Friday, November 20, 2009

अभिलाषा


"अभिलाषा"


अभिलाषा छलs हमर एक ,
करितौंह हम धिया सँ स्नेह ।
हुनक नखरा पूरा करय मे ,
रहितौंह हम तत्पर सदिखन ।
सोचैत छलहुँ हम दिन राति ,
की परिछ्ब जमाय लगायब सचार ।
धीया तs होइत छथि नैहरक श्रृंगार ,
हँसैत धीया रोएत देखब हम कोना ।
कोना निहारब हम सून घर ,
बाट ताकब हम कोना पाबनि दिन ।
सोचैत छलहुँ जे सभ सपना अछि ,
ओ सभ आजु पूरा भs गेल।
घर मे आबि तs गेलिह धीया ,
बिदा नहि केलहुँ , नय सुन अछि घर ।
एक मात्र कमी रहि गेल ,
सचार लगायल नहिये भेल।।


-कुसुम ठाकुर -


Thursday, November 19, 2009

हमर पहिल मैथिली कविता

"चुल बुली कन्या बनि गेलहुँ "


बिसरल छलहुँ हम कतेक बरिस सँ ,
अपन सभ अरमान आ सपना ।
कोना लोक हँसय कोना हँसाबय ,
आ कि हँसी में सामिल होमय ।
आइ अकस्मात अपन बदलल ,
स्वभाव देखि हम स्वयं अचंभित ।
दिन भरि हम सोचिते रहि गेलहुँ ,
मुदा जवाब हमरा नहि भेंटल ।
एक दिन हम छलहुँ हेरायल ,
ध्यान कतय छल से नहि जानि ।
अकस्मात मोन भेल प्रफुल्लित ,
सोचि आयल हमर मुँह पर मुस्की ।
हम बुझि गेलहुँ आजु कियैक ,
हमर स्वभाव एतेक बदलि गेल ।
किन्कहु पर विश्वास एतेक जे ,
फेर सँ चंचल , चुलबुली कन्या बनि गेलहुँ ।।


- कुसुम ठाकुर -


Tuesday, November 10, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (चौबीसम कड़ी)

लल्लन जी हमरा सs किछु नहि नुकाबय छलाह आ नहि हम हुनका कोनो काज में बाधा दियैन्ह आ कि मना करियैन्ह। हुनका मोन में अपन माँ पिता जी भाई बहिन के प्रति अपार स्नेह छलैन्ह । माँ केर तs ओ परम भक्त छलाह , माँ किछु कहि देथिन्ह तs हुनकर प्रयास रहैत छलैन्ह जे ओ ओकरा अवश्य पूरा करैथ मुदा एहेन विडम्बना जे हुनकर बीमारी के विषय में हम माँ के नहि कहि सकलियैन्ह। माँ के मात्र एतवा बुझल छलैन्ह जे लल्लन जी केर बेर बेर बुखार भs जाइत छैन्ह ।

मनुष्य जखैन्ह दुःख में रहैत अछि तs ओकरा भगवान छोरि और किछु मोन नहि रहैत छैक । ओ अपन दुःख में ततेक नहि ओझरायल रहैत छैक जे आन किछु सोचबाक ओकरा फुर्सत नहि भेंटैत छैक । लल्लन जी सन व्यक्तित्व केर बाते किछु आओर होइत छैक । अपने बीमार छलाह मुदा दोसर केर विषय में सदिखैन सोचैत रहैत छलाह । कखनहु कs हुनक एहि तरहक सोच देखि हमहु बिसरि जायत छलहुँ जे ओ बीमार छथि मुदा एहेन कोनो दिन नहि होइत छलैक जे हम राति में हुनका विषय में नहि सोचैत छलहुँ । हमर तs जेना नींद उरि गेल छल , राति या तs टक टकी लगा कs बितैत छल या नहि तs नोर बहा कs । दोसर तरफ़ मुँह कs हम भरि राति कानैत रहि जाइत छलहुँ। एक तs लल्लन जी बीमार छलाह दोसर हम एहि विषय में किनको सs नहि कहने रहियैन्ह आ नहि हम ओकर चर्च करैत छलहुँ खास कs बच्चा सब लग तs एकदम नहि । सब सs कष्टप्रद छलs जे हमरा दुनु गोटे के सबटा बुझल छल मुदा हम सब एक दुसरा संग सेहो कखनो एहि विषय पर गप्प नहीं करैत छलियैक । की गप्प करितियैक , कोना करितियैक मुदा एक दिन लल्लन जी केर मुँह सs निकलिए गेलैन्ह आ हमरा पुछि देलाह ।


हमरा ओहिना मोन अछि, हमर मंगल व्रत छल साँझ में खेलाक बाद हमर माथ घुमय छल हम बिछौना पर आबि कs परल रही लल्लन जी टीवी देखय छलाह किछुए समय बाद ओहो आबि कs हमरा बगल में परि रहलाह । इ देखि पता नहि हमर मोन आओर बेचैन भs गेल हम मुँह झाँपि कs दोसर दिस घुमि गेलहुँ । ओहि घर में मात्र हम दुनु गोटे छलहुँ । अचानक लल्लन जीक आवाज कान में आयल "किछु होइत अछि की , आकि फेर माथ घूमि रहल अछि" । हम किछु नहि बजलियैन्ह , हम ऐना परल छलहुँ जेना हम सुतल रहि , मुदा ओ तs हमर एक एक टा मोनक गप्प बुझैत छलाह तुरन्त कहलाह हम सब बुझैत छी अहाँक मोनक गप्प , मुदा हमरा बाद अहाँ की करब"? बस एतबहि बजलाह आ चुप भs गेलाह । इ सुनतहि हमर माथ जेना सुन्न भs गेल , हमरा किछु नहि फुरायल नहि किछु बाजि भेल मुदा हमर आँखि सs नोर ढब ढब खसय लागल आ ओ रुकय के नाम नहि लैत छल । ओहि राति हम पहिल बेर लल्लन जी के सोंझाँ में हुनका बीमार भेलाक बाद कानल छलहुँ आ भरि राति कानैत रहि गेलहुँ । लल्लन जी केर सेहो एतबा हिम्मत नहि छलैन्ह जे हमरा चुप्प करबितथि ।

Thursday, October 22, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (तेइसम कड़ी )

ओना त एकटा कहबी छैक "जाबैत साँस ताबैत धरि आस " मुदा हमरा तs पूर्ण विश्वास छल जे लल्लन जी के किछु नहि होयतैन्ह मात्र किछु दिनक ग्रहक चक्कर छैक, तथापि चिन्ता तs होइते छल । हम इ कोना कही जे चिन्ता नहि होइत छल । हमारा सब केर वेल्लोर सs अयालक किछु मास बाद दादा जी (हमर ससुर) अयलाह। एक दिन दादा जी लल्लन जी सs गप्प करैत छलाह, हम दोसर कोठरी में छलहुँ मुदा हुनकर सबहक गप्प ओहिना स्पष्ट सुनाई परैत छल । जहिना हम हिनक बिमारी के विषय में गप्प करैत सुनालियैक ओहि घर में रुकि गेलहुँ आ दादा जी आ लल्लन जी केर गप्प सुनय लगलहुँ । दादा जी हिनका सs कहैत छलाह "अहाँ चिंता जुनि करू अहाँ केर मात्र ग्रहक चक्कर अछि , हम बेबी बाबु सs अहाँक आ अपन टिपनि देखेलियैक अछि अहाँके किछु कष्ट अवश्य अछि मुदा हमरा पुत्र शोक नहि अछि "। इ सुनी लल्लन जी आ दादा जी केर मुख मंडल पर आबय वाला भाव तs हम नहि देखी सकलियैक मुदा कल्पना अवश्य केलहुँ । खास कs लल्लन जी केर जिनका हम खूब नीक सs चिन्हैत छलियैक । हम आगू नहि सुनी सकलियैक आ ओहि ठाम सs चलि गेलहुँ । मनुष्य कतेक विवश होइत छैक ?


दादा जी अपन इच्छा हिनका लग व्यक्त कयने रहथि जे हुनक इच्छा छलैन्ह जे हुनक बेटा सब सेहो मधुबनी में घर बनाबथि , हमरा एक बेर लल्लन जी इ बात कहने छलाह । दादा जी जमशेदपुर सँ गेलाक किछुए दिन बाद एकटा चिट्ठी पठौलथि जाहि में लिखने छलाह जे ओ मधुबनी में मकानक लेल जमीन देखि रहल छथि संगहि गाम पर सेहो एकटा जमीन छैक आ हुनक इच्छा छैन्ह जे ओ जमीन लल्लन जी लs लेथि । चिट्ठी अयलाक किछुए दिन बाद दादा जी केर दोसर चिट्ठी अयलैन्ह जाहि में ओ लल्लन जी के पाई लs कs गाम वाला जमीन रजिस्ट्री कराबय लेल आबय के लेल लिखने छलाह संगहि एकटा मधुबनी में मकान लेल नीक जमीन छलैक सेहो लिखने छलाह । लल्लन जी मधुबनी गेलाह आ गामक जमीन रजिस्ट्री करा लेलथि संगहि हुनका मधुबनी वाला जमीन सेहो पसीन आबि गेलैन्ह आ ओहि जमीन वाला सँ सेहो गप्प करि कs आबि गेलाह । किछु दिन बाद पाई केर इंतजाम करि कs दादा जी केर पठा देलथिन्ह आ दादा जी केर जमीन रजिस्ट्री कराबय लेल कहि देलथिन्ह । हमरा कहलाह "ओना तs हमरो इच्छा नहि छल मधुबनी में मकान बनेबाक, मुदा दादा कहि देलाह तs हुनकर इ इच्छा अवश्य पूरा होयतैन्ह "।


लल्लन जी केर सोचब सच में ठीक छलैन्ह, जमीन किनला के बाद सs दादा जी बड खुश रहैत छलाह । Tisco सँ घर बनेबाक लेल क़र्ज़ (loan) भेटय में किछु समय लागि गेलैक । ता धरि दादा जी नींव दियेबाक सबटा दिन देखवा लेलाह । नींव देलाक सँग घर बनय लगलैक हम दुनु गोटे सँग में पंडित जी सेहो मधुबनी घर बनेबाक लेल गेल छलहुँ । पता नहि कोन धुन छलैन्ह आ की सोचय छलाह मुदा हम सब जे सोचि कs घर बनाबय लेल गेल रही ताहि सँ बेसी नीक घर बनि गेलैक । एक तs अपने" सिविल इंजिनियर " मकानक सबटा नक्सा अपने बनने छलाह आ दुनु गोटे ठाढ़ रहैत छलहुँ तs किछु नय किछु अपन सुविधाक ध्यान आबिये जाइत छल । मिला जुला कs हमरा सबहक हिसाबे जतबा मकान मद में लगबाक चाहि ओहि सँ बहुत बेसी भs गेलैक मुदा कोनो वस्तु में हम सब कटौती नहि केलियैक सब सामन नीके लगायल गेलैक। बेसी सामन तs जमशेदपुर सँ ट्रक सs किनि कs पठायल गेल छलैक । मकान बनैत छल ओहि समय में कखनहु कs हमरा मोन में होइत छल जे बेकार में एतेक खर्च कs रहल छियैक मकान केर पाछू मुदा हिनका नहि कहि पाबियैन्ह । मकान बनय में तs ओना छौ मास लागि गेलैक मुदा दो मास लगातार हम , लल्लन जी आ पंडित जी (जे हमर बेटे सन छथि ) तीनू गोटे छलहुँ ओहि केर बाद बीच बीच में हम आ लल्लन जी अबियैक आ किछु दिन रहि चलि जाइत छलियैक मुदा पंडित जी छौ मास धरि लगातार रहलाह आ मकान बनि गेलाक बादे जमशेदपुर आपस गेलाह ।


खैर छौ मास में मकान बनि कs तैयार भs गेलैक । गृह प्रवेशक दिन देखा कs गृह प्रवेश सेहो खूब धूम धाम सँ भेलैक । गृह प्रवेशक किछुए दिन बाद हमर देवर केर विवाह छलैन्ह जाहि में लल्लन जी बड उत्साहित छलाह आ विवाह सेहो नीक सँ संपन्न भेलैक । गृह प्रवेश सँ विवाह धरि ओहि बेर हम सब करीब एक मास मधुबनी में रही आ अपन ओहि मकान में छलहुँ मुदा एकटा प्रसन्नता होइत छैक, से पता नहि कियैक हमरा भीतर सँ नहि होइत छल। इ भावी दुखक संकेत छल कि की, नहि जानि ।

Thursday, September 10, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (बाइसम कड़ी)

डॉक्टर प्रसाद जाँच कयलाक बाद कहलाह एहि बेर तs WBC केर काज नहीं छैक मुदा दोसर बेर परि सकैत छैक। एक बरखक दवाई आ डॉक्टर बी. एन. झा केर नाम सs सबटा रिपोर्ट बना कs देलाह आ फेर एक साल बाद आबय लेल कहलाह । वेल्लोर आबय समय एकर एको रत्ती भान नहि छल जे एतेक गंभीर बीमारी भs सकैत छैन्ह। जाहि दिन डॉक्टर कुरियन बीमारी के विषय में बतेलाह ताहि केर बाद सs हमर जेना माथ सुन्न भs गेल छल । ई बुझय में नहि आबय जे हम की करी। नहि हम बिमारी के विषय में हिनका सs गप्प कs सकैत छलहुँ आ नहि हमरा में अतेक हिम्मत छल जे हम किनको आओर सs बिमारी के विषय में गप्प करितहुं। बच्चा सब तs बहुत छोट छलथि ।


जमशेदपुर पहुँचलहुँ तs लोकक एनाई गेनाइ शुरू भs गेलैक मुदा हमरा एको रत्ती नीक नहि लागय, की कहिये लोक सब सs से नहि बुझय में आबय आ नय हम ओहि समय हुनका लग रहि जे किछु कहब या कि सुनब । लल्लन जी अपनहि जे कहबाक के रहैन्ह कहथि । ओहो कि कहितथि, कहि दैत छलाह जे सब ठीक भs जेतैक दबाई देने छथि डॉक्टर । भीतर में हमरा की होइत छल ई तs हम वर्णन नहि कs सकैत छी मुदा ऊपर सs अवश्य देखेबाक कोशिस करियैक जे सब ठीक छैक । बाबुजी के सेहो पूरा गप्प नहि बुझल छलैन्ह ।


माँ बाबुजी चलि गेलाह आ फेर हम ई आ दुनु बच्चा रहि गेलहुँ । एक एक कs परिवारक सब कियो हिनका देखय लेल अयलाह, ओहि में मात्र बिनोदजी (हमर बहिनक पति ) जे की स्वयं डॉक्टर छथि, केर छोरि आओर किनको बीमारी के विषय में नहि बुझल भेलैंह। वेल्लोर सs आबि ई तुरन्त ऑफिस जाय लगलाह संगहि दवाई सेहो चलय छलैन्ह ।


बीमारी केर ओहि समय केर वर्णन केनाइ हमरा लेल बड कठिन अछि । हमरो बुझल आ हिनको बुझल छलैन्ह जे बीमारी खतरनाक छैक आ डॉक्टर केर हिसाबे १५ साल सँ बेसी आदमी एहि बिमारी में नहि जीवय छैक तथापि हम दुनु गोटे एहि सन्दर्भ में बात केनाई तs दूर कहियो ई नहि बूझय देव चाहिए जे हम एहि सs चिंतित छी । सच पूछू तs हमर तs मोन कहियो नहि मानय जे हिनका एहेन बिमारी छैन्ह । सब दिन मोन में होय जे एतेक नीक लोग आ शंकर जी केर भक्त के ऐना कहियो नहि भs सकैत छैक, ठीक भs जेतैन्ह । हम अपना भरि तs सदिखन हुनकर ध्यान राखियैन्ह आ कोशिस राखी जे कोनो बात सs ई नहि बुझय में आबैन्ह कि हम हिनकर बिमारी सs चिंतित छी। नहि जानि कियैक मुदा हमरा सब दिन हिनकर काज करय में नीक लागैत छल आ हम हिनकर सब काज अपनहि करैत छलियैक । बीमार भेला पर तs स्वाभाविक छलैक काज बेसी होइत छलैक मुदा ओ हम अपनहि करैत छलियैक।


एहि बीच में बिनोद जी के पता चललैन्ह जे बनारस कोनो होमियोपेथिक डॉक्टर छैक जे एहि तरहक रोगक इलाज करैत छैक तs ओ ओहि ठाम जा ओकरा ओतहि सs दवाई लs आनलथिन्ह, जे हर तीन घंटा पर देबय के छलैक । घर पर देलाक बाद हम ऑफिस जयबाक समय संग दs दियैन्ह। राति में से छोरबाक नहि छलैक , हम घडी में अलार्म लगा ली आ हर तीन घंटा पर उठि उठि कs दबाई दियैन्ह। मोन में होइत छल भगवान कहुना हिनका निक कs देथुन। हमारा भगवान पर पूर्ण विश्वास छल जे ओ नीक कs देथिन्ह। हमरा घर में खास कs हमर माँ भोला बाबा के भक्त छथि ओ सदिखन कहैत भोला बाबा के मोन स ध्यान कयला सs ओ अवश्य सुनय छथि। हमरा होय जँ हम मोन सs भोला बाबा के ध्यान करबैन्ह तs अवश्य ओ हमर सुनताह कियैक नहि सुनताह। दबाई तs सब दिन हम जागि जागि क देलियैन्ह आ पूरा से भेलैक मुदा किछुए दिन बाद पता चललैक जे ओ डॉक्टर धोखेबाज छलैक आ लोक के दबाई में स्टेरोइड मिला कs दैत छलैक । खैर ई सिलसिला त चलैत रहलैक। जहाँ कियो कहथि व पता चलैक जे डॉक्टर या वैद नीक छथि या ओ किनको ठीक कयलथि या हुनका ओहि ठाम गेला सs फायदा भेलैन्ह हम ओहि ठाम जयबाक लेल हिनका मना लियैन्ह आ देखा दियैन्ह मुदा डॉक्टर प्रसाद केर दबाई कहियो बन्द नहि केलियैन्ह।


वेल्लोर सs अयालक किछु मास बाद बिनोद जी आ सोनी( हमर दोसर बहिनक पति आ बहिन) केर भयानक दुर्घटना भ गेलैन्ह ई सुनतहि हम दुनु गोटे धनबाद पहुचलहुँ । भगवानक इच्छा छलैन्ह जे ओ सब बाचि गेलथि । धनबाद आ पटना में इलाज करेलाक बाद हुनका सेहो इलाजक लेल वेल्लोर जेबाक छलैन्ह। हम आ लल्लन जी दोसर बेर वेल्लोर असगर गेलहुँ । बिनोद जी किछु दिन केर बाद पहुँचलाह आ हुनका सँग हुनक भाय आ एकटा संगी छलथिन्ह । एहि बेर फेर किछु दिनक लेल लल्लन जी के अस्पताल में भर्ती होमय परलैन्ह आ सबटा जाँचक बाद डॉक्टर प्रसाद हिनका दबाई देलथिन्ह आ chemotherapy शुरू करबाक लेल कहि अस्पताल सs छोरि देलथिन्ह मुदा ओ एहि बेरक रिपोर्ट सs खुश नहि छलाह , जतबा सुधार के हुनका आश छ्लैन्ह ततबा नहि भेल छलैन्ह


वेल्लोर
में डॉक्टर के जे कहबाक रहैत छैक से ओ सबटा मरीज आ घरक लोक वा जे कियो सँग में रहैत छैक हुनके सोझा में कहि दैत छथि । लल्लन जी के बिमारी केर विषय में सेहो हमरा आ लल्लन जी केर सोझा में ओ सब किछु कहैत छलाह । लल्लन जी तs किछु किछु डॉक्टर सs पुछि लैत छलाह मुदा हमरा हिम्मत नहि होय जे हम किछु पुछितियैन्ह । हमरा सब दिन मोन में आशंका बनल रहैत छल जे हमरा पूरा तरह हुनक बिमारी के विषय में नहि बुझल अछि। एक दिन हम विचारलहुँ जे असगर डॉक्टर प्रसाद लग जाय कs हुनका सs हम पुछबैन्ह हमरा लल्लन जी के सोझा में पुछय केर हिम्मत नहि छल । अस्पताल सs जहिया छुट्टी भेटल छलैक ओहि दिन हम लल्लन जी के कहलियैन्ह अहाँ किछु समय बिनोद जी लग हुनके केबिन में बैसु हुनको नीक लागतैंह आ हम किछु बजार सs लेने आबैत छी ताहि केर बाद होटल चलब । हम ई कहि हुनका सँग बिनोद जी केर केबिन गेलहुँ आ किछु समय बाद लल्लन जी के छोरि ओहि ठाम सs निकलि सीधा डॉक्टर प्रसाद लग चलि गेलहुँ। हुनका स जे जानकारी भेटल ओ सुनि हमर तs माथ घुमि गेल मुदा हम अपन हिम्मत नहि छोरलहुँ आ ओहि ठाम सs सीधे निकलि बिनोदजी केर केबिन दिस जेबाक लेल जहिना निकललहुँ सामने लल्लन जी के आबैत देखि हम चुप चाप दोसर दिस मुडि गेलहुँ । हम हुनका डॉक्टर प्रसाद केर कक्ष में जाइत साफ़ देखलियैन्ह मुदा ओ हमरा नहि देखि पयलाह । एहि तरह केर हम सिनेमा में देखने छलियैक मुदा असल जीवन में हमरा सँग होयत, ई कहियो सोचनहु नहि छलियैक । हम सीधा बिनोदजी केर केबिन के लेल चलि देलहुँ मुदा रास्ता भरि डॉक्टर प्रसादक बात दिमाग में घुमैत छल जे आब अहाँ दोसर बेर WBC आ bone marrow transplantation केर सोचि कs आयब, दोसर ई जे बाद में हड्डी ततेक कमजोर भs जयतैन्ह जे बहुत ध्यान देबय पड़त नहि तs हड्डी टूटय के डर रहतैंह तेसर ई जे हुनक चालिस प्रतिशत cells malignant छलैन्ह जे डॉक्टर केर कहनानुसार ठीक नहि छलैक।


हम इ त बुझिए गेल छलहुँ जे लल्लन जी सेहो हमरा परोछ में किछु डॉक्टर प्रसाद सँ पुछय चाहैत छलाह आ ओहि लेल हुनका लग गेल छलाह । इ सोचि हमरा आओर भीतर सँ तकलीफ होइत छल जे हुनका सब बात बुझल रहतैंह तs हुनका मोनमें सदिखन तरह तरह केर भावना आबैत रहतैंह। हमरा वेल्लोर अस्पताल केर आ डॉक्टर केर इ एको रत्ती नीक नहि लागल। कम स कम रोगी के नहि बतेबाक चाहि। हम सदिखन अपन किस्मत पर गौरवान्वित होइत छलहुँ आ आजु होइत छल हे भगवान हमर इ भ्रम के नहि तोरु ।


बिनोद जी केर केबिन में पहुँचि हम बैसि गेलहुँ, एक बेर नहि पुछालियेंह हिनका विषय में । बिनोद जी अपनहि कहलाह , "ठाकुर जी नहि भेटलाह ओ तs अहिं के ताके लेल गेलाह अछि । हम बस एतबहि कहलियैन्ह आबि जयताह । हम अपन मोन में आबय वाला एक एक टा उद्वेग के कोना कहितियैन्ह ।

Tuesday, August 25, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (इकिसम कड़ी )

हम डॉक्टर कुरियन सs भेंट करि केबिन दिस जाइत छलहुँ रास्ता में हमरा चक्कर आबि गेल आ हम एक ठाम कुर्सी पर बैसि गेलहुँ। पॉँच दस मिनट केर बाद हम केबिन पहुँचलहुँ, बाबुजी आ इ हमरा लेल चिंतित छलैथ जे हम कतs चलि गेल छलहुँ, देखैत देरी पुछलाह "कतs गेल छलहुँ "। हम कहलियैन्ह "खून देबय लेल, दs देलियैक आ आब साँझ में अहाँके खून चढत "।


साँझ में हिनका जल्दी भोजन करवा देलियैन्ह खून चढ़ेनाइ शुरू भेलैक ओकर किछु समय बाद बाबुजी के होटल पठा देलियैन्ह आ हम हिनका बगल में बैसि गेलहुँ। कतबहु कहैथ सुति रहु हमरा कियैक नींद होयत एक तs चिंता दोसर हम जमशेदपुर में देखने रहियैन्ह जहाँ हमर ध्यान दोसर दिस देखैथ तs झट द tube के पकरि ओकर speed बढ़ा दैत छलाह जे कहुना खून चढेनाइ जल्दी खतम भs जाय। राति में इ सुति रहलाह आ हम हिनकर हाथ पकरने बैसल रहि गेलहुँ आ जखैन्ह पूरा खून चढि गेलैन्ह तs नर्स के बजा ओकर पाइप सब निकलवा ताहि केर बाद बगल वाला बिछावन पर परि रहलहुँ।


दोसर दिन भोर में डॉक्टर के आबय सs पहिने नर्स आबि जाँचक लेल हिनकर खून लs गेलैन्ह आ ओकर दोसर दिन भोर में bone marrow होमय के छलैक ।


डॉक्टर कुरियन अपन पूरा डॉक्टरक दल सँग अयलाह हुनका देखैत नहि जानि कियैक हमरा आशंका आ डर दुनु होमय लागल। हमरा मात्र एतबा बुझल छल जे रीढ़ केर हड्डी सs खून लेल जयतैन्ह जे कष्टप्रद होइत छैक। डॉक्टर सब जहिना हिनकर केबिन में घुसलथि हमरा आ बाबुजी के बाहर जेबाक लेल कहि देलैथ। हम तs एक सँग ओतेक डॉक्टर के देखि घबरायल छलहुँ। बाहर में ठाढ़ पचास तरहक मोन में आबैत छल। अचानक हिनकर कानय केर आवाज बुझायल, ओ सुनतहि हमरा कना गेल आ हमर आँखि के आगु जेना अन्हार भs गेल। हम बाबुजी के बिना किछु कहनहि जा एकटा कुर्सी पर बैसि गेलहुँ । बाबुजी के कोना अपन स्थिति केर विषय में बुझय देतियैन्ह । डॉक्टर जखैन्ह बाहर निकलाह तs हमरा कहलैथ अहाँ सब आब भीतर जाऊ । भीतर गेलहुँ तs इ कानैत छलाह आ हमरा देखैत देरी कहि उठलाह "मारि देलक "। हम वर्णन नहि करि सकैत छी जे हमरा ओहि समय में असगर केहेन बुझायल, बाबुजी छलाह मुदा हुनका सोंझा हम अपन वेदना के कोना प्रकट होमय दितियैन्ह , ओ नहि रहितथि तs हम अवश्य कानय लगितौन्ह।


दोसर दिन डॉक्टर कुरियन अपन डॉक्टरक दल सँग सबटा रिपोर्ट लs कs अयलाह , आ आबि श्री ठाकुर जी केर बगल में बैसि गेलाह। पहिने हुनक हाल चाल जे कि सब दिन पुछैत छलाह पुछलाह आ ताहि केर बाद अपन असली मुद्दा पर अयलाह। सब सs पहिल ओ हमरा सब केर कहलाह हम सबटा रिपोर्ट देखि लेने छी आ इ निष्कर्ष निकलल अछि जे अहाँक "cell malignant" अछि। ओहि समय में हम इ तs नहि बुझैत छलहुँ जे "malignancy" की होइत छैक मुदा इ बुझा गेल जे किछु ख़राब बीमारी छैक, किछु गरबर छैक। डॉक्टर कुरियन सबटा बात बताबैत कहलाह आब चूँकि इ "oncology department" केर case छैक ताहि लेल हम अहाँ के "oncology department" पठा रहल छी। oncology शब्द सुनैत केर सँग हमरा जेना सब बुझय में आबि गेल आ ओकर बाद हमरा मुँह स एक शब्द किछु नहि निकलल जे हम डॉक्टर सँ किछु पुछितियैन्ह । डॉक्टर कुरियन अपन सहायक डॉक्टर सब केर कहि कs चलि गेलाह जे अस्पताल सँ छुट्टी देबाक लेल आ "oncology" विभागक डॉक्टर सs देखबाक लेल सबटा कागज तैयार करि देबाक लेल। हम सब आपस होटल आबि गेलहुँ।


दोसर दिन हम सब होटल सs सीधा oncology department डॉक्टर प्रसाद लग पहुँचलहुँ । ओहि दिन हम आ श्री ठाकुर जी गेल छलहुँ। बाबुजी के आँखि देखेबाक छलैन्ह ओ आँखि वाला अस्पताल चलि गेल छलाह, जे एक तरह सँ नीके छलैक । डॉक्टर प्रसाद जे हमरा सोंझा में कहलथि से भगवान कोनो पत्नी के ओ दिन नहि देखाबथि जे हुनका ओ सुनय परैन्ह । डॉक्टर प्रसाद विस्तार सs बिमारी के विषय में बतेलाक बाद कहलथि जे इ बिमारी में लोक बेसी सs बेसी पन्द्रह साल जीबैत छैक। किछु आओर जाँच से कराबय लेल कहलाह मुदा ओ बाहर रहि सेहो करायल जा सकैत छलैक । हम सब आपस होटल अयलहुँ, इ त बहुत राति तक जागल रहलाह आ ओकर बाद सुति गेलाह मुदा हम तs भरि राति जागले रहि गेलहुँ। दुनु गोटे एक दोसरक स्थिति बुझैत छलियैक मुदा कथि लेल राति भरि में एको शब्द बाजि होयत । भोर में तैयार भs समय पर डॉक्टर प्रसाद लग पहुँचि गेलहुँ ।


डॉक्टर प्रसाद किछु जाँच केलाक बाद कहलैथ जरूरत परतैक तS "WBC" बदलय परतैक आ ओहि लेल एक गोट अपन आदमी के तैयार रहय पड़त जिनकर " WBC "लेल जा सकैत अछि । ओ "WBC" बदलय केर सबटा प्रक्रिया बता देलाह । हमरा एकटा फॉर्म द ब्लड बैंक जेबाक लेल कहलाह आ हिनका फेर सs भरती हेबाक लेल । हम हिनका केबिन में पहुँचा ओहि ठाम सs फेर ब्लड बैंक पहुँचि गेलहुँ । ब्लड बैंक केर डॉक्टर हमरा हाथ सँ फॉर्म लs एकटा कुर्सी पर बैसय कहलाह। किछु समय बाद आबि खून निकालि लेलैथ। हम जहिना कुर्सी पर सs उठय चाहलहुँ हमर माथ घुमि गेल आ हम धम्म सs फेर कुर्सी पर बैसि गेलहुँ । इ देखि हमर बगल में नर्स छलैथ से पकरि हमरा तुंरत बेड पर सुता देलिह । हम उठलहुँ तs डॉक्टर हमरा कहय लगलाह, "हम अहाँक खून नहि लs सकैत छी कियैक तs अहाँ जाँच समय में बेहोश भs गेलहुँ अछि। इ सुनतहि हमरा कनाइ छुटि गेल मुदा हम अपना आप के रोकि लेलहुँ आ ओहि ठाम सँ निकलि चलि देलहुं।


हमरा किछु नहि फ़ुराइत छल हम की करी हमरा संग आओर कियो नहि छलाह । हम मोन दुखी कयने चलल जाइत छलहुँ आ सोचैत छलहुँ आब की होयत। अचानक सामने में डॉक्टर कुरियन पर नजरि गेल ओ हमरा देखि हमरे तरफ आबैत छलाह। ओ हमरा पुछलाह " डॉक्टर प्रसाद की कहलाह", हम हुनका सबटा परिस्थिति बता देलियैन्ह आ इहो जे हमरा लग दोसर कियो नहि छैथ हम आब की करी। ओ तुरन्त कहलाह अहाँ घबराऊ जुनि जरूरत परतैक तs हम अपन WBC अहाँक पति के देबैन्ह । इ सुनैत देरी हम अपना आप के नहि रोकि पयलहुँ आ कानय लगलहुँ । मोन में भेल कि एहनो डॉक्टर होइत छैक? ओ वाक्य आय धरि डॉक्टर कुरियन केर क़र्ज़ हमरा लग अछि। आय धरि हम डॉक्टर कुरियन के कहल वाक्य नहि बिसरि सकलहुँ।

Monday, August 24, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (बीसम कड़ी )

हमर एकटा स्वभाव अछि, जे आई धरि हम नहि बदलि सकलियैक अछि, आ आब शायद बदलि नहि सकैत छियैक। हमरा मोन में खराप बात बहुत जल्दी आबि जायत अछि। पचास तरहक आशंका तुंरत आबि जायत अछि। हम कतबो कोशिस करैत छियैक जे मोन सs निकालि दियैक मुदा कियैक ओ निकलत। चाहे कियो घर सs बाहर गेल होयथ आ समय पर नञ लौटल होयथ किंवा कोनो तरहक मोन खराप होय। हम बहुत जल्दी घबरा जायत छी। आ तखैन्ह नञ हमरा खएबा में नीक लागैत अछि आ नञ दोसर कोनो काज में। इ हमर सबस पैघ कमजोरी अछि एहि लेल हमरा हमर शुभ चिन्तक बेटा हमर पति आ हमर सब सs नीक संगी जे आई धरि एकहि टा छथि सेहो कैयैक बेर समझौलैथ आ समझाबैत छथि मुदा ओहि स्वभाव के हम नहि बदलि सकलहुँ।


हम सोचि के अस्पताल गेल छलहुँ जे हम श्री ठाकुर जी के लs कs घर अयबैन्ह आ अनबो कयलहुँ मुदा हमरा पता चलल आ डॉक्टर बी.एन.झा कहलैथ जे bone marrow कराबय परतैन्ह आ ओहो वेल्लोर जाय कs , इ सुनतहि हमरा जेना खराब दिनक आशंका भs गेल। ओना तs डॉक्टर साहब बुझेलथि जे जमशेदपुर में सेहो bone marrow भs सकैत छलैन्ह, चूँकि ओ चाहए छलथिन्ह एक बेर वेल्लोर में सबटा जाँच भs जाय ताहि लेल ओ जमशेदपुर में आगू जाँच नञ कराय वेल्लोर पठा रहल छलथिन्ह। ओहि दिन, राति भरि हमरा कियैक नींद होयत। भरि राति सोचितहि प्रात भs गेल।


दोसर दिन सs वेल्लोर जेबाक आ अगुलका जाँच करेबाक विषय में सोचय के छल, आ हम सब सब सँ पहिने अपन बहिन जमाय, यानि छोट बहिनक पति जे नीक डॉक्टर छथि आ धनबाद में छलाह हुनका सs गप्प कयलहुँ। ओहि समय हमर बाबूजी सेहो धनबाद में छलाह। सब सs बात बिचारक बाद भेलैक जे बाबुजी हमरा सब सँग वेल्लोर जयताह आ माँ बच्चा सब संग जमशेदपुर में रहतिह।


बाबुजी श्री ठाकुर जी आ हम तीनू गोटे साँझ में वेल्लोर पहुँचलहुँ। होटल पहुँचि आ तैयार भs एक बेर अस्पताल गेलहुँ आ अस्पताल देखि आबि गेलहुँ। राति भरि हमरा कियैक नींद होयत भोर में हम सब समय पर तैयार भs अस्पताल पहुँचि गेलहुँ। अस्पताल में तs किछु दिक्कत नहि छलैक मुदा जाहि डॉक्टर के ओहि ठाम डॉक्टर बी. एन. झा पठेने रहथि हुनक विषय में हम सब पता करय के लेल घुमि रहल छलहुँ। हमरा सब केर घुमैत देखि एक सज्जन रुकि कs पुछलाह " अहाँ सब केर कोनो दिक्कत अछि वा किनको खोजि रहल छि"? हम तुंरत कहलियैन्ह "असल में हमरा सब केर डॉक्टर कुरियन सs देखेबाक अछि, हुनके खोजि रहल छियैन्ह" । सुनतहि ओ पुछलाह "अहाँ सब रजिस्ट्रेशन करवा लेने छी "? जहिना हम सब कहलियैन्ह नय करवाबय के अछि, ओ तुरंत अपना संग लs जा रजिस्ट्रेशन करवा संग चलय लेल कहलाह आ ओकर बाद कुर्सी सब लागल हॉल छलैक ओहि ठाम बैसय लेल कहि कतहु चलि गेलाह। श्री ठाकुर जी केर नाम लs बजेलकैन्ह हम तीनु गोटे भीतर गेलहुँ । भीतर पहुँचि हम जे देखलहुं तs हमर आश्चर्यक ठेकान नहिं रहल। डॉक्टर कुरियन आओर कियो नहि, ओ तs ओ व्यक्ति छलाह जे हमरा सब केर सब काज करवा अपना सँग ओहि ठाम तक अनने छलाह । हम बाबुजी आ श्री लल्लन जी तीनु गोटे एक दोसराक मुँह तकैत रहि गेलहुँ । विश्वास नहिं भेल जे एतेक नामी आ पैघ डॉक्टर के इहो रूप होइत छैक । हम सब तs कहियो कल्पना में सेहो नहि सोचने आ देखने रहियैक डॉक्टर के इ रूप ।


डॉक्टर कुरियन पहिने जमशेदपुरक पूरा रिपोर्ट देखि आ विस्तार सs सब किछु पुछलाह आ ताहि केर बाद इ कहि अस्पताल में भर्ती होयबाक लेल कहलाह जे दू तीन दिन में सबटा जाँच भs जायत ताहि केर बाद हम अहाँ सब केर किछु कहि सकैत छी। अस्पताल में भर्ती करेलाक बाद दू तीन दिन तक हम सब दिन, राति में हिनकर भोजनक बाद करीब १० बजे आपस होटल बाबुजी केर सँग आबि जायत छलियैन्ह । मोन तs अयबाक नहिं होयत चल मुदा बाबुजी आ हिनकर जिद्द रहैत छलैन्ह तs आबि जाइ ।राति भरि हम किछु किछु समय पर बाथरूम जाइ आ समय देखि । भोर ६ बजे सs पहिनहि अस्पताल पहुँचि जायत छलहुँ बाबुजी अपन बाद में आबथि।


एक सप्ताह धरि जाँच आ रेपोर्टक सिलसिला चलैत रहलैक आ एक सप्ताह बाद एक दिन डॉक्टर कुरियन अपने अपन पूरा डाक्टरक दल सँग अयलाह । एक टा चीज हम वेल्लोर अस्पताल में देखलहुँ जे कोनो ठाम देखय के लेल नहिं भेटल। ओहि ठामक डाक्टर सब पूर्ण रूपेण मरीज के लेल समर्पित रहैत छथि आ ताहू में डाक्टर कुरियन के हम महान कहि सकैत छियैन्ह । सब दिन ओ आबि पहिने मरीज वाला बिछावन केर बगल में एकटा आओर बिछावन रहैत छलैक ओहि पर बैसि जाइत छलाह आ पहिने हाल चाल पुछैथ । ओहियो दिन आबि बैसी गेलाह आ हाल चाल पुछलाह, ताहि केर बाद कहलाह "आब सबटा रिपोर्ट तs आबि गेल अछि, मुदा हम सब bone marrow करबैन्ह जाहि मे बहुत कष्ट होइत छैक। ठाकुर जी केर खून बहुत कम छैन्ह जाहि लेल हमरा सब केर खुनक आवश्यकता परत आ अहाँ सब मे सs एक गोटे के खून देबय पडत। हम तुंरत खून देबाक लेल तैयार भs गेलहुँ। हमरा घर में हमर चारू गोटे के एकहि ग्रुप केर खून छैक। डाक्टर कुरियन हिनका देखि जखैन्ह बाहर गेलाह तs हुनक एकगोट सहायक डाक्टर हमरा बाहर बजेलाह आ हमरा एकटा फार्म दs blood bank जा खून देबाक लेल कहलथि ।


हम फार्म लेलाक बाद हिनकर केबिन मे नहिं गेलहुँ आ सोझे blood bank चलि गेलहुँ। नर्स के जहिना फार्म देखेलहुँ ओ तुंरत एक टा कुर्सी पर बैसेलथि आ किछु समय बाद हमरा एकटा खूब पैघ हॉल मे लs गेलिह । जहिना हॉल मे हम पैसलहुँ पूरा हॉल मे सब ठाम सब बिछावन पर लोक सुतल खून दैत छल । इ देखतहि हमर डर सs हालत ख़राब भs गेल । हमरा सूई सs बड डर होइत छलs आ सुनने रहियैक जे blood donation मे बहुत समय लागैत छैक।मोन में एक सँग कैयैक टा प्रश्न उठैत छल जाहि मे पहिल ई: जँ हम बेहोश भs गेलहुँ तs की होयत ?हमरा सँग आओर कियो नहि छलs । बाबुजी के हम खून देबय लेल नहि कहितियैन्ह ।


सूई घुसाबय सs पहिने तक हम बहुत डरल छलहुँ मुदा एक बेर सुई घुसा देलक ताहि केर बाद साहस बढि गेल आ दर्द से नहि होइत छल। जखैन्ह हमरा बुझय में आबि गेल, हम बेहोश नहि होयब तs हम नर्स सs पुछलियैक "इ खून हमर पति के देल जयतैन्ह नय" ? ओ कहलक " नहि अहाँक पति के दोसर खून हुनक ग्रुप के देल जायत जे bank सs उपलब्ध होयत "। हम सुनने छलियैक जे bank में HIV केर जाँच नहि होइत छैक जाहि चलते मात्र सम्बन्धी व जे मरीजक संग आयल रहैत छथि हुनके खून लेल जाइत छलैक , इ सुनतहि हमरा और मोन बेचैन होमय लागल तथापि हम ओहि blood bank केर विभागाध्यक्ष छलैथ हुनका बजवोलियैन्ह आ कहलियैन्ह हमर आ हमर पति केर खुनक एकहि ग्रुप छैन्ह । ओहो हमरा कहलथि ई संभव नहि छलैक । हमरा किछु नय फ़ुराइत छल, तथापि हम हुनका आग्रह केलियैन्ह जे "हमर खून पर हमर नाम आ मरीजक नाम लिखि राखि दियोक आ किछु घंटा रुकि कs कोनो दोसर ठाम खून पठाबियौक , ताबैत हम डॉक्टर कुरियन सs भेंट कयने आबैत छि "। डॉक्टर कुरियन केर नाम सुनतहि डॉक्टर हमरा कहलैथ "ओना तs हम सब, सब खून पर खून देबय वाला केर नाम,मरीजक नाम आ तारीख लिखि दैत छियैक । डॉक्टर कुरियन कहि देताह तs हम अहींक खून अहाँक पति लेल पठा देबैन्ह "।



नर्स आबि हमर सुई निकालि देलैथ आ हमरा हिदायत देलैथ जे कम स कम १५ मिनट रुकय लेल मुदा हम सुई निकालैत के संग अपन चप्पल पहिरलहुं आ तुंरत ओहि ठाम सs बिदा भs गेलहुं । हम देखलियैक नर्स चाय लय आबि रहल छलैथ मुदा हमरा ओहि समय इहो होश नय छल जे हम खून देने छलियैक तुंरत नय जयबाक चाही । हम आठ नौ दिन सs वेल्लोर में छलहुँ आ ओतबा दिन में ततेक बेर डॉक्टर कुरियन सs काज पड़ल छलs जे कोन समय में डॉक्टर कुरियन कतय रहैत छथि से हमरा बुझल भs गेल छल । हम जल्दी जल्दी ओहि वार्ड पहुँचलहुँ मुदा पता चलल डॉक्टर कुरियन ओहि ठाम नहि छलाह ओहि वार्ड केर डॉक्टर हमरा दोसर वार्ड केर नाम बता कहलथि अखैन्ह ओहि ठाम भेटताह , हम लगभग दौरति ओहि वार्ड तक पहुँचलहुँ ।

वार्ड में पहुँचलहुँ ताबैत धरि पसीना सs लथपथ भs गेल छलहुँ हमरा देखि केयो कहि सकैत छलs जे हम थाकल आ परेशान छी । वार्ड में पहुँचति देरी हम डॉक्टर कुरियन केर सहायक डॉक्टर सs हुनका विषय में पुछलियैन्ह मुदा ओ हमारा जवाब देबय सs पहिने पुछलाह "आखिर की बात अछि अहाँ एतेक घबरायल कियैक छि? पहिने अहाँ बैसू आ हमरा कहू की बात छैक "? आ तुंरत एक ग्लास पानि मँगा कs पिबय लेल देलाह , मुदा हम पानि पिबय सs पहिनहि एक साँस में हुनका सब बात बता देलियैन्ह आ कहलियैन्ह" हमारा डॉक्टर कुरियन केर मदद चाही" । ओ तुंरत कहलाह अहाँ के हम कतहु नय जाय देब हम तुंरत डॉक्टर कुरियन के एहि ठाम बजा दैत छियैन्ह । तुंरत अपन पेजर निकालि खबर पठा देलथि हुनक समाद अखैन्ह खतमो नहि भेल छलैन्ह कि हम डॉक्टर कुरियन के आबैत देखलियैन्ह । हम दौरि क डॉक्टर कुरियन लग पहुँचलहुँ आ सबटा बात बता देलियैन्ह । हमर गप्प सुनैत देरी डॉक्टर कुरियन हमरा कहलाह "अहाँ घबराऊ जुनि, अहीं केर खून अहाँक पति के देल जयतैन्ह" आ फ़ोन उठा ओहि ठाम सs blood bank केर विभागध्यक्ष के फ़ोन करि कहि देलथिन्ह जे "श्री ठाकुर जी केर केबिन में हुनक पत्नी जे खून देने छथिन्ह सैह पठायल जाय "। एतवा वाक्य सुनि हमरा जे ख़ुशी भेटल ताहि केर हम वर्णन नहि कs सकैत छियैक । एहि देश में एहेनो डॉक्टर छैथ ताहि केर हमरा अंदाज नहि छल । हम हुनका धन्यवाद कि देतियैन्ह हम एक टक हुनका देखैत रहि गेलियैन्ह। ओ हमरा दिस देखि कहलाह अहाँ केबिन में जाऊ साँझ में श्री ठाकुर जी केर अहीं वाला खून चढ़तैन्ह।

Wednesday, August 5, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (उन्निसम कड़ी)

ओना तs जमशेदपुर में १९८१ सs श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर केर नाटक आ सांस्कृतिक गतिविधि शुरू भs गेल छलैन्ह मुदा मैथिली केर सेवा आ हुनका अपना संतुष्टि भेंटलैन्ह १९८३ में, जहिया ओ अपन लिखल पहिल मैथिली नाटक केर मंचन केलाह, मुदा ओहियो में किछु त्रुटि हुनका अपना बुझेलैन्ह।


मिथिलाक्षरक स्थापनाक बाद पहिल नाटक छलैक "मिस्टर निलो काका" जाहि केर पहिल मंचन जमशेदपुर में भेलैक आ दोसर मंचन "अन्तराष्ट्रीय नाट्य समारोह" पटना में। "मिस्टर निलो काका" क s मंचन केर बाद प्रतिवर्ष मैथिली भाषा भाषी के एकटा नाटक देबाक आ मंचन करबाक लेल प्रतिबद्ध श्री ठाकुर जी प्रतिवर्ष एकटा नाटक केर रचना करैत रहलाह आ ओकर मंचन होइत रहलैक। एहि बीच बिना कोनो अनुभव के एकटा मैथिली विडियो फ़िल्म सेहो बनौलाह। जमशेदपुर में पहिल फिल्मोत्सव श्री ठाकुर जी केर देन छैन्ह। प्रकाश झा जी केर सँग हुनक सिनेमा में काज केलाक बाद प्रकाश झा फिल्मोत्सव जमशेदपुर में भेल छलैक जाहि केर पूरा व्यवस्था श्री ठाकुर जी अपनहि कएने छलाह। त्रिदिवसीय नाट्य समारोहक केर इच्छा पहिल नाट्य समारोह सs छलैन्ह, ओ जमशेदपुर में भेलैक आ खूब नीक जकां संपन्न भेलैक।


प्रकाश झा जी के सात कड़ी वाला धारावाहिक "विद्रोह" केर शूटिंग से मदनपुर( बेतिया) केर जंगल जंगल आ बम्बई में भेलैक आ ओ शूटिंग के बीच में श्री ठाकुर जी केर मोन किछु ख़राब भs गेल छलैन्ह जाहि चलते ओ धारावाहिक केर शूटिंग जल्दी खतम होइते चलि अयलाह। हमरा से पता नहि कियैक जहिया सs श्री ठाकुर जी शूटिंग के लेल गेलाह मोन बहुत घबराइत छल। फोनक बेसी सुविधा नहि छलैक तथापि हुनका खबरि भेंट गेलैन्ह आ अपन शूटिंग खतम करि कs आपस आबि गेलाह।


बेतिया सs अयलाक बाद पता नहि कियाक आ की भेलैंह, बीच बीच में बुखार लागि जायत छलैन्ह, डॉक्टर सs देखा दबाई होइत छलैन्ह तs फेर दू तीन दिन में ठीक भs जाइत छलाह। एहिना करीब चारि पॉँच मास तक चलैत रहलैक बीच बीच में हम कहियैन्ह नीक सs डॉक्टर के देखा लिय, डॉक्टर सँs देखाबथि तs मुदा पूरा पूरा चेक अप नहि होय। हमरा ओहिना मोन अछि अचानक एक दिन बुखार भेलैंह आ एकहि बेर खूब तेज़ बुखार भs गेलैन्ह। एहि बेर हम सोचि लेने रहियैन्ह जे पूरा नीक सय जांच करवाबय के छैन्ह मुदा ओ अपनहि बजलाह एहि बेर हॉस्पिटल में भरती भs जाइत छी आ नीक सँ पूरा जाँच करवा लैत छी। राति में ततेक बेसी बुखार भs गेलैन्ह जे ओहि समय भरती कराबय परि गेलैन्ह।


भोर में हम हॉस्पिटल गेलहुँ तs डॉक्टर बी.एन.झा राउंड(round) में छलाह पुछला पर कहलाह "बुखार नहि अछि साँझ तक छोरि देबैन्ह आ नहि तs काल्हि घर जा सकैत छथि" हम हुनका भोजन करवेलाक के बाद घर आबि गेलहुँ। सांझ में बच्चा सब के लs कs अयलहुं। पता चलल जे डॉक्टर साहेब केर आदेश छलैन्ह जे बिना सबटा जाँच कएने घर नहिं जाय देताह। हम सब राति में घर आबि गेलहुँ। दोसर दिन किछु एहेन भेलैक जे हम भोर में हॉस्पिटल नहिं जा सकलहुँ । बड़का बेटा पुत्तु आ पंडित जी सँ चाय नाश्ता पठा देलियैन्ह आ हम एकहि बेर दुपहर में हुनकर कपडा लs कs गेलहुँ जे आइ तs घर आपिस आबिये जयताह।


हॉस्पिटल मात्र हुनकर कपडा आ चाय लs कs गेल रही। पहुँचलहुँ तs हिनका उदास देखलियैन्ह, पुछला पर कहलाह जे अइयो डॉक्टर साहब नहि छोरताह। हम सुनतहि डॉक्टर बी. एन. झा लग गेलहुँ, कहलाह जे "हम आब ठाकुर जी के किछु आओर दिन रखबैन्ह हुनका खुनक बहुत कमी छैन्ह "। इ सुनतहि हमरा चिन्ता भेल मुदा करितहुँ की राति में फेर सs खाना लs कs आबय परल आ राति भरि हम सुति नहिं पयलहुँ ।


दोसर दिन श्री ठाकुर जी केर सबटा खून इत्यादि केर जाँच शुरू भेलैक । जाँच केलाक बाद डॉक्टर बी. एन. झा ओहि जांचक सबटा रिपोर्ट देखि खुश नहि छलाह हुनका किछु आशंका छलैन्ह, की से तs नहि कहलाह, कहलाह "bone marraw" करवाबय परतैन्ह।

Friday, July 10, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (अठारहम कड़ी )

१३ जून १९८५ के भारतीय नृत्य कला मन्दिर मे "मिस्टर नीलो काका" कs सफल मंचन के पश्चात् प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता मे मिथिलाक्षर आ "श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर" जी कs नाटक सब बेर पुरस्कार लैत रहलैन्ह आ मैथिली दर्शक आ नाट्य प्रेमी के सब बेर एक टा नव सामाजिक विषय पर नाटकक नीक प्रस्तुति देखय के लेल भेँटैत रहलैन्ह।

१९८६ मे अंतर्राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता के लेल जहिया निमंत्रण आयल छलैक ओहि समय "श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर"जी के लिखल नाटक सब मंचित भs चुकल छलैन्ह मुदा नव नाटक केर नाम ओ सोचि कs रखने रहथि। जहिया निमंत्रण आयल छलैक ओकर बाद कलाकार सब के एकटा बैठक भेलैक आ ओहि मे नाटक जे अन्तराष्ट्रीय समारोह मे जएबाक छलैक ओकर नाम बतायल गेलैक। नाटक केर नाम "लौंगिया मिरचाइ " सुनतहि कलाकार सब बड खुश भेलाह मुदा जखैन्ह इ सुनालाह जे मात्र नाम टा लिखल छैक तs पहिने त किछु कलाकार मायुस भेलाह मुदा सब बेर नाटक मे ओहिना होइत छलैक आ ता धरि कलाकार सब श्री लल्लन जी के प्रतिभा सँ परिचित भs गेल छलाह।

कलाकार सब केर बैठकी के बाद ओहि दिन राति मे बैसि कs पात्र आ "पहिल दृश्य" लिखि देलाह आ हमरा ओ कैयेक बेर सुनय परल। ओकर बाद रबि दिन सs रिहर्सल सेहो शुरू भs गेलैक। एक दृश्यक रिहर्सल कतेक दिन होयतैक। एक दिन साँझ मे देखलियैन्ह रिहर्सल स जल्दि आबि गेलाह आ आबिते कहलाह "आजु हम लिखय के मूड मे छी आ एक दृश्यक रिहर्सल कतेक दिन होयत। अहाँ सब खेलाक बाद सुति रहु आ हमरा लेल चाय बना कs राखि दिय हमरा आजु नाटक पूरा करबाक अछि"। इ सुनतहि हम कहलियैन्ह हम सुति जायब ता अहाँक संवाद सब के सुनत। हम नहि सुतब अहाँ चिंता जुनि करू हम चाय बना बना कs अहाँके दैत रहब। राति मे बच्चा सब खेलाक बाद सुति रहलाह हम चाय बना कs राखि देलियैन्ह आ बैसि कs किछु समय हुनक संवाद सब सुनलियैन्ह मुदा किछु समय बाद नीँद आबय लागल तs सुति रहालौंह। अचानक नीँद खुजल तs देखलियैन्ह लिखिए रहल छलाह ओहि समय ठीक ४:३० होइत छलैक। हुनका लग गेलहुँ तs कहलाह आब खतमे पर छैक एक बेर चाय पिया दिय। हम उठि कs चाय बनेलहुँ आ चाय दुनु गोटे चाय पिलहुँ ५:३० बजे तक "लौंगिया मिरचाइ" नाटक पूरा छलैक। इ नाटक सेहो कैयाक टा पुरस्कार पौलक।

"मिस्टर नीलो काका" के बाद जे नाटक सबस बेसी लोकप्रिय आ चर्चित भेलैक ओ छैक बकलेल। २९-४-बकलेल के अन्तराष्ट्रीय मैथिली नाट्य प्रतियोगिता के लेल कलाकार भवन एहि सिनेमा मेक मंचन भेल। एहि नाटक के सर्वोत्तम नाटक, सर्वोत्तम आलेख , सर्वोत्तम निर्देशक, सर्वोत्तम बालकलाकार, सर्वोत्तम प्रकाश परिकल्पना आ सर्वोत्तम मंच सज्ज्या के पुरस्कार भेटलैक आ नाट्य प्रतियोगिताक निर्णायक मंडलक अध्यक्ष आ फ़िल्म निर्देशक " श्री प्रकाश झा" मंच पर पुरस्कार दैत समय "श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर जी" कs प्रशंसा करैत पता आ फ़ोन नम्बर माँगि लेलाह।

बकलेल नाटक केर किछु मास बाद अचानक एक दिन प्रकाश जी के फ़ोन अयलैन्ह आ फ़ोन पर कहलथिन्ह जे ओ एकटा फिचरेट फिल्म बना रहल छथिन्ह आ ओहि फिल्म में मुख्य भूमिका करबा के छैन्ह, आ जल्दी दू तीन दिन के लेल पटना आबय परतैंह। ऑफिस सs छुट्टी लs पटना गेलाह आ दू तीन दिन के बाद आपस आबि गेलाहआपस अयला के बाद अपन ऑफिस स छुट्टी ल आ दू कलाकार के अयबाक लेल कहि चलि गेलाह। प्रकाश जी हुनका अपन कलाकारक चुनाव में सेहो रहबाक लेल कहने रहथि।

कलाकारक चुनाव सs शूटिंग धरि करीब डेढ़ मास लागि गेलैक। शूटिंग बेतिया लग गाम में भेल छलैक आ किछु बम्बई में।सिनेमाक नाम छलैक " कथा माधोपुर की " ई सिनेमा पंचायती राज पर बनायल गेल छैक। एहि सिनेमाक प्रेमिएर पटना में छलैक आ हम श्री लल्लन जी के संग ओहि के लेल पटना गेल छलहुँ।

Friday, June 26, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(सत्रहम कड़ी)

हमर मात्रिक सहरसा अछि। हमर पितिऔत बहिन जे कि हमर मसिऔत सेहो छथि हुनक विवाह सहरसा मे छलैन्ह हम सब ओहि विवाह मे जमशेदपुर s गेल रही हमर मात्रिक मे सभ कियो एक s एक गायक छथि कोनो विवाह वा यज्ञ होइत छैक s यज्ञ खतम भेला बाद पूरा परिवार दलान पर बैसि जाइत छथि गाना बजाना होइत रहैत छैक ओहियो दिन हम सब बाहर बैसल रही गाना बजाना होइत छलैक ओहि बीच मे एकटा वृद्ध व्यक्ति अयलाह मामा सब हमरा सब के बजा हुनका s परिचय करेलैन्ह कहलथि छथि "लिलो काका" हम नाम बड सुनने रहियैन्ह मुदा भेंट हुनका s पहिल बेर s रहल छल पॉँच दस मिनट हुनका s हम सब गप्प कयलहुँ ताहि के बाद चलि गेलाह ओतबहि काल मे दू टा गप्प हुनक विषय मे हम सब बुझलहुँ पहिल जे हुनका सांप बड डर लागैत छलैन्ह दोसर हुनका कियो बुढ कहैन्ह से पसीन नहि छलैन्ह हुनका गेलाक बाद तुंरत हमरा कहलाह हमर दोसर नाटकक नाम भेंट गेल "लिलो काका"

"बड़का साहेब" नाटक मे महिला शाखा केर हस्तक्षेप नाटक केर पूर्वाभ्यास के बीच मे जे नाटक सब होइत छलैक ताहि सs तंग आबि सोचि लेने छलथि जे आब दोसर संस्था के लेल नाटक नहि करब "मिथिला सांस्कृतिक" परिषद नाटक के पाछू पाई खर्च करय लेल सेहो तैयार नहि रहैक सब सोचि अपन अभिन्न मित्र बालमुकुन्द जी , श्री बैद्यनाथ जी श्री पूर्णानंद जी के सँग लs हुनका सबहक सहयोग एकटा नाट्य संस्था के स्थापना कयलैन्ह जाहि केर नाम राखल गेलैक "मिथिलाक्षर" (नाट्य एवं संगीत संस्था) मिथिलाक्षर के bye laws मे देल गेलैक जे व्यक्ति एहि संस्थाक सदस्य s सकैत अछि जे कोनो तरहक कलाकार हो कला से प्रेम राखैत हो मुदा सदस्यताक लेल कोनो शुल्क नहि छलैक

हिनकर आदति छलैन्ह जे कैयेक टा नाटकक नाम लैत रहैत छलाह मिथिलाक्षरक स्थापनाक बाद तय भेलैक जे शीघ्र एकटा नाटक कायल जाय कलाकार सब केर एकटा बैठक बजायल गेलय ओहि मे तय भेलैक जे नाटक होयत दू दिन नाटक होयत एकटा हिन्दी एकटा मैथिली मे कलाकार सब के नाटक केर नाम से बता देल गेलय मैथिली मे "लिलो काका" जखैन्ह हिन्दी केर नाटक के नाम कलाकार सब पुछलथिन s कहि देलथिन"डम डम डिगा डिगा "। मैथिली नाटकक नाम s हमरा बुझल छल हिन्दी वाला सुनि हमरो आश्चर्य भेल ओ नाम हुनका तत्काल ध्यान मे अयलैन्ह आ कहि देने रहथि।

"लिलो काका" नाटक जाहि समय लिखैत छलाह ओहि बीच में एक दिन हमरा ओकर संवाद सुनाबैत कहलाह लिलो काका के अंत में हम मारि देबैन्ह से इ नाटक केर नाम हम सोचि रहल छि लिलो काका सs "मिस्टर नीलो काका " कs दिये आ ओहि दिन सँ लिलो काका सँ नाटकक नाम "मिस्टर नीलो काका "भs गेलय।

"मिस्टर नीलो काका" आ "डम डम डिगा डिगा" केर पूर्वाभ्यास (रिहल्सल) जाहि समय होइत छलैक ओहि समय हम सपरिवार सब दिन रिहल्सल में जाई। अपने नीलो काका केर मुख्य भूमिका क रहल छलाह विक्की से ओहि में बालकलाकार के भूमिका में छलाह पुत्तु हिन्दी वाला नाटक के बालकलाकार छलाह आ बचलहुँ हम तs हमर काज पहिल छल जे सब दिन रति में घर आबि ओहि दिनका पूर्वभ्यासक समीक्षा केनाई दोसर कहि देने छलाह जे मंच पर बेसी भीर नहीं लगेबाके अछि ताहि हेतु ओ हमरे सम्हारे के छल। हम सब, सब दिन साँझ ६बजे रिहल्सल लेल जाई आ राति ९ बजे सँ पहिने कहियो नहिं लौटी।लौटलाक बाद बालमुकुन्द चौधरी आ इ बैसैथ आ ओहि समय व्यवस्था केर काज आ विचार विमर्श सब होय। कहि सकैत छि जे जूता सिलाई से लs कs चंडी पाठ तक स्वयं हिनके सम्भारय के छलैन्ह। बालमुकुन्द जी तs संग रहबे करैत छलाह।

नाटक सs पहिनहि सबटा टिकट बिका गेल छलैक दुनु नाटकक सफल मंचन भेलैक आ मैथिली के संग संग हिन्दी प्रेमी सब के सेहो नाटक में एकटा नवीनता भेटलैक। रातों राति जमशेदपुरक मंच आ जमशेदपुर केर नाट्य प्रेमी के बीच श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर केर नाम आबि गेलैन्ह

"मिस्टर नीलो काका" आ "डम डम डिगा डिगा" केर सफल मंचनक किछु महिना बाद पटनाक मैथिली संस्था "अरिपन "एकटा अन्तराष्ट्रीय नाट्य समारोहक निमंत्रण पठेने रहैक जाहि के इ स्वीकार क लेलाह। कलाकार सब स पूछल गेलय तs सब तैयार छलाह। समय बहुत कम छलैक मुदा नाटक केर सफल मंचन आ कलाकार सब के उत्साह हिनका और उत्साहित क देलकैन्ह। रिहल्सल ठीक ठाक चलैत छलैक अचानक एक दिन एकटा कलाकार जिनकर नाम लक्ष्मीकांत छलैन्ह आ जे सनिचराक भूमिका मे छलाह अयलाह आ कहलाह हुनक गाम गेनाइ बड़ आवश्यक छैन्ह मुदा ओ चारि पॉँच दिन में आबि जयताह। हिनकर मोन तs नहि मानलैंह मुदा फेर सोचलाह कैल नाटक छैक आ ओ आश्वासन देने छथि तs आबिये जयताह। रिहल्सल चलैत छलैक ओहि बीच एक दिन सांझ मे हम सब रिहल्सल लेल पहुँचलहुँ तs एक महिला कलाकार जे काकी के भूमिका में छलिह हुनकर समाद अयलैन्ह जे ओ पटना नहि जा सकैत छथि हुनका कोनो आवश्यक काज स शहर स बाहर जाय परि रहल छैन्ह। इ सुनतहि इ चिंतित भ गेलाह ओहि दिन रहल्सल की हेतैक सब कियो विकल्प के विषय मे सोचय लागि गेलहुँ। कलाकार सब के कहि देल गेलय घर जेबाक लेल, आ इ जे काल्हि धरि किछु ने किछु हेबे विकल्प भा जेतैक कलाकार सब के गेलाक बाद हम चारू गोटे आ बालमुकुन्द जी बाचि गेलहुँ मुदा हमरा सब के किछु नहि फुरैत छल। इ दुनु गोटे हमरा सs सेहो विकल्प केर विषय मे पुछलाह मुदा हमहु निरुतर रही, की कहितियैन्ह। आब त इज्जत के सवाल भs गेल छलैक।

बालमुकुन्द जी आ इ किछु समय के लेल बाहर गेलाह आ भीतर आबि हमरा कहलाह, "आब इ अहींके करय पडत"। इ सुनतहि हमरा हँसी लागि गेल, इहो हँसय लगलाह। किछु समय बाद इ गंभीर भs कहलाह "आब हम मजाक नहि क रहल छी"। आब इ हमर सबहक इज्जत केर सवाल छैक आ हमरा सब के दोसर स्त्री पात्र एतेक कम समय मे भेन्टनाइ बहुत कठिन अछि दोसर हमरा अहाँ पर विश्वास अछि अहाँ इ भूमिका निक सs कs सकैत छि।" हम निरुत्तर भ गेलहुं कहितियैन्ह की, इज्जत के सवाल छलैक। तय भेलय जे काल्हि सs हम काकी के भूमिका मे रहब आ रिहल्सल करब।

दोसर दिन हम सपरिवार रिहल्सल के लेल पहुँचि गेलहुँ आन दिन तs हम तरह तरह के टिप्पणी दैत छलहुँ मुदा ओहि दिन एकटा कलाकार के रूप मे पहुँचल रही। कलाकार सब के कहि देल गेलैंह जे आय स काकी के भूमिका मे हम रहब। हमर सब संवाद हिनके संग छलैन्ह अर्थात काकी के सब टा संवाद काका के संग छलैन्ह जे हमरा लेल बड़ कठिन छल। एक तs एतेक नीक कलाकार आ ताहू मे पति संग अभिनय केनाई । खैर रिहल्सल शुरू भेलय जखैन्ह हमर संवादक समय आयल तs हम उठि कs स्टेज दिस गेलहुँ मुदा जहिना हमर संवादक समय आयल आ हम जहिना हिनका दिस देखलियैन्ह हमरा हँसी छुटि गेल हमरा सँग चौधरी जी सेहो हँसि देलाह। ओकर बाद हम कैयेक बेर प्रयास केलहुँ मुदा जहिना हिनका दिस नजरि जाय कि हमरा हँसि छुटि जाय आ संग मे चौधरी जी सेहो हँसि दैथि। अंत मे चौधरी जी के बाहर जाय लेल कहल गेलैंह मुदा कथि लेल हमर हँसि रुकत। ओहि दिन आन सब कलाकार अपन अपन पाठ कs घर जाय गेलाह । इ सब कलाकार के आश्वासन देलथिन जे घबरेवा के नहि छय काकी वाला भूमिका निक होयबे करत।

दोसर दिन हम सोचि क आयल रही जे हम हँसब नहि आ नीक सs रिहल्सल करब मुदा जहिना हमर बेर आबै हँसि हम नहि रोकि पाबी। इ अंतिम दिन रिहल्सल तक चललय मुदा घर मे कखनहु कखनहु इ हमरा किछु किछु बताबैत रहैत छलाह। हमरा अपनहि बड़ चिंता होय जे की होयत मुदा इनका हमरा पर पूर्ण भरोस छलैन्ह आ सब के कहैथ "चिंता जुनि करय जाय जाऊ इ स्टेज पर एके बेर कs लेतिह हमरा पूर्ण विश्वास अछि"। हम त हिनकर विश्वास देखि कs दंग रही मुदा अपना हमरा डर लागैत छल।

लक्ष्मीकांत नहि अयलाह आ समाद पठौलैन्ह जे ओ सीधे पटना पहुँचि जयताह। हम सब पटना के लेल बिदा भेलहुँ रास्ता मे इ हमर बड़का बेटा भास्कर के किछु किछु बुझाबैत जाइत छलाह पटना पहुँचलहुँ ओहिओ ठाम लक्ष्मीकांत नहि पहुँचलाह। हम सब जाहि दिन पहुँचल रही ताहि दिन साँझ मे हमर सबहक स्टेज रिहल्सल छल। भोर स इ भास्कर के सनिचराक पाठ याद करय लेल कहने रहथि संग संग अपनहु रहैत छलाह। होटल मे दू बेर रिहल्सल भेलैक आ साँझ मे स्टेज रिहल्सल। दोसर दिन श्री ठाकुर सपरिवार कलाकार सब सँग नाटक लेल तैयार रहथि। नाटक पटना आ पूरा मिथिला मे धूम मचा देलक।

मिस्टर नीलो काका के कैयेक टा पुरस्कार भेन्टलय, श्री ठाकुर के श्रेष्ठ कलाकार , श्रेष्ठ आलेख तथा श्रेष्ठ महिला कलाकार के लेल हमरा हमर छोट बालक के श्रेष्ठ बालकलाकार के लेल सेहो पुरष्कृत कायल गेलैन्ह।


Thursday, June 25, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(सोलहम कड़ी)

छोटका बेटा जन्मक बाद टिस्को से संबध s गेलाह बड़का बेटा भास्कर(पुत्तु )ओहि समय मे सवा दू बरखक छलाह छोटका बेटा मयुर (विक्की) मात्र तीन मासक हिनका अयलाक किछुए मास बाद बाबुजी केर बदली राँची s गेलैन्ह माँ सब जमशेदपुर सँ चलि गेलिह ओहि समय मे टिस्को के घर भेटय मे किछु दिक्कत छलैक वरिष्टता के आधार पर घर भेटैत छलैक हम सब एकटा छोट छीन घर s s रहय लगलहुँ

कलाकार मन बेसी दिन चुप नहि बैस सकैत छैक ताहू मे लल्लन जी सन कलाकार अपन व्यस्तताक बावजूद टिस्को के नौकरी मे अयलाक किछुए समय बाद सँ अपन नाट्य सांस्कृतिक गतिविधि मे सक्रिय s गेलाह ओहि समय मे टिस्को केर पदाधिकारी कर्मचारी सब के द्वारा कर्मचारी सब के लेल सुरक्षा नाटकक आयोजन कएल जाइत छलैक ओहि नाटक सब पर खर्च सेहो बहुत कम कयल जाइत छलैक नाटक सब एक दम नीरस संदेश मात्र के लेल रहैत छलैक दर्शक सेहो मात्र अपन विभागक किछु आन विभागक लोक जे सब नाटक मे भाग लेत छलाह रहैत छलैक कार्य भार स्म्भरलाक किछुए मास बाद अपन विभागक सुरक्षा नाटक मे भाग s ओकर संवाद मे फेर बदल s ओहि मे सर्वश्रेष्ट अभिनेताक पुरस्कार प्राप्त केलाह दोसर बरख जओं हुनका नाटक लेल कहल गेलैन्ह s साफ कहि देलथिन जे नाटक रविन्द्र भवन जे कि जमशेदपुर के सबस नीक प्रेक्षागृह छलैक ओहि मे करताह ओहि बरख नाटक रविन्द्र भवन मे भेलैक दर्शक के ओहि नीरस विषय पर कयल गेल सुरक्षा नाटक खूब पसिन भेलैक श्री ठाकुरक जमशेद्पुरक नाट्य यात्रा एहि ठाम सँ प्रारम्भ s गेलैन्ह

सब दिन मैथिली केर सेवा करय लेल प्रतिबद्ध श्री ठाकुर जी के मोन मे सदिखन रहैत छलैन्ह जे किछु करि वा नहि मैथिली भाषा साहित्य के अपन कलम सँ किछु s सहयोग करिए सकैत छलैथ जमशेद्पुरक मैथिली संस्था "मिथला सांस्कृतिक परिषद" केर सदस्यता s अयलाक किछुएक समय पश्चात सोचि लेलाह कि मैथिली केर सेवा करताह सन १९८१ मे एकटा आन्दोलन शुरू भेल छलैक गाम गाम सब शहर सँ सेहो प्रधानमंत्री के नाम पोस्ट कार्ड पर मैथिली भाषा केर अष्ठम सूची मे स्थान देबाक लेल आग्रह कयल गेल छलैन्ह जमशेदपुर मे एकटा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन से करबाक विचार भेलैक जाहि केर भार श्री ठाकुर जी के देल गेलैन्ह श्री ठाकुर जी तय केलाह कि एकटा सगीत संध्या कयल जाय ओहि कार्यक्रमक नाम देल गेलैक संकल्प दिवस ओहि कार्यक्रम के लेल सबटा गीत मैथिली मे अपनहि लिखि ओकर धुन s तैयारी कराब मे लागि गेलाह मैथिली मे हुनक पहिल कार्यक्रम छलैन्ह कार्यक्रम मे मुख्य गायक सेहो अपनहि छलथि कार्यक्रमक उदघाटन गीत नाम से "संकल्प गीत"परलैक

"संकल्प गीत"

संकल्प लिय संकल्प लिय
संकल्प लिय यो
बाजब मैथिली मिथिलाक लेल जियब यो ....
संकल्प लिय..............२।

शांतिमय प्रयास हमर ई
सुनी लिय देशक नेता.....३
सूची अष्टम मे स्थान दियो
आरो ने किछु कहब यो ....
संकल्प लिय.......२

लाखक लाख पत्र जाइत अछि
आँखि खोइल क देखू .....३
aआबि गेल समय इन्द्रा जी
मिथिलाक मान राखू ......३
संघर्ष बढ़त जं बात ने मानबै
आरो ने हम साहब यै
संकल्प लिय ...........३।

-लल्लन प्रसाद ठाकुर -

अहि कार्यक्रमक खूब प्रशंसा भेलैक आ श्री ठाकुर जी के एहि कार्यक्रम कय जे प्रसन्नता भेलैन्ह ताहि केर परिणाम स्वरुप ओ एकटा नाटक करबाक ठानि लेलैन्ह। जमशेदपुरक मिथिला सांस्कृतिक परिषद केर महिला शाखाक स्थापना भेलैक आ ओकर सदस्या लोकनि अपन एकटा मुख्य कार्यक्रम करबाक लेल श्री ठाकुर जी के आग्रह केलथि। ठाकुर जी हुनक सबहक आग्रह मानि लेलाह आ तय भेलय जे नाटक होयतैक।ठाकुर जी के पहिल नाटक" बड़का साहेब" ओकरे देन छैक। ओहि नाटक केर लिखैत हम देखने छियैन्ह बुझाइए मे नहि आयल जे नाटक लिखनाइ एको रति कठिन छैक। ततेक सामान्य आ सरल भाव सँ लिखैत छलाह एक एक टा संवाद के हमरा पहिनहि कैयेक बेर सुनबैत छलाह। हमरा तs नाटकक पूर्वाभ्यास सँ पहिनहि सबटा संवाद याद भ गेल छल।

एक बेर जे ठानि लैत छलाह ओकरा पूरा करबा मे अपन जी जान लगा दैत छलाह। बड़का साहेब केर पूर्वाभ्यास महिला शाखा केर एक गोट सदस्य के ओहि ठाम होइत छलैन्ह। हम सब तs सपरिवार सब दिन उपस्थित रहैत छलहुँ। एक तs अपने मुख्य भूमिका मे छलाह दोसर विक्की से ओहि नाटक केर बालकलाकार छलाह तेसर बहुत रास काज नाटक संबंधी होइत छलैक जे हमरा भार देने छलाह आ चाहैत छलाह जे हम सब दिन नाटकक अभ्यास देखि जाहि सँ हम बहुत किछु देखि कs बुझि लियय।

बड़का साहेब केर पूर्वाभ्यास मे सब दिन महिला शाखाक सदस्य द्वारा कैयेक टा नाटक होयत रहैत छलैक। हुनका सब के ई विश्वास नहि छलैन्ह जे नाटक नीक होयतैक। किछु सदस्य बुझैत छलिह जे ओ नाटक केर विषय मे अधिक बुझैत छथि, मुदा प्रत्येक नाटक मे निर्देश केर अपन कल्पना आ सोच होयत छैक। सब दिन इ हुनका लोकनि के समझाबथि जे अहाँ सब निश्चिंत रहू नाटक नीक होयबे करत मुदा हुनका सब के भरोस नहीं होयेंह। इ सब दिन घर आबि क कहैथ इ पहिल आ अंतिम अछि आब हम दोसरा के लेल नाटक नहीं करब ख़ास क मौगी सब लेल तs नहिएँ टा। सब दिन हम आ बालमुकुन्द जी हिनका बुझाबियैन्ह। एक तs एकहू टा नीक कलाकार नहि रहथि दोसर हर काज मे व्यवस्थापक सबहक हस्तक्षेप। हिनका नीक नहि लागैन्ह मुदा जखैन्ह कार्यक भार लs लेने रहथि त पूरा करबाक छलैन्ह।

एक त सब दिन नाटकक पूर्वाभ्यास में किछु नहि किछु होइत रहैत छलैक ताहि पर नाटक मंचनक तारीख स तीन चारी दिन पहिने इंदिरा गाँधी के हत्या भ गेलैक आ प्रशासन दिस स सबटा कार्यक्रम रद्द करबाक आदेश आबि गेलैक। दोसर तिथि तय करबा में समय नहीं लगलैक अखबार में से निकलबा देल गेलैक मुदा हुनक मोन नहि मानलैंह आ जाहि तारीख के नाटक मंचन होयबाक छलैक ताहि दिन अपनहि बालमुकुन्द जी आ किछु कलाकार लोकनि के लs रविन्द्र भवन केर गेट लग ठाढ़ भ गेलाह इ सोचि जे लोक के असुविधा नही होय।

२० नवम्बर १९८३ के पहिल बेर जमशेदपुर में मैथिली नाटक "बड़का साहेब" केर मंचन भेलैक आ ओहि नाटक केर सफल मंचन सs जमशेदपुरक मैथिली भाषा भाषी अचम्भित रहि गेलाह। पहिल बेर कोनो मैथिली नाटक टिकट पर भेल छलैक। "बड़का साहेब " नाटकक अनुभव हुनका दोसर नाटक लिखय लेल आ ओकर मंचन करय लेल बाध्य कs देलकैन्ह।

Saturday, June 13, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (पन्द्रहम कड़ी )

माँ लाल मामाक सँग बाबुजी के लs कs अलिगढ चलि गेलिह, छोटू के तs सँग लs गेलिह मुदा बाकि तीनू बहिन के हमरा पर छोड़ि कs गेल रहथि। हम सब बड़का काका काकी सँग मोतिहारी सँ गाम आबि गेलहुँ। दादी मौसी मधु निक्की पप्पू आ सोनू सेहो संगे आबि गेलाह। गाम पहुँचलहुँ, ई समाचार सुनि बाबा बड दुखी छलाह। एकटा बेटा के गेलाक दुःख तs रहबे करैन्ह दोसर बेटा के दुघॅटनाक समाचार हुनका आओर तोड़ि देलकैन्ह। इम्हर सब बच्चा सब डरल सहमल रहथि। मधु सब तs मौसी लग रहैत रहथि दादी से, अपन दोसर दोसर काज मे रहैत छलिह मुदा हमर तीनू बहिन हमरा एको मिनट लेल नहि छोरथि। हमरा अपने किछु नहि फुरैत छल की करी। डरल तs हमहू रही मुदा हुनका सब केर सोंझा मे साहस केने रही। बौआ सेहो गाम पर छलथि हुनकर परीक्षा भs गेल रहैन्ह।

दोसर दिन भरि दिन लोकक एनाई गेनाई लागल रहलै आ भरि दिन कन्ना रोहटि सेहो होयत रहैत छलैक। जतेक कन्ना रोहटि होय ततेक बच्चा सब और डरि जैत छलथि। साँझ होयत देरी सब हमरा पकरि कs बैसि जाय गेलिह। अचानक हम जाहि कोठरी मे रही ताहि मे बड़की काकी अयलीह आ बच्चा सब के पकड़ि क किछु जलखई करेबाक लेल लs गेलिह। हम चुप चाप घर मे बैसि कs असग़र कानैत छलहुँ आ भगवान सँ कहैत छलहुँ हे भगवान माँ नहि छैथ बाबुजी के की होयतैन्ह नहि जानि एखैंह कम सँ कम हिनका पठा दियौन हम असग़र कोना तीनू के सम्भारब। मौसी आ मधु सब सँग तs सब गोटे के सहानुभूति छलैन्ह मुदा इ तीनू बहिन के देखय लेल हमही टा छलियैन्ह। ई सोचिये रहल छलहुँ कि देखलियैक एकटा जन बैग लेने आयल आ राखि कs चलि गेल। देखला सँ हिनके बैग जेहेन छलैक मुदा जा धरि हम किछु पुछतिए ओ चलि गेल। हमरा मोन मे पचास तरहक बात आबि रहल छल कि देखलियैन्ह इ घर मे घुसि रहल छथि। इ सीधे हमरा लग अयलाह आ जहिना पुछलाह अहाँ कोना छी कि हमरा नहि रहि भेल आ हम हिनका पकरि कs खूब कानय लगलहुँ। इहो पाछु कथि लेल रहताह आ दुनु गोटे एक दुसरा के पकरि कs कानैत छलहुँ। हमरा सब केर मुँह सँ एको शब्द कथि लेल निकलत।

अचानक हमरा बुझायल जे तीनू बहिन आबि रहल छथि। हम अपना के सम्हारैत हिनका सँ पुछलियैन्ह अहाँके कोना बुझल भेल। कहलाह हम तs मोतिहारी आयल छलहुँ अपन कॉलेजक काज सँ ओझाजी ओहिठाम गेलहुँ तs पता चलल। हम पहिने हॉस्पिटल गेल रहि बाबुजी आ मामा के देखि हमर मोन ख़राब भs गेल। ओहि ठाम सँ भागल एहि ठाम आयल छी। हम सब गप्प करिते छलहुँ कि तीनू बहिन आबि गेलिह आ आबिते सोनी हिनका पकरि कs कानय लगलीह। बिन्नी अन्नू से लग मे आबि गेलिह। ओ दृश्य हम नहि बिसरी सकैत छी। बौआ तs लड़का छलाह आ बाबा सँ हुनका बड लगाव छलैन्ह मुदा हमरा सब के मोन मे असुरक्षा के भावना छल ओ हिनका देखि खतम भेल।

काका केर काज खतम भेलाक बाद सब चलि गेलाह हम चारु भाई बहिन, बाबा दादी आ मौसी अपन चारु बच्चा सब सँग रहि गेलिह। इहो चलि गेलाह, हमरा एको रत्ती गाम पर मोन नहि लागैत छल, मुदा मजबूरी मे रहय परल। अचानक एक दिन तार आयल जे नानी सेहो नहि रहलिह। काका के देहान्तक खबरी सुनि ओ खाना पीना छोरि देने रहथि आ हुनक देहांत भs गेलैन्ह। तार अयलाक एक दू दिन बाद मामा अयलाह ओ अपना सँग मौसी आ हुनक चारु बच्चा सब के सेहो लs कs चलि गेलाह मुदा ओ एक बेर हमरा सब के कहबो नहि केलाह जे अहुँ सब चलु। हम ओ दिन नहि बिसरी सकैत छी मौसी सब केर गेलाक बाद मात्र हम पाँच भाई बहिन आ बाबा दादी रहि गेलहुँ एक तs हम सब कहियो गाम असग़र नहि रहल रही ताहु परओहेन परिस्थिति मे। राति राति भर हम डर सँ नहि सूती। सोनी तs राति मे हमारा पकडि कs सुतथि आ ताहू पर कैयक बेर डर सँ चिल्ला उठैथ।

एक तs हम अपनहि डरपोक ताहि पर सब भाई बहिन के जिम्मेदारी हमरा पर रहैक। दादी बाबा तs बुढ छलथि। माँ बाबुजी के कोनो समाचार से बुझय मे नहि आबि रहल छल। हम राति राति भर सूती नहि आ सोचैत रहैत छलहुँ।

नहि जानी कियैक करीब पन्द्रह दिन भs गेलैक माँ बाबूजी के कोनो समाचार नहि भेटल छल इ सोचि सोचि हमरा बड चिन्ता होयत छल। राति के निन्द तs नहिये होय उलटे चारि पाँच दिन सँ हमर छाती मे जोर सँ दर्द होमय लागल । पहिने तs दादी के हम नहि कहलियैन्ह मुदा बाद मे कहय परल। दादी के से चिन्ता होमय लागलैंह, ओ अपना भरि किछु किछु सँ मालिश करथि मुदा ठीक नहि भेल। अंत मे दादी कहलथि ठाकुर जी के चट्ठी लिखि दहुन आबि जयताह। मुदा ओ अपनहि हमरा सब केर देखय लेल पहुँचि गेलाह आ दादी के कहला पर हमरा लs क पटना डॉक्टर सँ देखाबय लेल लs गेलाह। पटना मे हमर मौसी रहैत छलिह हुनके ओहि ठाम रही इलाज करेबाक विचार भेलैक। सब गोटे के जेबा मे तs झंझट छलैक मुदा हम अन्नू के नहि छोरलियैन्ह आ हुनका अपना सँग लेने गेलियैन्ह। सोनी बिन्नी के दादी राखि लेलथिन्ह आ कहलथि कोनो चिन्ता नहि करय के लेल।

हम सब साँझ मे पटना पहुँचलहुँ आ मौसी के डेरा गेलहुँ, ओहि ठाम बाबुजी पहिनहि सँ रहथि।ओ सब भोर मे पहुँचल रहथि। माँ सँ पता चलल जे बाबुजी के कोहुना एकटा आँखि बाचि गेलैन्ह दोसर नहि बचायल जा सकलैन्ह। दोसर दिन हम सब जमशेदपुर आबि गेलहुँ ।

Monday, June 8, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (चौदहम कड़ी )

घर मे ततेक लोक जमा भs गेल छथि जे दिक्कत तs होयते छैक हॉस्पिटल सेहो सब कियो एक सँग नही जा सकैत छी।मोन रहितो सभ दिन गेनाई सम्भव नही भs रहल छैक। बाबुजी आ मौसी के बेसी समय हॉस्पिटल मे बीति रहल छैन्ह। हिनका गेलाक बाद सँ हम काका के देखय के लेल नहि गेल छी। आय सोचि लेने रही किछु भs जाय हम हॉस्पिटल जेबे करब। बाबुजी के कहि हम हुनके सँग हॉस्पिटल पहुँचलहुँ मुदा काका के देखि मोन बड दुखी भs गेल। दिन दिन ओ कमजोर भेल जा रहल छथि आ हुनकर पेट फूलल जा रहल छैन्ह। बाबुजी डॉक्टर सँ भेंट करय के लेल चलि गेलाह, काका लग हम आ मौसी छलहुँ। जहिना बाबुजी गेलाह काका इशारा सँ हमरा अपना दिस बजेलाह। हम हुनके विषय मे सोचि रहल छलहुँ तुंरत लग मे गेलियैन्ह। ओ हाथ देखा हमरा अपना बगल मे बैसय के लेल कहलाह आ हम जहिना बैसलहुँ तुंरत हँसय के प्रयास करैत कहलाह " तोरा बुझल छौक आय काल्हि तोहर मौसी भइया सँ गप्प करय लगलिह"। हम किछु नहि बजलियैन्ह मुदा भीतर सँ हमरा ततेक तकलीफ भेल जे कहु एहेनो लोक होयत छैक जे अपन जीवनक अंत समय छैन्ह आ ओ हमरा आ मौसी दुनु गोटे के चेहरा देखि हँसेबाक प्रयास कs रहल छथि। असल मे बियाहक बाद दादी हमर मौसी के इ कहि गप्प नहि करय देलथिन्ह जे लोक भैंसुर सँ गप्प नहि करैत छैक। अपन विवाह सँ पहिने मौसी बाबुजी सँ गप्प तs करिते रहथि सारि जे छलथि बाबुजी के। आब एहेन परिस्थिति छलैक जे मौसी के बाबुजी सँ गप्प करला बिना गुजर चलय वाला नहि छलैन्ह।

भोरे सँ कियो मन्दिर गेल छलथि कियो मौनी बाबा लग तs कियो तांत्रिक लग घर मे हम आ माँ छी। हमर सबहक एक गोटे परिचित रोटी दs गेलथि आ पता चलल जे ओ रोटी पानि मे रहैत छैक आ ओकर पानि देला सँ केहेनो बिमारी कियाक नहि होय ठीक भs जाइत रहैक। एकटा कहबी छैक "डूबते को तिनके का सहारा" एकदम इ एहि ठाम लागू होयत छैक। माँ ओ हुनका सँ लs कs भगवान लग राखि देलथि।

तीन चारि दिन सँ सब गोटे परेशान आ चिंतित छलथि मौसी लग किछु कहबाक लेल सब के मना छैन्ह तथापि बुझाइत छैक मौसी के सब किछु बुझल छैन्ह। राति राति भरि ओ नहि सुतय छथिन्ह आ नहि ठीक सँ भोजन करैत छथि। साँझ मे छोटू आ हमरा चारु बहिन के छोरि बाकी सभ गोटे हॉस्पिटल चलि गेलाह। हमरा साहस नहि भेल जे कहितियैन्ह जे हमरो लs चलु। करीब नौ बजे राति मे छोटका मामा के छोरि सब आबि गेलथि मुदा हाव भाव बता रहल छलैन्ह जे काका केर स्थिति ठीक नहि छैन्ह। हमरा पुछय के हिम्मत नहि भs रहल छल जे हम किनको सँ पुछबैन्ह मुदा भरि राति नींद नहि भेल।

भोर मे उठलहुँ त बाबुजी ओहि सँ पहिनहि हॉस्पिटल जा चुकल रहथि। दादी, मौसी, पीसी, सभ गोटे मन्दिर मोनी बाबा लग गेल छलिह। अचानक देखलियैन्ह छोटका मामा परेशान जल्दी जल्दी आबि रहल छलाह आ आबिते पुछलाह "माँ सब कतs छथुन्ह "। हम कहितियैन्ह ताबैत माँ बाहर निकलि अयलीह आ माँ के देखैत तुंरत मौसी आ दादी के विषय मे पुछलाह। माँ जहिना कहलथि जे ओ मन्दिर गेल छथिन, इ सुनतहि मात्र एतबहि कहलाह "आब ओकर कोनो काज नहि छैक हम हुनका सब के लेने आबैत छियैन्ह"आ तुंरत घर सँ चलि गेलाह। माँ तs तुंरत कानय लगलिह मुदा हमरा किछु नहि फुरा रहल छल जे की करी। एतबा तs बुझिये गेलहुँ जे काका नहि रहलाह।

काका के दाह संस्कार जमशेदपुर मे भेलाक बाद सब के विचार भेलैंह जे काज गाम पर कयल जाय मुदा भारत बंद रहलाक चलते हम सब साँझ मे गाड़ी सँ निकलि गेलहुँ इ सोचि जे भोर तक गाम पहुँची जायब। बाबा के किछु नहि बुझल छलैन्ह।

सिमरिया मे अस्थि प्रवाह कs हम सब गाम के लेल प्रस्थान कs गेलहुँ।

एक तs सब दुखी ताहु मे बैसय के से दिक्कत छलैक मुदा जेना तेना हम सब इ सोचैत जा रहल छलहुँ जे आब तs गाम लग आबि गेल। सब के झपकी तs आबिये रहल छलैक। बाबुजी आ छोटका मामा आगू बैसल छलाह। अचानक हमर आँखि खुजल तs देखैत छी बाबुजी पूरा खून सँ लथ पथ छथि आ सीट पकरि पाछू एबाक कोशिश कs रहल छथि। ताबैत नजरि गेल एक बोझा कुसियार(गन्ना ) पूरा के पूरा अगुलका शीशा तोरि भीतर घुसल छलैक। हमरा किछु नहि बुझायल तs हम बाबुजी के पकरि कs अपना दिस खिँचय लगलहुँ । ताबैत छोटका मामा अयलाह ओ अपनहि खून सँ लथ पथ छलाह आ बाबुजी के कोहुना कs बाहर निकललाह हम सब सब गोटे गाड़ी सँ बाहर भेलहुँ । बाहर पहुँचि जे देखय मे आयल से वर्णन करय वाला नहि छैक। कुसियार सँ लदल बैल गाड़ी हमर सबहक गाड़ी के मारि देने छलैक। सोनू के माथ मे चोट छलैन्ह आ मामा के हाथ नाक दुनु ठाम सँ खून नजरि आयल। बाबुजी के सड़क कात मे एकटा गाछ तर सुतायल गेलैन्ह। गाड़ी केर ड्राईवर भागि गेल छलैक।

बुझाइत छलैक पूरा के पूरा गाम उठि के आबि गेल छलैक। पुछला पर पता चलल चकिया गाम लग मे छैक। विपत्ति पर विपत्ति हमरा सब पर परल छल मुदा गाम वाला सब मे सँ कथि लेल एको गोटे मदद करताह उलटा ओ सब सामन लs कs भगबाक प्रयास करय छलाह। ओ तs मामा छलाह जे ओहनो स्थिति मे बाबुजी आ हमरा सब के सँग सामान पर सेहो ध्यान देने छलाह। गामक एक आदमी मात्र एतबा मदद केलैथ जे ओ हमरा सब के कहलथि जे आब ट्रेनक के समय भs गेल छैक आ पॉँच मिनट मे अहि ठाम पहुँचत जओं ट्रेन रुकि जाय तs अहाँ सब ओहि सँ मोतिहारी जा सकैत छी। जतय हम सब छलहुँ ओहि केर बगल मे ट्रेनक लाइन छलैक माँ जहिना इ सुनलथि तुंरत बाबुजी के छोरि सीधे लाइन तरफ़ दौडि के पहुँचि गेलिह आ हुनका देखि मौसी सेहो। मामा मना करैत रहि गेलाह कथि लेल सुनतिह। हम बाबुजी के पकरि कs बैसल रहि। मामा की करितथि हुनको पाछू सँ जाय परलैन्ह।जखैन्ह ट्रेन नजरि आबय लागलय तs देखलियैन्ह मामा दौडी कs अयलाह। मामा के आबितहि हम माँ सब लग चलि गेलहुँ। कतबो कहिये लाइन पर सँ हटि जो माँ कथि लेल हटतिह। जओं जओं ट्रेन लग आबय हमर डर बढैत जाय। गाँव वाला सब कात मे ठाढ़ भs तमाशा देखि रहल छल। एक तs भारत बंद ताहु पर हम सब लाइन पर ठाढ़ भs गाड़ी रोकय छलहुँ। गाड़ी किछु दूर पर ठाढ़ भs गेलय आ ओहि के बाद धीरे धीरे हमरा सब दिस बढ़य लागल। ट्रेन एकदम धीरे धीरे चलय छल। सब गेट पर सिपाही सब ओहिना नजरि आबैत छल। माँ जहिना देखलथि जे गाड़ी आब लग आबि गेल छैक कि जोर जोर सँ चिल्लाबय लागलिह "गाड़ी रोको, मदद करो पूरे परिवार का एक्सिडेन्ट हुआ है"। गाड़ी लग मे आयल तs हम सब बगल भs गेलहुँ। पहिने तs बुझायल गाड़ी नहि रुकत मुदा किछु आगू जा रुकि गेल। हम सब सबस पहिने बाबुजी के ऊपर चढेलहुँ आ आराम सँ एकटा सीट पर सुता देलियैन्ह ओकर बाद सब कियो ट्रेन पर चढि बैसि गेलहुँ।

कोहुना मोतिहारी स्टेशन तक पहुँचलहुँ। पूरा स्टेशन लोक सँ भरल छलैक। असल मे गार्ड खबरि दs देने रहैक जे एक्सिडेन्ट वाला सब के आनि रहल छी। ओहि ठाम सँ हॉस्पिटल तक सब इंतज़ाम पुलिस वालाक छलैक। संयोग सँ ओहि ठामक एक गोट रेलवे के पैघ अधिकारी हमर परिवार के चिन्हैत छलाह ओ हमर बड़का काका आ एकटा हमर पितिऔत काका के जे कि रेलवे मे छलाह खबरि कs देलैथ।

बाबुजी के डॉक्टर कहि देलकैन्ह अछि तुंरत सीतापुर या अलिगढ लs जएबाक लेल हुनकर एक आँखि मे बहुत चोट छैन्ह। बाकी सब के घाव छलैक जे ठीक होयबा मे दू चारि दिन और लागि जयतैक।

मोतिहारी करीब करीब हमर पूरा परिवारक लोक पहुँचि गेल छलथि विचार भेलय जे लाल मामा आ माँ के छोरि सभ गोटे गाम जायब।

Sunday, May 31, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (तेरहम कड़ी )

ओना तs जहिया सs हम सब जमशेदपुर अयलहुँ आ बाबुजी के बुझल भेलैंह जे काका के मोन ख़राब रहैत छैन्ह बराबरि राँची जायत छलाह आ काका के डॉक्टर लग अपनहि लs कs जायत छलाह, मुदा एहि बेरक गप्प किछु आओर छैक। पिछला बेर डॉक्टर एन.के. झा एक मास बाद आबय लेल कहने छलथिन आ कहने छलथिन जओं एक मास मे ओ दवाई काज नहि केलकैन्ह तs काका के जमशेदपुर वा बम्बई लs जाय परतैन्ह। काका के कोन बिमारी छैन्ह से राँची के डॉक्टर के पता नहि चलैत छलैक। एहि बेर बाबुजी सोचि के जायत छलाह जे जओं डॉक्टर साहेब कहलथि तs काका के जमशेदपुर लs अनताह। जमशेदपुर मे बाबुजी के एतबहि दिन मे डॉक्टर सब सs जान पहचान भs गेल छलैन्ह आ काका के विषय मे डॉक्टर सब सs गप्प सेहो कयने रहथिन।

बाबुजी राँची सs लौट कs अयलाह तs हमर हिम्मत हुनका लग जयबाक नहि होयत छल। बाबुजी सs की पुछियैन्ह, की कहताह इ सोचि रहल छलहुँ कि माँ अयलीह आ अपनहि कहलीह जे काका सब दू तीन दिन बाद आबि रहल छथि, आब एहि ठाम हुनकर इलाज होयतैन्ह। राँची मे डॉक्टर सब के नहि बुझा रहल छैक जे हुनका कोन बिमारी छैन्ह। इ सुनतहि हमरा मोन मे तरह तरह के आशंका होमय लागल।

काका, मौसी, मधु, पपू, निक्की आ सोनू सभ गोटे आबि गेलथि। काका के देखि हम हुनका देखितहि रहि गेलहुँ। पहिल दिन जमशेदपुर हमरा सब सs भेंट करय लेल आयल छलथि ताहु सs बेसी कमजोर लागैत छलाह। हमरा किछु नहि फुराइत छलs जे हम की बाजियैन्ह। काका हमर मोनक गप्प अपनहि बुझि गेलाह आ कहलाह "पेट मे बड दर्द होयत अछि आब एहि ठाम भैया लग आबि गेलहुँ आब ठीक भs जायब"।

भोरे बाबुजी काका के लs कs टाटा मेन हॉस्पिटल गेलाह। करीब १२ बजे बाबुजी असगरे अयलाह आ माँ सs कहलथिन जे" जयनंदन के check-up करय के लेल भर्ती कs लेलकैन्ह अछि। बेर बेर अनाइ गेनाइ मे दिक्कत होइतैक ताहि चलते भरती करा देलियैन्ह। सब जाँचक बादे डॉक्टर बतायत जे हुनका की छैन्ह आ कोन दबाई चलतैन्ह"। साँझ मे माँ आ मौसी सेहो बाबुजी के सँग काका सs भेट करय लेल गेलिह। मधु पप्पु सब घर पर हमरा सब सँग छलथि।

काका के एक सप्ताह सs बेसी भs गेल छैन्ह हॉस्पिटल मे मुदा अखैन्ह धरि जाँच चलिए रहल छैन्ह। बिमारी कोन छैन्ह सेहो नहि बुझल छैक। बाबुजी के आजु एक गोटे सs कहैत सुनलियैन्ह जे आब एहि सप्ताह मे सब टा जाँच खतम भs जयतैक, तकर बाद हुनकर इलाज आरम्भ होयतैन्ह।

मौसी सब दिन अपना सँग सोनू के लs जायत छलिह। आय माँ आ मौसी सँग मधु पप्पु सेहो काका सs भेंट करय लेल गेल छथि। हमर मोन सेहो छलs जेबाक मुदा एक संगे बेसी लोग गेनाइ ठीक नहि, हम सोचलहुँ दोसर दिन जायब। सब चलि गेलथि तs मोन से नहि लागति छलs। रहि रहि कs बाहर जायत छलहुँ देखय लेल जे माँ सब अयलीह कि नहि।

माँ सब हॉस्पिटल सs लौट कs अयलीह तs माँ भनसा घर दिस चलि गेलिह, मौसी अपन बच्चा सब मे लागि गेलिह मुदा बाबुजी एकदम उदास बुझेलाह। हम चाय लs कs बाबुजी लग गेलहुँ आ हुनका चाय दs धीरे सs पुछलियैन्ह "काका के मोन केहेन छैन्ह"। किछु समय तक तs बाबुजी किछु नहि बजलाह मुदा फेर कहलाह "मोन ठीक नहि छैन्ह, आब सब रिपोर्ट आबि गेलैक अछि । जयनन्दन के कैंसर छैन्ह, सेहो अन्तिम स्टेज मे। अहाँ के मौसी के नहि बुझल छैन्ह आ नहि हुनका किछु कहबैन्ह । आय सs दवाई सेहो शुरू भs गेल छैक"। बाबुजी के हम किछु जवाब नहि दs सकलियैन्ह आ ओहि ठाम सs चलि गेलहुँ।

माँ सs हम पहिनहि कहि देने रहियैन्ह जे आजु हम काका के देखय लेल अवश्य जायब। हॉस्पिटल पहुँचि काका लग गेलहुँ तs देखि बुझायल जेना काका आओर कमजोर भs गेल छथि। अस्पताल सs अयलाक बाद हमरा किछु नहि फुराइत छल जे की करी। राति मे हमरा किछु नहि फुरायल तs हिनका चिट्ठी लिखय लेल बैसि गेलहुँ आ काका के स्वास्थ्य केर विषय मे सबटा लिखि देलियैन्ह।

आय इहो पहुँचि गेलाह। बाबा के नहि कहल गेल छैन्ह , दादी के किछु आओर कही बजा लेल गेल छैन्ह। काका, काकी, पीसा, पीसी सब तs पहिनहि सs आबि गेल छथि। काका के मोन दिन दिन ख़राब भेल जा रहल छैन्ह इ देखि परिवारक सभ गोटे चिंतित छथि। अस्पताल सs अयलाक बाद मौसी आ दादी मन्दिर गेल छथि। बाबुजी आ बाकी परिवारक सभ गोटे बैसि कs गप्प क रहल छथि। हम बाहर मे बैसल छी कि अचानक बाबुजी के कहैत सुनलियैन्ह "टिस्को (TISCO) के प्रबंध निर्देशक केर पत्नी के सेहो जयनन्दन वाला बिमारी छैन्ह आ ओ अमेरिका सs इलाज करा कs आयल छथि। हुनको अमेरिका के डॉक्टर जवाब दs देने छैन्ह, आब ओहो एहि ठाम अस्पताल मे छथि आ एके डॉक्टर दुनु गोटे के इलाज कs रहल छैन्ह। दवाई सेहो एके परि रहल छैन्ह। आब तs मात्र भगवान पर भरोसा अछि"। इ सुनलाक बाद मोन आओर छोट भs गेल सोचय लगलहुँ पता नहि आब काका ठीक होयताह की नहि।

परिवारक सभ कियो जमशेदपुर मे छथि मुदा बाबा आ बौआ के किछु नहि बुझल छैन्ह। बौआ के मेट्रिक परीक्षा छैन्ह इ सोचि हुनका किछु नहि बतायल गेल छैन्ह। बिचार भेलैक जे इ मुजफ्फरपुर जयबे करताह परीक्षा समय मे बौआ लग चलि जयताह।

भोर मे मामा सभ अयलाह आ इ मुजफ्फरपुर चलि गेलाह। हमरा कहैत गेलाह जे मेट्रिक के परीक्षा तक ओम्हरे रहताह कारण सभ गोटे जमशेदपुर मे छथिन्ह जओं बौआ के किछु काज भेलैंह तs एको गोटे के लग मे रहबाक चाहि।

Friday, May 22, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(बारहम कड़ी)

बोमडिला आबय समय हम सोचनहुँ नहि रहिये जे एतेक जल्दी हिनका सs भेंट होयत। हिनका देखि हमरा अत्यन्त प्रसन्नता भेल मुदा व्यक्त करय मे संकोच होयत छलs। इहो हमरा देखि कम खुश नहि छलथि आ नहि हिनका अपन प्रसन्नता व्यक्त करय में देरी लागलैन्ह। बौआ के जायत देरी अपन खुशी व्यक्त कs देलाह।

हम हिनका सs गप्प करैत छलियैन्ह आ हिनक कॉलेजक विषय मे पुछति छलियैन्ह कि अचानक इ कहि उठलाह " हम सोचि लेने छी, सब मास अहाँ लग आबय के लेल छुट्टी लेब, ताहि सs नीक जे अहाँक नाम हम मुजफ्फरपुर मे लिखवा दी। प्रकाश(बौआ के नाम) एहि बेर सs बाबा लग रही कs पढिये रहल छथि। हम अहाँ कs बाबुजी सs गप्प करैत छियैन्ह। ओनाहुँ अहाँक काका कs बदली राँची सs भs रहल छैन्ह आ निर्मला कॉलेज मे अहाँ के हॉस्टल मे नहि लेत, कियाक तs ओ सब बियाहल के हॉस्टल मे नहि लैत छैक। द्विरागमन होयबा मे एखैन्ह कम सs कम डेढ़ साल छैक, अहाँक बाबुजी के कतय बदली होयतैन्ह नहि जानि। हम आब बेसी दिन अहाँ सs अलग नहि रहि सकैत छी। मुजफ्फरपुर मे भेंट तs होयत, आ बदली के चक्कर से नय रहत"। हम चुप चाप सुनि लेलियैन्ह, सोचलहुँ कॉलेज तs मुजफ्फरपुर मे राँची सs नीक नहि होयत मुदा हिनकर छुट्टी आ ऐबा जयबा वाला चक्कर समाप्त भs जयतैन्ह।

भोर मे बौआ के देखलियैन्ह जल्दी जल्दी तैयार भs गेलाह आ हिनकर खुशामद करय छलाह। हमरा मना कs देने छलथि हिनका सs सीढी के विषय मे गप्प करबाक लेल वा बतेबाक लेल जे कतेक सीढी छैक। जलखई के बाद हम, बौआ आ इ तीनू गोटे घुमय लेल निकलहुँ।जाड़ छलैक हम सब अपन अपन गरम कपडा पहिर लेने रही। सबस पहिने बाबूजी के ऑफिस पहुँचलहुँ ओ देखलाक बाद बौआ कहलाह चलु हम सब आओर नीचा चलैत छी। हम सब नीचा चलैत गेलहुँ, नीचा जाय मे तs बड नीक लागल। एक तs सीढ़ी नीक छलैक दोसर ढलांग पर उतरय मे ओनाहु नीक लागैत छैक। उतरय समय मे हम सब बुझबे नहि केलियैक जे कतेक नीचा जा रहल छी। हम सब मौसम आ प्रकृति केर आनंद लैत कखनहु कs बाजी लगा कs दौड़ति आ कखनहु कूदति नीचा उतरति गेलहुँ। अचानक इ कहलाह आब आगू नहि , आब एतय सs आपिस चलु। सड़क नजरि आबय लागल छलैक हम सब विचारि केलहुँ सड़क सs आपिस भेल जाय आ हम सब पहिने सड़क सs आ बीच बीच मे सीढी सs चढैत ऊपर जाय लगलहुँ।

ऊपर चढय समय सेहो शुरू मे तs नीक लागल मुदा जलदिये थाकि गेलहुँ। ततेक गरमी लागल जे एक एक कs अपन अपन स्वेटर उतारय परि गेल। ओकर बाद हम सब रुकि रुकि कs चलय लागलहुँ। घर पहुँचति पहुँचति हम सब ततेक थाकि गेल रही जे घर पहुँचति देरी इ तs सीधे बिछौन पर परि रहलाह। किछु समय बाद जखैंह इ भोजन करय लेल उठलाह तs बौआ हँसैत पुछलथिन "केहेन लागल बोमडिला "। सुनतहि हँसय लगलाह आ कहलाह "अरे अहाँ तs हमरा मारि देलहुँ आ पुछति छी केहेन लागल बोमडिला, हम आब किनहु अहाँ दुनु भाई बहिन संग पैरे घुमय नहि जायब "।

बाहर वाला घर में बैसला सs गेट ओहिना नजरि आबैत छलैक आ गेट लग सीढ़ी छलैक जाहि सs ऊपर चढि आ फेर नीचा उतरि कs झरना लग जाय परैत छलैक ।झरना के बाद दाहिना दिस सीढ़ी छलैक जाहि सs नीचा उतरि बाबुजी केर ऑफिस जाय परैत छलैक । बाबुजी सब दिन भोर में जायत समय आ खेनाई खाय लेल जखैंह आबैत छलाह तखैन्ह दुनु बेर ऑफिस पैरे जायत छलाह आ आपिस आबैत छलाह। इ सब दिन बाबुजी के ऑफिस जाय समय बाहर वाला घर में जा कs बैसि रहैत छलाह। जाय समय बाबुजी हमरा कहैत गेलाह जे हम सब तैयार रही ओ ऑफिस जाय कs जीप पठा देताह आ हम सब सलारी जे कि बहुत नीक जगह छलैक ताहि ठाम सs आजु घुमि आबि। बाबुजी केर ऑफिस जाय समय हम जखैन्ह बाहर वाला घर मे गेलहुँ तs इ आ बौआ पहिनहि सs ओहि घर मे छलाह। जहिना हम पहुँचलहुँ बाबुजी गेट लग पहुँचि गेल छलाह, ओ जहिना गेट सs ऊपर गेलाह इ तुंरत कहि उठलथि , देखू आब बाबुजी घुरताह, हम मजाक बुझि हँसय लगलहुँ मुदा सच मे बाबुजी किछुए आगू जा फेर आपस घर आबि गेलाह आ अपन कोठरी मे जा फेर ऑफिस गेलाह। हम पुछलियैन्ह अहाँ कोना बुझलियय जे बाबुजी आपस अओताह, तs हमरा कहलाह ओ तs सब दिन एक बेर ऑफिस जाय समय मे आपिस आबि कs जाय छथि। हम जहिया सs अयलहुं अछि हम देखि रहल छियैन्ह। बाबुजी के किछु नय किछु सब दिन छुटैत छैन्ह आ ओ आपिस आबि कs लs जायत छथि। हमरा हँसी लागि गेल आ कहलियैन्ह अहाँ के अहि ठाम कोनो काज नहि अछि तs यैह सब देखति रहैत छियैक।

आजु बाबुजी ऑफिस s अयलाह s आबिते सुनेलाह जे हुनक बदली के आदेश आबि गेल छैन्ह आब जलदिये हुनका जमशेदपुर जा s ओहि ठामक कार्य भार सम्भारय परतैन्ह सुनि हमरा बड खुशी भेल, संगहि देखलियैक बिन्नी सोनी बौआ सब खुश छलथि सब s बेसी माँ खुश छलीह

जहिया सs बाबुजी कहलथि जे हुनक बदली केर आदेश आबि गेल छैन्ह ओहि दिन के बाद s बौआ हम सब दिन घुमय निकली, बीच बीच मे कोनो कोनो दिन सोनी बिन्नी सब सेहो सँग जायत छलिह बोमडिला मे घुमय लेल एक s एक जगह छलैक मुदा प्रदूषण नामक कोनो वस्तु नहि दूर वाला जगह सब s जीप सs जाइत छलहुँ मुदा लग वाला सब पैरे जाइत रही एकटा बातक ध्यान सदिखन राखथि जे चलैत चलैत बेसी दूर नहि जाई

हमरा लोकनि कs बोमडिला मे एक डेढ़ मास घुमति फिरति कोना बीति गेल से बुझय मे नहि आयल जएबाक दिन लग आबि गेल छलैक, बाबुजी कहलथि जे सब गोटे एकहि सँग चारद्वार तक जायब ओहिठाम s ठाकुर जी बौआ मुजफ्फरपुर चलि जयताह बाकी हम सभ जमशेदपुर चलि जायब

चारद्वार गेस्ट हाउस तक सब गोटे सँग अयलहुँ ओहि ठाम आबि एक बेर फेर बिछरय के आभास भेल मुदा एहि बेर दोसर तरहक छलs मोन मे भेल आब s किछुए दिनक गप्प छैक तकर बाद s सब ठीक s जायत हमर पढ़ाई हिनका अयबा जयबा मे सेहो कोनो तरहक दिक्कति नहि होयत हिनकर ट्रेन पहिने छलैन्ह, जाय समय मे हमरा उदास देखि कहलाह " आब s अहाँ जमशेदपुर मे रहब ओहि ठाम जाय मे हमरा कोनो दिक्कत नहि होयत किछु दिन बाद हमर पढ़ाई सेहो खतम s रहल अछि"

जमशेदपुर
पहुँचि बाबुजी के रहय लेल एकटा खूब पैघ सरकारी बंगला भेट गेल छलैन्ह जे कि किछु दिन सs खाली छलैक। जतबा पैघ घर छलैक ततबे पैघ ओहि मे बगीचा मुदा खाली कियाक छलैक से तs बाबुजी के नहि बुझय मे अयलैन्ह, मुदा माँ के ओहि घर मे रहय मे डर होयत छलैन्ह आ कहलथि "एहि घर मे बेसी दिन नहि रहल जा सकैत अछि। जाबैत कोनो दोसर नीक घर नहि भेटय छैक ताबैत एहि बँगला मे रहल जाय"। माँ सब के कहि देने रहथि जरूरी सामान मात्र खोलबाक अछि। ओहि बंगला मे कम सs कम छौ सात टा कोठरी छलैक जाहि मे सs दू टा कात वाला कोठरी आ भनसा घर खोलि हम सब रहय लगलहुँ। बाकी सब कोठरी बंद रहैत छलैक।

हम सब जमशेदपुर अयलहुँ ओकर दू तीन दिन बाद काका भेंट करय लेल अयलाह, हुनका देखि हम तs आश्चर्यचकित रहि गेलहुँ। एतबहि दिन में ततेक कमजोर लागैत छलाह जे देखतहि माँ पुछलथिन "अहाँ के किछु होयत अछि की फूल बाबू"। काका कहलथि कोनो ख़ास नहि, बीच बीच मे पेट मे गैस भs जायत अछि जाहि के चलते दर्द होयत रहैत अछि।काका जाय लगलाह तs माँ काका के कहलथिन जे राँची जा कs सबस पहिने नीक सs डॉक्टर से देखाऊ, बराबरि दर्द भेनाई ठीक नहि छैक ।

हम सब ठीक दुर्गा पूजा सs पहिने जमशेदपुर पहुँचल रही । एक तs नब जगह ताहि पर तेहेन घर छलैक जे कतहु घुमय जाय मे से डर होयत छलैक, मुदा हम सब जमशेदपुरक पूजा देखलहुँ। दिवाली सs एक दू दिन पहिने इ पहुँचलाह। हिनका देखि कs सब भाई बहिन सब खुश भs जाय गेलथि आ इहो सब संग मिली कs दिवाली के पटखा कs तैयारी करय मे लागि गेलाह ।

दिवाली दिन साँझ मे पूजाक बाद सभ गोटे बाहर मे बैसि कs प्रसाद खाइत छलहुँ प्रसाद खेलाक बाद इ उठि कs पाछू गेलाह आ सँग सँग चारू भाई बहिन सेहो हिनके पाछू चलि गेलथि। माँ भानस मे लागल छलिह बाहर मे मात्र हम आ बाबुजी बचि गेलहुँअचानक पाछू वाला घर मे बुझायल जेना बम फुटैत छैक। बाबुजी आ हम दूनू गोटे दौरि कs भीतर गेलहुँ। माँ से भनसा घर स दौरि क अयलीह। जाहि दिस सs आवाज अबैत छलैक ओहि दिस घरक भीतरे सs हम सब गेलहुँ। बाबुजी घर सब खोलैत जओं बीच वाला हॉल लग पहुँचलाह तs सामने मे इ ठाढ़, संग मे बिन्नी, सोनी , अन्नू आ छोटू सब पटाखा छोरि थपरी पारि खुश होयत छलथि। असल मे इ, सब बच्चा के लs कs बीच वाला हॉल मे पटखा छोरैत छलाह। बीच वाला हॉल ततेक टा छलैक आ ताहि पर खाली जे छोटका पटाखा सेहो बुझाइत छलैक जे बम फुटल छैक। हिनका देखि बाबूजी किछु नहि बजलाह आ हँसैत आपिस भs गेलाह।


Wednesday, May 13, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (एग्यारहम कड़ी)

बोमडिला पहुँचलहुं त साँझ भs गेल छलैक। जीप सs उतरि कs माँ हमरा सब के लs आगू बढि गेलिह आ बाबुजी सामान सब उतरवाबय लगलाह। हम जहिना सीढी पर चढि ऊपर अयलहुं, लकडी के घर सब देखाई परय लागल। बाहर सs सब घर देखय मे एकहि जेना बुझि परैत छलैक। सब घरक छत हरियर, मुदा दू घर सs बेसी एक समतल जमीन पर नजरि नहि आयल। ऊपर आ नीचा सब ठाम जएबाक लेल सीढी बनल रहैक।ऊपर नीचा करैत हम सब अपन घर पहुँचि गेलहुँ।

हम सब ततेक थाकल रही जे चाय आ जलखई केलाक बाद कखैन्ह नींद आबि गेल, हम नहि बुझलियैक। माँ के बोली पर हमर नींद खुजल। माँ कहि रहल छलथि " उठु नय भोजन केलाक बाद फेर सुति रहब"। उठलहुँ तs, मुदा जारक चलते हमरा भोजनो करबाक मोन नहि भs रहल छलs।माँ हमरा बिछोना सs उतरय लेल मना कs देलथि आ हमर भोजन बिछाओन लग मँगा देलिह। भोजनक बाद हम कोहुना उठि कs हाथ धोए लेल बिछाओन सs उतर कs गेलहुँ।

हमर आँखि खुजल तs माँ बाबुजी आ एक आओर व्यक्ति के अपना सोझा मे देखि हम हरबरा कs उठय लगलहुँ। माँ कहलिह "किछु नहि भेल अछि परल रहू। असल में अहाँ हाथ धोअय लेल गेलहुँ तs ओहि ठाम बेहोश भs खसि परल रही। की भेल छलs? डॉक्टर साहेब कहैत छथि ऊंचाई के चलते भेलैक अछि। एके बेर ओतेक नीचा सs ८ हजार फीट पर पहुँचि गेलहुँ ताहि केर असर छैक आओर किछु नहि"। तखैन्ह हमरा याद आयल जे हमरा चक्कर जेना बुझायल छलs आओर किछु याद नहि छलs। डॉक्टर इ कहि चलि गेलाह जे आराम करू भोर तक एकदम ठीक भs जायत।

बेर बेर उठि मुदा बुझाइत छल एखैन्ह भोर नहि भेलैक आ फेर सुति जाइत छलहुँ। मोन मे आयल जे घड़ी देखि लेत छी। जओं घड़ी दिस नजरि गेल तs आठ बाजैत छलs, हरबरा कs उठलहुँ आ बाहर दिस निकलि गेलहुँ। राति मे एक तs ठंडा आ ताहि पर ततेक थाकल रही जे घर मे घुसलाक बाद बाहर निकलबाक हिम्मत नहि भेल। बाहर आबितहि बुझि गेलहुँ जे हमरा कियाक होयत छलs जे भोर नहि भेलैक अछि। धुंध तेहेन छलैक जे अपन घर छोरि कs सामने वाला घर सेहो नहि देखाइत छलs। किछुए कालक बाद बौआ सेहो बाहर पहुँचि गेलाह। धुंध बेसी काल नहि रहलैक आ हटैत के सँग प्राकृतिक रूप साफ साफ देखाई परय लगलैक।किछु काल तक ठाढ़ भs हम प्रकृतिक ओहि रूप के देखैत रहि गेलहुँ। जतय तक नजरि गेल, सब घरक सोंझा मे सुंदर सुंदर फूल नजरि आयल जे देखि मोन प्रसन्न भs गेल। हम ठाढ़ भs देखैत छलहुँ कि अचानक एक झुंड लड़ाकू विमान (mig) बुझायल जेना हमर घरक ठीक पाछू सs निकलल अछि आ आसमान मे एम्हर सs ओम्हर करय लागल। कखनहु बुझाइत छलs आब खसि परतैक मुदा फेर तुंरत ऊपर आबि जायत छलs। ओहि विमानक झुंड देखैत देरी हम दुनु भाई बहिन अपन बरामदा सs उतरि जओं पाछू गेलहुँ तs पहाड़ के सुन्दरता देखि किछु काल ओहि ठाम ठाढ़ रहि गेलहुँ। बुझाइत छल जेना पहाड़ घरक ठीक पाछू मे अछि। हम आ बौआ घरक चारू कात घुमि घुमि कs सब वस्तु देखय लगलहुँ। एक सs एक सुंदर फूल घरक सामने आ कात वाला फुलवारी मे लागल छलैक।फूलक रंग आ आकर देखि हम आश्चर्य चकित रही गेलहुँ।

बाबुजी ऑफिस जएबाक लेल बाहर अयलाह त हम दुनु भाई बहिन बाहर छलहुँ। ओ बतेलाह जे बोमडिला मे बहुत सैनिक छैक, मुदा ओ सब नजरि नहि आयत कियाक तs सब बंकर(bunkar) मे रहैत छैक। अहि ठाम भारतीय सेनाक जेट,(jet) मिग(mig) आ सब तरहक लडाकू विमान देखय भेटत। सैनिक सब बराबरि अपन अभ्यास करैत रहैत छैक। भारत चीनक बोर्डर सेहो बोमडिला सs लग १४ हजार फीटक ऊंचाई पर एकटा जगह छैक सेलापास ताहि ठाम छैक। ओतय तs आओर बेसी ठंढा रहैत छैक।

जुलाई, अगस्त मास मे एतेक जाड़ हम नहि देखने रहियैक। एक तs अहि ठाम हमरा आ बौआ दुनु गोटे के मोन नहि लागैत छलs ताहि पर जाड। हम आ बौआ सब दिन सोचैत छलहुँ घुमय लेल जायब मुदा जाड़क चलते नहि जायत छलहुँ। बाबुजिक ऑफिस घर सs बहुत नीचा रहैन्ह आ सीढी सs उतरय आ चढ़य परैत छलैन्ह जे १०० सs बेसी छलैक। एक दिन हम आ बौआ बिचारि कs स्वेटर पहिरि घुमैत घुमैत बाबुजी के ऑफिस देखय लेल गेलहुँ। जाइत काल मे उतरय के छलैक, ओ तs बड नीक लागल आ दुनु गोटे सीढ़ी पर कूदैत कूदैत उतरि गेलहुँ। चढ़ैत काल दुनु गोटे के हालत ख़राब भs गेल। आपस अयलाक बाद बौआ कहलाह "ठाकुर जी अओताह तs हम हुनका अवश्य बाबुजी के ऑफिस लs जयबैन्ह"।

अन्नू आ छोटू तs बहुत छोट छलथि, सोनी आ बिन्नी दिन मे स्कूल चल जाइत छलिह, बौआ आ हम दुनु गोटे बेसी घर मे रहैत छलहुँ। साँझ मे बाबुजी अयलाह, हम सब बैसि कs बोखारी लग चाह पिबति रहि आ गप्प सप्प होयत छलैक। गप्प के बीच मे माँ बाबुजी सs कहलिह "मुन्नी बौआ के कतहु कतहु घुमा दियौक नञ। इ सब कतहु नहि जायत छथि भरि दिन घर में रहैत छथि। दुनु गोटे के मोन नहि लागि रहल छैन्ह"। इ सुनतहि बाबुजी कहलाह"बुझाइत अछि आब हमर बदली जल्दिये भs जायत। आजु हम ठाकुर जी के लेल परमिट बनवा कs पठा देलियैन्ह आ जल्दिये आबय लेल लिखि देने छियैन्ह। हुनको आबि जाय दियौन्ह तs तीनू गोटे एकहि संग घूमि लेताह। बाद मे तs एहि ठाम आबय मे थोरेक झंझट छैक"। इ सुनी हमरा नीक लागल, सच मे हमरा मोन नहि लागि रहल छल।

जहिया सs बाबुजी कहलाह ओ हिनका लेल परमिट पठा देने रहथि ताहि दिन सs हम आ बौआ सब दिन हिनक बाट देखैत छलियैन्ह। बौआ सब दिन बैसि कs हमरा सs गप्प करैथ जे हिनका अयला पर हम सब कतय कतय घुमय लेल जायब। ओ सब पता कs कs राखने रहथि जे कोन कोन ठाम घुमय वाला छैक।

बोमडिला बड छोट जगह छलैक आ ओहि ठाम बाबुजी के ऑफिस(CPWD) केर लोक सब के छोरि किछु प्रशानक लोक आ केंद्रीय विद्यालय के किछु शिक्षक सब सेहो रहैत छलथि। माँ सब के किछु लोक के घर एनाई गेनाइ छलैन्ह हमरा अयला सs सांझ मे बराबरि कियो नहि कियो भेंट करय के लेल आबैत छलथि या नहि तs हमरा सब के लs कs माँ, बाबुजी भेंट कराबय लेल जायत छलथि।

बोमडिलाक मोसमक एकटा विशेषता देखय के लेल भेंटल। ओहि ठाम जोर सs पानी नहि परैत छलs मुदा भरि दिन झिसी होइत रहैत छलैक आ बीच बीच मे थोरे थोरे समय के लेल रोउद निकलैत रहैत छलैक। बाबुजी के ऑफिस केर एक गोटे भेंट करय लेल आयल छलथि आ हुनका सब के पानि के चलते जेबा मे देरी भs गेल छलैन्ह। हुनका सब के गेलाक बाद माँ जल्दी जल्दी सतमन(नौकर) सs खेनाई के व्यवस्था करवाबय मे लागि गेलिह। पूरा बोमडिला के लोक के पनबिजली (hydroelectricity) द्वारा बिजली भेटति छलैक आ राति के १२ बजे के बाद सs बत्ती नहि रहैत रहैक। माँ के प्रयास रहैत छलैन्ह जे १० बजे तक रतुका भोजन भs जाय, मुदा आजु किछु देरी भs गेल छलैक। माँ भोजनक व्यवस्था मे लागल छलिह। हम आ बौआ बिछाओन मे घुसि कs अपन गप्प करैत छलहुँ, बाकी चारु भाई बहिन सब खेलाइत रहथि आ खूब हल्ला करैत छलथि। बाबुजी अपन ऑफिसक काज करैत छलाह। अचानक बुझायल जेना कियो केबार खट खटा रहल छथि। सोनी बिन्नी बाहर वाला घर मे खेलाइत छलिह केबारक आवाज सुनी दुनु गोटे केबार खोलय लेल दौड़ गेलिह। केबार खोलैत के सँग ओहि ठाम सs ठाकुर जी ठाकुर जी करैत भागि कs भीतर आबि गेलिह। हिनक नाम सुनैत देरी माँ बाबुजी सब बाहर वाला घर दिस आबि जाय गेलथि।

हिनका अयला सs माँ आ सतमन के आओर काज बढि गेलैक। ओ सब जल्दी जल्दी आओर किछु किछु खेनाई मे बनाबय लगलथि। चाह पिलाक बाद माँ हिनका कहलथिन "इ जल्दी स तैयार भs जाओथ थाकल हेताह, भोजनक बाद गप्प करिहैथ"। कोहुना भोजन बिजली जाय सs पहिने भs गेलैक आ सब कियो सुतय लेल चलि गेलथि।

बौआ हम आ इ बैसि कs गप्प करैत छलहुँ। इ अपन यात्राक वर्णन करैत कहलाह "आइ तs हम बचि गेलहुँ। चारद्वार पहुँचि पता केलहुँ तs लोक सब सs पता चलल आब बोमडिला के लेल एकहि टा बस छैक जे बेसी राति मे पहुँचायत। दिन वाला बस के लेल चाराद्वर मे राति भरि रहय परत इ सोचि चलि देलहुं। एहेन खतरनाक आ भयावह सड़क पर बस ड्राईवर तेनाक चला कs आनलक अछि जे हमर तs प्राण उपरे छल। बोमडिला आबि कs सेहो नीचा मे दुकान लग छोरि देलक। ओहि ठाम एकटा लोक नजरि नहि आबैत छल। संयोग सs एक गोटे भेंट गेलाह जे बाबुजी के ऑफिस के छलाह। ओ हमरा झरना लग पहुँचा कs गेलाह। झरना के बाद ऊपर चढि पहुँच तs गेलहुँ घर तक, मुदा होयत छल एहि राति मे ग़लत घरक केबार नहि खट खटा दियैक। पहिने घर लग आबि किछु काल ठाढ़ भs कs भीतरक गप्प सुनबाक प्रयास कयलहुँ। हल्ला सs बुझि गेलहुँ यैह घर हेबाक चाहीं मुदा मोन आगु पाछु होयत छल केबार खट खटाबी कि नहि कि अचानक मैथिलि मे बाजय के आबाज आयल आ तुंरत हम केबार खट खटा देलहुं"। हिनकर गप्प सुनि बौआ खूब हँसलाह आ कहलाह "बिना खबरि केने अहाँ बोमडिला आयब तs अहिना होयत नञ"। राति बड भs गेल छलैक हम सब उठि सुतय लेल आबि गेलहुँ।

हम हिनका सs कहलियैन्ह अहाँ तs कालिदास भs गेलहुँ। इ हमरा दिस देखि हँसैत बजलाह "कि करितौंह अचानक अहाँ सs भेंट करबाक मोन भs गेल आ बिना किछु सोचनहि चलि देलहुं। राति मे मोन भेल आ भोरे तैयार भs हम निकलि गेलहुँ। हम स्टेशन के लेल निकलति रही ओहि समय मे हमरा बाबुजी के चिट्ठी भेंटल जाहि मे परमिट भेजने रहथि। परमिट के एतेक महत्व छैक हमरा से नहि बुझल छलs। ओ तs संजोगे सs हमरा परमिट भेंट गेल नहि तs बड दिक्कत होइत। टिकट से, स्टेशन पर आबि कs लेलहुँ ओहो संयोगे सs भेंटल"।



Tuesday, May 5, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(दसम कड़ी)

हम माँ के सँग आय अरुणाचल जा रहल छी। माँ आयल तs रहथि हमर द्विरागमन करबाक लेल मुदा हमर सास ससुर नहि मानलथि। काका के बदली राँची सs कहियो भs सकैत छलैन्ह। इ सोचि हिनकर इच्छा आ जोर छलैन्ह जे द्विरागमन भs जायत तs हमरो नाम मुजफ्फरपुर में लिखवा दितथि आ हम ओहि ठाम पढितहुं। माँ सब के सेहो चिंता नहि रहितियैन्ह आ हिनको नीक रहितियैन्ह। बाबुजी के चिट्ठी लिखि कs एहि लेल इ मना लेने रहथि। जहिया सs हमर मोन ख़राब भेल छल तहिया सs इ लगभग सब मास एक बेर राँची आबि जायत छलाह। मुदा हमर सास एकही बेर कहि देलथिन "आय धरि हमरा सब ओहिठाम पहिल साल में द्विरागमन नहि भेल अछि, आ नहि धारति अछि"। अंत मे जखैन्ह हमर सास ससुर तैयार नहि भेलथि तs माँ हमरा कहलथि "चलु अहाँ अरुणाचल गेलो नहि छी, घूमि कs चलि आयब। जओं एहि बीच मे काका के बदली भs गेलैन्ह तs फेर सोचल जायत जे की कायल जाय"। हमर कॉलेज गरमी के छुट्टी लेल बंद छलैक।

दू दिन पहिनहि हमर विवाहक पहिल वर्षगाँठ छलs आ आय हम अरुणाचल जा रहल छी। हमर मोन इ सोचि कs उदास छलs कि ओतेक दूर जा रहल छी। फेर कतेक दिन पर हिनका सs भेंट होयत से नहि जानि। हमरा एको रत्ती माँ के सँग जयबाक खुशी नहि छलs। हमर चेहरा देखि कs कियो कहि सकैत छलथि जे हमर मोन बहुत दुखी अछि। हिनको मोन उदास छलैन्ह आ चुप चाप हमरे लग ठाढ़ छलथि। हम हिनक मोनक गप्प सेहो बुझि रहल छलियैन्ह मुदा की करी से नहि बुझय में आबि रहल छलs। हम सब वेटिंग रूम मे ट्रेनक प्रतीक्षा मे छलहुँ जाहि केर अयबा मे अखैन्ह बहुत देरी छलैक। हम बेर बेर देखाबय चाहि रहल छलियैक जे हमर आंखि मे किछु परि गेल अछि आ हम अपन रुमाल सs निकालय के प्रयास कs रहल छी, मुदा सत्यता किछु आओर छलैक। इ हमर मोनक गप्प बुझि गेलाह आ माँ के कहलथि "अखैन्ह तs ट्रेन आबय मे देरी छैक हम सब चाह पीबि कs थोरेक काल में अबैत छी"। इ कहि आ बौआ के बुझा हमरा चलय लेल कहलथि। जहिना हम सब बिदा भेलहुँ कि हिनकर मित्र धनेश जी, चलि आबैत छलाह। हुनका देखि हम सब रुकि गेलहुँ। जखैन्ह ओ माँ कs गोर लागि लेलथि तs हुनको सँग लs आगू बढ़ि गेलहुँ।

माँ के लेल चाय इ वेटिंग रूम में पठा देलथि। हम दुनु गोटे आ धनेश जी रेलवे केर जलपानगृह में बैसि कs चाय पिबय लगलहुं। धनेश जी हिनकर अभिन्न मित्र छलथि आ दुनु गोटे एकहि कॉलेज मे सेहो पढैत छलाह। विवाहक बाद ओ पहिल बेर हमरा सs भेंट करय के लेल आयल छलाह। हम ओहिना बेसी नहि बजैत छलहुँ दोसर आय होयत छल जे बाजब तs पता नहि कना नहि जाय। इ हमर मोनक गप्प बुझि गेलाह आ हुनक बेसी प्रश्नक जवाब दs रहल छलथि। किछु किछु तs ओहि मे हमरा हंसेबाक लेल आ ध्यान दोसर दिस करबाक लेल सेहो छलैक।

धनेश जी आ इ गप्प कs रहल छलथि, हम बीच बीच मे माथ तs डोला रहल छलहुँ मुदा हमर ध्यान कतहु आओर छल। हमर मोन एकदम बेचैन लागि रहल छल आ बेर बेर हम घड़ी देखि रहल छलहुँ। राँची में रहैत छलहुँ तs कम सs कम मास में एक बेर इ आबि जायत छलाह। चिट्ठी से सब दिन अबैत छलs । अरुणाचल जा तs रहल छलहुँ इ सोचि कs जे घूमि कs चलि आयब मुदा काका के बदली लs कs चिंता होयत छलs । राँची में रही तs जखैन्ह मोन होयत छलैन्ह आबि जायत छलाह अरुणाचल एक तs दूर छलैक दोसर ओहि ठाम जेबाक लेल परमिट बनाबय परैत छैक। हमर की किस्मत अछि नहि जानि जहिया हमरा माँ सँग रहबाक मोन होयत छलs, हम माँ सs अलग रहलहुं। आब हिनका सँग रहबा मे नीक लागैत छलs आ रहबाक मोन होयत छलs तs आब हिनको सs एतेक दूर जा रहल छलहुँ, इ सोचि कs हमर मोन दुखी छलs । तथापि धनेश जी सोझा मे छलथि तs मुँह पर हँसी अनबाक प्रयास करैत छलहुँ। अचानक हिनकर बोली कान मे आयल "आब समय भs गेल छैक चलु माँ के चिंता होयत हेतैन्ह", इ सुनतहि हम सब उठि कs चलि देलहुं।

हम सब जखैन्ह पहुँलहुं तs माँ के ठीके हमरा सब कs आबे मे देरी देखि चिंता होयत छलैन्ह। देखैत देरी बजलीह "अखैन्ह तक कुली सब नहि आयल अछि, आब ट्रेन आबय वाला छैक"। एतबा माँ कहिते छलिह की दुनु कुली आबि गेलैक।

हम सब ट्रेन में बैसि गेलहुँ, सामान सब जगह पर रखवेलाक बाद इहो हमरा सब लग बैसि गेलाह। सोनी बिन्नी दुनु गोटे एक एक टा खिड़की वाला सीट लs कs बैसि गेलीह, बेचारी अन्नू आ छोटू के कात में बैसा देने रहथि। माँ आ बौआ अपना हिसाबे सामान सब ठीक करबा में लागल छलथि। इ एक टक हमरे दिस देखैत छलाह। बुझि परैत छ्लैन्ह जेना आब कहताह अहाँ नहि जाऊ। हम अहाँक बिना नहि रहि सकैत छी। हम लाचार दृष्टि सs हुनका दिस देखि रहल छलहुँ आ मोने मोन भs रहल छलs कियो हमरा कहि दितैथ अहाँ के आब नहि जयबाक अछि। मुदा से नहि भेलैक आ अचानक धनेश जी खिड़की लग आबि कs कहलाह "यौ आब नीचा आबि जाऊ गाड़ी के सिग्नल भs गेल छैक"। एतबा सुनतहि इ हरबरा क उठि गेलाह आ कहलाह "पहुँचैत देरी चिट्ठी अवश्य लिखि देब।" इ कही माँ के गोर लागि उतरि गेलाह। हम घुसकि कs बिन्नी लग बैसि गेलहुँ आ फेर हिनका दिस लाचार भs देखय लागलियैन्ह। अचानक बुझायल जेना हमर किछु एहि ठाम छुटि रहल अछि ।

ट्रेन धीरे धीरे स्टेशन सs आगू बढ़ि रहल छलैक, मुदा हमर दुनु गोटे के नजरि एक दोसर पर छलs । हम सब एक दोसराके देखि रहल छलहुँ। धीरे धीरे दूरी बढ़ल जा रहल छलs, जखैन्ह आँखि सs ओझल भs गेलाह तs हम फेर अपन जगह पर आबि कs बैसि गेलहुँ। बौआ, सोनी बिन्नी अन्नू आ छोटू सब खुश छलथि। माँ अपन खाना वाला पेटार खोलि सब के ओहि में सs निकालि कs खेबाक वस्तु सब के देबय लागलीह।

गाड़ी सिलिगुरी पहुँचि गेल तs माँ हमरा आ बौआ के स्टेशन दिस देखा कs कहलिह "अहाँ सब के तs याद नहि होयत, एहि ठाम तक हम सब ट्रेन सs आबि, ओकर बाद गाड़ी सs सिक्किम जायत छलहुँ"। बाबुजी सिक्किम में सेहो तीन बरख रहल छलथि।

करीब चौबीस घंटा सs हमर सबहक ट्रेन न्यू बोगाई गाँव स्टेशन सs आगू आबि, एकटा छोट सन स्टेशन पर रुकि गेलैक। एतेक छोट स्टेशन की एहि ठाम किछु खेबा पिबाक सेहो नहि भेटैत छलैक। आगू कोनो ट्रेनक दुर्घटना भs गेल छलैक जाहि चलते सब ट्रेन एहि ठाम आबि कs रुकल रहैक। ओहि ठाम तेहेन स्थिति भs गेलैक जे बाद मे स्टेशन पर पानि सेहो खतम भs गेलैक। माँ के आदति छलैन्ह दूरक यात्रा करबाक आ ओ अपना सँग खेबा पिबाक ततेक नहि सामन रखने रहथि जे हमरा सब के ओहि में कष्ट नहि भेल, मुदा सब गोटे परेशान भs गेलहुँ। एक तs एहिना अरुणाचल जेबा में तीन दिन लागैत छलैक, ताहि पर चौबीस घंटा एक ठाम रुकलाक चलते आओर सब परेशान भs जाय गेलौन्ह।

ट्रेन चारद्वार जहिना पहुचलैक हमरा सब केर जान में जान आयल। बाबुजी स्टेशन पर ठाढ़ छलथि। करीब तीस घंटा देरी सs हमर सबहक ट्रेन पहुँचल छलैक। स्टेशन सs सीधा हम सब गेस्ट हाउस पहुँच गेलहुँ, ओहि ठाम हमरा सब के राति भरि रहबाक छल।

हम सब तैयार भs आ जलखई करला कs बाद बोमडिला (अरुणाचल) के लेल सरकारी जीप सs बिदा भs गेलहुँ। बाबुजी हमरा बतेलाह अरुणाचल में भारत केर १/३ सेना रहैत छैक। बॉर्डर पर परमिट देखाबय परलैक आ परमिट देखेलाक बाद बाबुजी कहलथि "अहाँ पहिल बेर आयल छी, बौआ तs एक बेर आयल छलथि। अहाँ जीप में हमरा सँग आगू बैसि जाऊ, देखय में बड नीक लागत। हम बाबुजी सँग आगू बैसि गेलहुँ।

ओना तs आसाम सेहो नीक लागल, मुदा अरुणाचल में प्रवेशक सँग बुझायल जेना प्रकृति एकरे कहैत छैक। कश्मीर तs हम नही देखने छलियैक जाहि केर तुलना लोग स्वर्ग सs करैत छैक।अरुणाचल मे प्रवेश करैत घाटिक घुमावदार सड़क आ चढाई आरम्भ भs गेलैक। सड़क सब नीक मुदा पातर देखय मे आयल। कहुना दू गाड़ी जएबाक जगह छलैक। बाबुजी बतेलाह जे सब सड़क सेना के छलैक।

जीप जहिना जहिना आगू बढैत गेलैक,चढाई तहिना तहिना बढ़ल जा रहल छलैक। सोनी बिन्नी सब तs ओहि ठाम माँ बाबुजी लग रहैत छलथि आ कैयेक बेर आयल गेल रहैथ सब गोटे गप्प मे व्यस्त छलिह। हमर ध्यान मात्र प्राकृतिक सुन्दरता देखय मे छल। पहाडी नदी के विषय मे सुनने आ कविता मे पढ़ने रही। मुदा आय साक्षात देखि रहल छलहुँ।जतेक सुनने रही ताहू सs सुंदर छल इ पहाडी नदी। झरना देखय लेल दूर दूर जायत छलहुँ, आ अहि ठाम तs रास्ता मे कैयेक टा झरना भेट रहल छलs।

बाबुजी हमरा सब ठामक नाम आ ओहि जगहक महत्व बताबैत जा रहल छलाह। बाबुजी कहलाह "आब इ जगह ठीक सs देखू, इ छैक तवांग वैली (Tawang Valley)। चीन सँग सन ६२ केर लड़ाई में एकर बड महत्व छैक"। एहि ठाम सs बोमडिला बड लग छैक। ६२ में सब सs बेसी लड़ाई बोमडिला में भेल छलैक। बाम दिस जओं हमर नजरि गेल तs नीचा में नदी बहैत छलैक, ओ देखा कs कहलाह " इ नदी देखैत छी, पहाडी नदी रहितो लड़ाई समय में इ पूरा खून सs लाल भs जाइत छलैक। एहि ठामक लोग सब कहैत छैक जे लड़ाई केर बाद इ नदी सs कतेको लाश निकलल छलैक।


बाबुजी जहिना कहने रहथि बोमडिला लग छैक तहिना किछुयैक दूरी गेलाक बाद घर सब नजरि आबय लागल। एकटा झरना आयल आ बाबुजी कहलाह लिय बोमडिला पहुँचि गेलहुँ। जीप झरना सs किछुए आगू आबि कs रूकि गेलैक।

Thursday, April 30, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (नवम कड़ी)

आजु साँझ मे माँ के अरुणाचल जेबाक छैन्ह। हमरा खराप तs लागि रहल अछि मुदा एहि बेर हम कानैत नहि छी। माँ बड उदास छैथ। एक तs हमरे छोरय मे हुनका नीक नहि लागैत छलैन्ह, आ आब तs बिन्नी के सेहो छोरय परि रहल छैन्ह।माँ बिन्नी के हमरा आ काका के कहला पर छोरि कs जा रहल छथि। पन्द्रह दिन सs बिन्नी के बुखार छलैन्ह ठीक तs भs गेलैन्ह मुदा ओ बहुत कमजोर भs गेल छथि। डॉक्टर हुनका लs कs ओतेक दूर जएबाक लेल मना कs देने छथिन्ह । बाबुजी के चिट्ठी आयल छलैन्ह हुनक मोन ख़राब छैन्ह। माँ के किछु नहि फ़ुराइत छलैन्ह जे ओ की करथि। जखैन्ह हम कहलियैन्ह जे अहाँ जाऊ बिन्नी के रहय दियौन्ह तs ओ अरुणाचल जयबाक लेल तैयार भs गेलीह।


निक्की बड ताली छथि हुनका कोनो काज काका स वा दोसर किनको सs करेबाक होयत छैन्ह तs ततेक नय नाटक करय छथि जे लोग के ओ सच बुझा जायत छैक आ हुनका ओ काज करय लेल भेट जाइत छैन्ह। जखैन्ह सs माँ के जेबाक चर्च शुरू भेलैक निक्की माँ सँग जेबाक लेल हल्ला करय लगलीह।काका कतबहु निक्की के बुझेबाक प्रयास केलैथ मुदा ओ नहि मानलिह आ हुनकर नाटक के आगू सब के हुनकर बात मानय परलैन्ह। माँ निक्की के अपना सँग अरुणाचल लs जएबाक लेल तैयार भs गेलीह।


साँझ मे माँ सोनी, अन्नू, छोटू आ निक्की के लs मुजफ्फरपुर चलि गेलीह। इ कहने रहथिन्ह जे मुजफ्फरपुर बस अड्डा आबि जेताह आ ओहि ठाम सs माँ सब के अपन कॉलेज लs जयताह माँ सब भरि दिन कॉलेजक गेस्ट हाउस मे रहि साँझ के अवध आसाम मेल पकरि कs चलि जेतीह। माँ के गेलाक बाद सs घर एकदम सुन भs गेल छलैक। एहि बेर बहुत दिन माँ सँग रहल रहि से आओर खराप लागैत छल। राति मे काका बहुत उदास छलैथ, हुनका निक्की के बिना नीक नहि लागैत छलैन्ह।


आय रबि छैक हमरा कॉलेज नहि जएबाक छलs। भरि दिन प्रयास मे रहि जे बिन्नी के असगर नहि छोरियैन्ह। बेर बेर हुनका दिस देखियैन्ह जे ओ उदास तs नहि छथि। एक तs हमही छोट बिन्नी तs हमरो सs करीब नौ साल छोट छथि मुदा ओ हमरा पकरि मे नहि आबय दैथ जे हुनका माँ के याद अबैत छैन्ह। दिन भरि काका सेहो बिन्नी लग बैसल रहथि आ हुनका हंसेबाक प्रयास करैत रहलाह। राति मे काका कहलाह काल्हि तs अहाँक कॉलेज अछि अहाँ अपन समय पर चलि जायब।


सोम दिन हमर दू टा क्लास होयत छलs आ दुनु भोरे मे छल। हम कॉलेज जाय लगलहुं तs बिन्नी के समझा बुझा देलियैन्ह आ मौसी रहबे करथि। हमर क्लास १० बजे तक छलs, क्लासक बाद हम घर जल्दी जल्दी पहुँच सीधा अपन कोठरी मे गेलहुँ कियाक तs माँ के गेलाक बाद बिन्नी हमरे कोठरी मे हमरे सँग रहैत छलिह। जओं अपन कोठरी मे पहुँचति छी तs बिन्नी आ इ दूनू गोटे बिछाओन पर बैसि कs गप्प करैत आ हँसैत छलाह। हमरा देखैत देरी बिन्नी तुंरत कहय लगलीह, "दीदी निक्की बोमडिला(बोमडिला, अरुणाचल मे छैक) नहि गेलीह। ततेक नय नाटक केलिह जे ठाकुर जी कs पहुँचाबय लेल आबय परलैन्ह"।


साँझ मे काका बड खुश छलथि, निक्की आपस जे आबि गेल रहथि। दोसर दिन इ फेर मुजफ्फरपुर आपस चलि गेलाह।
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