नाटक मे भाग s ओकर संवाद मे फेर बदल s ओहि मे सर्वश्रेष्ट अभिनेताक पुरस्कार प्राप्त केलाह दोसर बरख जओं हुनका नाटक लेल कहल गेलैन्ह s साफ कहि देलथिन जे नाटक रविन्द्र भवन जे कि जमशेदपुर के सबस नीक प्रेक्षागृह छलैक ओहि मे करताह ओहि बरख नाटक रविन्द्र भवन मे भेलैक दर्शक के ओहि नीरस विषय पर कयल गेल सुरक्षा नाटक खूब पसिन भेलैक श्री ठाकुरक जमशेद्पुरक नाट्य यात्रा एहि ठाम सँ प्रारम्भ s गेलैन्ह

सब दिन मैथिली केर सेवा करय लेल प्रतिबद्ध श्री ठाकुर जी के मोन मे सदिखन रहैत छलैन्ह जे किछु करि वा नहि मैथिली भाषा साहित्य के अपन कलम सँ किछु s सहयोग करिए सकैत छलैथ जमशेद्पुरक मैथिली संस्था "मिथला सांस्कृतिक परिषद" केर सदस्यता s अयलाक किछुएक समय पश्चात सोचि लेलाह कि मैथिली केर सेवा करताह सन १९८१ मे एकटा आन्दोलन शुरू भेल छलैक गाम गाम सब शहर सँ सेहो प्रधानमंत्री के नाम पोस्ट कार्ड पर मैथिली भाषा केर अष्ठम सूची मे स्थान देबाक लेल आग्रह कयल गेल छलैन्ह जमशेदपुर मे एकटा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन से करबाक विचार भेलैक जाहि केर भार श्री ठाकुर जी के देल गेलैन्ह श्री ठाकुर जी तय केलाह कि एकटा सगीत संध्या कयल जाय ओहि कार्यक्रमक नाम देल गेलैक संकल्प दिवस ओहि कार्यक्रम के लेल सबटा गीत मैथिली मे अपनहि लिखि ओकर धुन s तैयारी कराब मे लागि गेलाह मैथिली मे हुनक पहिल कार्यक्रम छलैन्ह कार्यक्रम मे मुख्य गायक सेहो अपनहि छलथि कार्यक्रमक उदघाटन गीत नाम से "संकल्प गीत"परलैक

"संकल्प गीत"

संकल्प लिय संकल्प लिय
संकल्प लिय यो
बाजब मैथिली मिथिलाक लेल जियब यो ....
संकल्प लिय..............२।

शांतिमय प्रयास हमर ई
सुनी लिय देशक नेता.....३
सूची अष्टम मे स्थान दियो
आरो ने किछु कहब यो ....
संकल्प लिय.......२

लाखक लाख पत्र जाइत अछि
आँखि खोइल क देखू .....३
aआबि गेल समय इन्द्रा जी
मिथिलाक मान राखू ......३
संघर्ष बढ़त जं बात ने मानबै
आरो ने हम साहब यै
संकल्प लिय ...........३।

-लल्लन प्रसाद ठाकुर -

अहि कार्यक्रमक खूब प्रशंसा भेलैक आ श्री ठाकुर जी के एहि कार्यक्रम कय जे प्रसन्नता भेलैन्ह ताहि केर परिणाम स्वरुप ओ एकटा नाटक करबाक ठानि लेलैन्ह। जमशेदपुरक मिथिला सांस्कृतिक परिषद केर महिला शाखाक स्थापना भेलैक आ ओकर सदस्या लोकनि अपन एकटा मुख्य कार्यक्रम करबाक लेल श्री ठाकुर जी के आग्रह केलथि। ठाकुर जी हुनक सबहक आग्रह मानि लेलाह आ तय भेलय जे नाटक होयतैक।ठाकुर जी के पहिल नाटक" बड़का साहेब" ओकरे देन छैक। ओहि नाटक केर लिखैत हम देखने छियैन्ह बुझाइए मे नहि आयल जे नाटक लिखनाइ एको रति कठिन छैक। ततेक सामान्य आ सरल भाव सँ लिखैत छलाह एक एक टा संवाद के हमरा पहिनहि कैयेक बेर सुनबैत छलाह। हमरा तs नाटकक पूर्वाभ्यास सँ पहिनहि सबटा संवाद याद भ गेल छल।

एक बेर जे ठानि लैत छलाह ओकरा पूरा करबा मे अपन जी जान लगा दैत छलाह। बड़का साहेब केर पूर्वाभ्यास महिला शाखा केर एक गोट सदस्य के ओहि ठाम होइत छलैन्ह। हम सब तs सपरिवार सब दिन उपस्थित रहैत छलहुँ। एक तs अपने मुख्य भूमिका मे छलाह दोसर विक्की से ओहि नाटक केर बालकलाकार छलाह तेसर बहुत रास काज नाटक संबंधी होइत छलैक जे हमरा भार देने छलाह आ चाहैत छलाह जे हम सब दिन नाटकक अभ्यास देखि जाहि सँ हम बहुत किछु देखि कs बुझि लियय।

बड़का साहेब केर पूर्वाभ्यास मे सब दिन महिला शाखाक सदस्य द्वारा कैयेक टा नाटक होयत रहैत छलैक। हुनका सब के ई विश्वास नहि छलैन्ह जे नाटक नीक होयतैक। किछु सदस्य बुझैत छलिह जे ओ नाटक केर विषय मे अधिक बुझैत छथि, मुदा प्रत्येक नाटक मे निर्देश केर अपन कल्पना आ सोच होयत छैक। सब दिन इ हुनका लोकनि के समझाबथि जे अहाँ सब निश्चिंत रहू नाटक नीक होयबे करत मुदा हुनका सब के भरोस नहीं होयेंह। इ सब दिन घर आबि क कहैथ इ पहिल आ अंतिम अछि आब हम दोसरा के लेल नाटक नहीं करब ख़ास क मौगी सब लेल तs नहिएँ टा। सब दिन हम आ बालमुकुन्द जी हिनका बुझाबियैन्ह। एक तs एकहू टा नीक कलाकार नहि रहथि दोसर हर काज मे व्यवस्थापक सबहक हस्तक्षेप। हिनका नीक नहि लागैन्ह मुदा जखैन्ह कार्यक भार लs लेने रहथि त पूरा करबाक छलैन्ह।

एक त सब दिन नाटकक पूर्वाभ्यास में किछु नहि किछु होइत रहैत छलैक ताहि पर नाटक मंचनक तारीख स तीन चारी दिन पहिने इंदिरा गाँधी के हत्या भ गेलैक आ प्रशासन दिस स सबटा कार्यक्रम रद्द करबाक आदेश आबि गेलैक। दोसर तिथि तय करबा में समय नहीं लगलैक अखबार में से निकलबा देल गेलैक मुदा हुनक मोन नहि मानलैंह आ जाहि तारीख के नाटक मंचन होयबाक छलैक ताहि दिन अपनहि बालमुकुन्द जी आ किछु कलाकार लोकनि के लs रविन्द्र भवन केर गेट लग ठाढ़ भ गेलाह इ सोचि जे लोक के असुविधा नही होय।

२० नवम्बर १९८३ के पहिल बेर जमशेदपुर में मैथिली नाटक "बड़का साहेब" केर मंचन भेलैक आ ओहि नाटक केर सफल मंचन सs जमशेदपुरक मैथिली भाषा भाषी अचम्भित रहि गेलाह। पहिल बेर कोनो मैथिली नाटक टिकट पर भेल छलैक। "बड़का साहेब " नाटकक अनुभव हुनका दोसर नाटक लिखय लेल आ ओकर मंचन करय लेल बाध्य कs देलकैन्ह।
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