Wednesday, March 25, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (चारिम कड़ी )

चतुर्थी आ दहनयी कs बाद सब गोटे चलि गेलाह। हिनको कॉलेज खुजल छलैन्ह, इहो( हमर घर वाला) मुजफ्फरपुर, अपन कॉलेज चलि गेलाह। आन के गेला पर ओतेक सुन नय लागल, मुदा जहिया इ गेलाह ओहि दिन बड़ सुन लागल। इ कियाक होइत छैक नहि जानि, विवाह होइते कs संग एतेक प्रगाढ़ सम्बन्ध कोना भs जायत छैक जे एक दोसरा सs अलग रहनाइ निक नय लागैत छैक। दादी हिनका सs करार करवा लेलथिन जे मधुश्रावणी में अवश्य अओताह। दादी कs तs हँ कहि देलैथ मुदा हमरा सs कहलैथ ओ नहि आबि सकताह। हमर मोन तs छोट भs गेल मुदा फेर सोचलौं हमर तs क्लास छूटिये रहल अछि हिनकर कियाक छूटैंह। हम कहलियैन्ह किछु नय, ओहि समय में हम हिनकर बात कs हँ वा नय में जवाब दैत रहियैन्ह। ओनाहुं हम कम बाजति रहि, आ हिनका सs तs निक जकां बाजय में हमरा एक साल लागि गेल।


गाम पर बाबा दादी के छोरिकs घर में, हमर माँ बाबुजी आ हम छहु भाय बहिन रहि। ओहि समय में असगरो जे सभ गाम पर रहैत छलाह वा छलिह, किनको इ नय बुझैन्ह जे असगर छथि । आ हमर घर में तs विवाह भेल छलs। रोज भोर साँझ गाम घरक लोकक अयनाइ गेनाइ लागल रहैत छलैक। एक तs अहुना जहिया जहिया हम सब गाम जाइ, लोक सबहक एनाइ गेनाइ लागल रहैत छलैक आ अहि बेर तs हमर विवाह भेल छलs। अहि बेर कनि बिशेष लोकक एनाइ गेनाइ रहैत छलs, आ हमर कनि विशेष मान दान सेहो होइत छलs। कहियो कतो सs खेनाइ आबय कतो सs खोइंछ भरय कs लेल कियो कहय लेल आबथि , सभ कियो एतबा अवश्य कहैथ, ठाकुरजी बड़ जल्दी चलि गेलैथ। दादी सभ कs कहथि फेर जल्दिये अओताह, पंचमी सs मधुश्रावणी धरि रहताह। हुनका सभ कs की बुझल जे ठाकुर जी नय आबि रहल छथि, हम सुनि कs चुप रहि, किनको किछु नय कहियैन्ह, माँ तक कs नय कहने रहि, मुदा जखन हिनकर एनाइ गेनाइ कs गप्प सुनि मोन उदास भs जाय।


हमर जहिया विवाह भेल हम ओहि समय फ्राक या स्कर्ट ब्लाउज पहिरति रहि। अचानक हमरा साड़ी पहिरय परि गेल। जहाँ कियो आबैथ, ख़ास कs मौगी महाल महक तs हमरा बजायल जाय। हमर बहिन सभ दौड़ कs हमरा लग अबैथ कहय कs लेल, ओकर बाद हम जल्दी सs ककरो सs साड़ी ठीक करवाबी आ तखैन्ह हम हुनका सभ लग जाइ। दियादि महक काकी पीसी सभ गोटे में सs बराबरि कियो नय कियो रहैत छलिह, ओ सभ ठीक कs देथि, तइयो कैक बेर हमर पैर साड़ी में फँसल होयत आ हम खसल होयब । जे कियो आबथि एतवा अवश्य कहथि, " देखिये कुसुम केहेन लागति छथि"। आ देखलाक बाद कहथि "बड़ सीरी चढ़ल छैक"। कतेक निश्छल भावना आ कतेक अपनापन रहैत छलैक हुनका लोकनि में।


हमर दु तीन टा पीसी सेहो ओहि समय में ओतहि रहति छलिह, जिनकर सबहक विवाह ओहि बरख भेल छलैन्ह आ ओ सभ हमर संग तुरिया छलिह। भरि दुपहरिया घर भरल रहैत छलs हुनका सभ संग ओहिना समय बीति गेल आ पंचमी आबि गेल। पंचमी सs एक दिन पहिने भोरे भोर हमर सासुर सs भार आयल, ओहि में सब किछु बिधक ओरिओन सs आयल छलs। भरि गामक लोक के दादी हकार दियवा देलथिन, सभ भार देखैक लेल आबथि आ जे देखथि से कहथि, एतेक निक भार किनको ओतहि सs नय आयल छलैक, गाम पर सभ गोटे भार देखि कs बड़ प्रशंसा करथि, हमरा इ सुनि बड़ निक लागय। जिनका हम कहियो देखने सुनने नय हुनकर प्रशंसा सुनि हम खुश होइ। हमर दादी सेहो खुशी सs सबके कहथि अरे महादेव झा ओतय सs भार आयल अछि। हमरा ओहि समय में किछु नय बुझाय, हम सोचि हमर ससुरक नाम तs हीरानंद ठाकुर छैन्ह, दादी बेर बेर कियाक कहैत छथि महादेव झा ओतय सs आयल अछि। हम पुछs चाहि किनको सs मुदा एम्हर ओम्हर में बिसरी जाइ।


कॉलेज सs हमरा इ प्रतिदिन एकटा चिट्ठी लिखैथ, ओहि में सब दिन जवाब देवाक लेल लिखैत छलैथ, मुदा हमारा जवाब देबय में लाज होयत छल।एक दिन हमर भाय आ बाबुजी कोनो काज सs मुजफ्फरपुर जायत छलाह। ओहि दिन हम पहिल चिट्ठी लिखि कs भाय के देलियैन्ह जे हुनका दs देबाक लेल।


पंचमी सs एक दिन पहिनहि भोर में भार आयल छलs, साँझ में बाबुजी सब के सेहो अयबाक छलैन्ह। हमरा अपन संगी आ पीसी सब संगे फूल लोढ़य लेल जयबाक छलs। दादी सब ट्रेन सs हिनकर बाट ताकथि अंत में हमर बहिन सब सs कहि पुछौल्थिन, हम बहिन सब कs कहि देलियैन्ह हमरा किछु नय लिखने छथि। दादी तकर बाद सs निश्चिंत भs गेलिह आ तखनि सs कहथि जे तोहर बाबुजी सब संग अवश्य अओताह।



साँझ में सब घान्जि बांधि कs हमरा ओतहि आयल देखलियय सबहक हाथ में फूल डालि आ पथिया छलैक कियो कियो अपन खबासिनी कs सेहो संग में लs लेने छलथि किछु कुमारि सब सेहो संग में छलथि । हमरो संग हमर एकटा पितिऔत बहिन छलीह, ओ हमर फूल डालि आ पथिया लs लेलथि।हमसब पूरा टोलक सब गोटे गीत गाबति हँसी मजाक करैत अपन अपन फूल डालि पथिया लेने पहिने गाछी दिस गेलौन्ह। दादी हमरा हिदायति देने रहथि, जे बाँस वा अन्य पैघ गाछक पात कियो तोरय, जाहि जूही कs पात आ फूल सभ हम अपने तोड़ी। हमरा बड़ पोल्हा कs कहलथि "हे मधुश्रावणी लोक के एकय बेर होयत छैक जहिना कहैत छी कयने जाउ"। हमहु निक बच्चा जकां मुरी हिला कs हँ कहि देलियनि।


हम सब, सब सs पहिने बंसबट्टी दिस बिदा भेलौंह। बाँसक पात तोरलाक बाद हम सब जाहि जूही आ अन्य अन्य पात आ फुलक खोजि में सबहक बाड़ी बाड़ी जाइ आ सभ तरि सs फूल सभ बटोरति जाइ। हमरा तs बुझलो नय छलs जे कोन - कोन फूल आ कोन-कोन पात चाहि। जेना जेना सभ कियो तोरथि हमहु तोरति जाइ। दादी कs हिदायति हमरा मोन छलs। हम पथिया टा नहि उठा पाबति रहि सेहो हमर पितिऔत बहिन, देयादि महक छलिह से उठा दैथ। जखैन्ह हमरा सभ गोटे कहलथि जे आब भs गेल, हमहु हुनका सभ संगे आपस हेबाक लेल चलि देलियैन्ह। हमरा देखि कs ततेक आश्चर्य भेल, हमसभ एक एक पथिया भरि कs पात जाही जूही लs लेने रहि।



आब ओ हमरा बसक नहि छलैक जे ओ हम उठा कs एको डेग आगू बढितौंह। हमर पितिऔत बहिन ओकरा अपन माथ पर लs कs चललिह। रास्ता भरि हँसी मजाक होइत छलैक, ओही में सs बेसि मजाक हम नहि बुझति रहि। बिच बिच में बटगभनी सेहो होयत छलैक। इहो गप्प होयत छलैक जे किनकर सभहक वर आयल छथि आ किनकर सभहक बाद में अर्थात मधुश्रावणी सs पहिने अओताह। हमारो सs सब पुछथि, हम किछु नय बाजि हमरा लाज होइत छलs। नहि बजला पर सभ हमर आर मजाक उराबथि, हम अहिना दुखी छलौंह ताहि पर इ सभ मजाक करथि। कखनो मोन होयत छल बेकारे सभ संग अयलौन्ह। हमरा होयत छलs हम कहुना घर पहुँची, हम मजाक सs तंग आबि कs अपन बहिन सs जे पथिया लेने रहथि, कहलियैन्ह अपना सब आगु चलु। हम सभ आगु जल्दी जल्दी बढि रहल छलियैक मुदा कथि लेल हमरा कियो जल्दी जाय देत पकरि कs बिच में हमरा सभ गोटे कs लेलथि।


ओहिना करैत हम सब मुखिया बाबा कs घर लग पँहुची गेलौंह। हमर घर ओकर बाद छलैक हम हाथ में फुलक डालि लेने सभ संग बिच में चलति रहि। घर लग पहुँच सभ गोटे जोर जोर सs हंसैथ हमरा इ कहि आगु कs देलथि जे आब हमर दादी देख लितथि तs हुनका सभ कs डाँटि परतैंह। हम आगु आबि जहिना बरामदा दिस बढलौंह देखैत छी कुर्सी पर बाबा आर बाबुजी कs संग इ बैसल छथि आ तिनु गोटे चाय पीबि रहल छथि। हम लाज सs जल्दी-जल्दी आँगन दिस भागि गेलौंह।


आँगन पहुँचि देखैत छि दादी आ माँ व्यस्त छथि। एक तs पाबनि कs ओरियोनि होयत छलैक, दोसर जमाय विवाहक बाद पहिल बेर आयल छलैथ, तेसर समधियोनि सs पाहुन भार लs कs से आयल छलखिन्ह। हमरा देखितहि दादी कहय छथि "यै अहाँ बिना माथ झपने अहिना बाबा आ बाबुजी कs सोंझा सs आबि गेलौंह"। हम किछु नय बजलियैन्ह, हम आ हमर बहिन चुप चाप कोहबर घर जाय कs फुल डालि आ पथिया राखि देलियैक। ओहि समय में हमरा माथ झांपय में बड़ लाज होयत छलs। हम बाहरि आबि कs माँ सs पुछलियैक," बाबुजी मुजफ्फरपुर सs कखैन्ह एलैथ" जकर जवाब दादी सs भेटल, "अहांक बाबुजी कॉलेज सs ठाकुर जी कs पकरि कs लs अनलैथ "।



साँझ में किछु किछु बिधक ओरिओन आ गीत भेलैक आ दादी कहलथि सब गोटे जल्दी सुतय जो भोरे उठय परत। राति में सुतय काल पता नय हमरा कोना मोन छलs, हम हिनका सs पुछलियैन्ह "भार कतय सs आयल छैक "? हिनका किछु बुझय में नय अयलैन्ह, हमरा कहलाह "मतलब... कोन भार"? फेर मुस्कुरैत हमरा कहलाह "अहाँ के हमारा देखि कs खुशी नय भेल जे अहाँ हमारा सs भारक विषय में पुछैत छी "। हम मुरी हिला कs हाँ कहि देलियैन्ह मुदा फेर धीरे सs कहलियैन्ह " दादी सब सs कहति छथि महादेव झा ओतय सs भार आयल छैक। इ सुनतहि जोर सs ठट्ठा कs हँसैथ हमरा कहलाह "ओ.., अच्छा..., ओ महादेव झा, ओ हमर सबहक पाँज़ि अछि ताहि लेल बाजति होयतिह"। तकर बाद हमरा पाँज़ि कs विषय में सेहो बता देलैथ। हमरा अपना पर हँसी लागल कहु तs भोर सs हम इ सोचि कs परेशान छलौंह जे महादेव झा के छथि।

Sunday, March 22, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (तेसर कड़ी)

गामक ओ समय हम कहियो नय बिसरि सकैत छी। ई ओहि समयक गप्प थिक जखैनि कि हमर बहिनक विवाह भs गेल छलैन्ह आ ओ सभ चलि गेल छलिह।हमर बाबूजी आ छोटका काका हमारा लेल वर ताकय लेल गेल छलैथ। आई कालिक हिसाब सs तs हम ओहि समय एकदम बच्चा रहि आ शहर में रहलाक कारणे हम गाम घरक बहुत किछु नहि बुझैत छलौं। सब सs बेसी विवाह बैसाख, जेठ आ आषाढ़ में होयत छैक, अर्थात शुद्ध रहैत छैक। ओहि ज़माना में, अर्थात १९७२ ईस्वी में गामक रौनक किछु और रहैत छलै। प्रतिदिन कतो नय कतो विवाह होयत छलैक जाहि में दादी हमरा लय जयबाक आग्रह अवश्य करैत छलीह। हमहूँ कहियो विवाह नय देखने छलौं, पहिल विवाह हम अपन दीदी (पितिऔत ) कs देखलियैन्ह।


ओही समय में बेसी विवाह सभा सs ठीक भेलहा सब रहैत छलैक जाहि कारणे हरबरी वाला विवाह हमरा देखय कs ओतेक इच्छा नय होयत छल, मुदा दादी केs मोन रखबाक लेल हुनका संग कतो कतो चलि जायत छलौंह। ओहि समय हम परीक्षा फलक प्रतीक्षा में रही आर कोनो काजो तs हमरा नहि छलाह ।


एक दिन हम, माँ आ दादी आंगन में बैसल छलियै कि एकटा खबासनी आयल आ दादी के कहलकैन्ह " मलिकैन कनि एम्हर आयल जाओ "। ई सुनतहि दादी ओकरा लग चलि गेलिह, पता नय ओ हुनका कि कहलकैन्ह। कनि कालक बाद दादी हमरा कहलैथ "चलs हम तोरा एकटा सोलकनि सबहक विवाह देखाबैत छियौक"। हमरा आश्चर्य
भेल जे आई दादी केs की भेलछैन्ह जे ओ हमरा सोलकनि कs विवाह देखय लेल कहैत छथि। हम आश्चर्य सs पुछलियैन्ह "अहाँ सोलकनि कs विवाह देखय लेल जायब "? दादी मुसकैत हमरा कहलैथ "चलहि नय अहि ठाम, ब्रम्ह स्थान लग बरियाती छैक, दूरे सs खाली बरियाती देखि चलि आयब दूनू गोटे"।


हमारा मोन तs नहि होइत छलय बरियाती देखबाकs, मुदा हम दादी कs संग जएबाक जयबाक लेल तैयार भs गेलियैन्ह। ब्रम्ह स्थान लगे छलय, हम दुनु गोटे जखन ओतहि पहुँचलौं तs देखलियय जे ओतहि बीच में पालकी राखल आ ढोल पिपही बाजैत छलैह, जों आगु बढ़लौं तs देखैत छी जे ओहि पालकी में वर मुंह पर रूमाल देने बैसल छैथ आ एकटा बच्चा हुनका आगू में बैसल छलैन्ह, बरियाती सब सेहो बैसल छलैक। खैर हम सब आगू बढिकs बरियाती लग पहुँच गेलिये। हमरा निक भलहि नय लागैत छल मुदा पहिल बेर अहि तरहक बरियाती देखैत रही। हम आश्चर्य सs बरियाती देखैत रही कि कनिये कालक बाद सब बरियाती ठाढ़ भs गेलैथ आ पिपही ढोल जोर स बाजय लगलय। हम सब कनि पाछू भs गेलौं, जहिना पालकी उठलय कि हमरा माथ पर कियो पानी ढ़ारि देने छलs। हम त हक्का बक्का भs कs एम्हर ओम्हर ताकय लगलौं, त देखैत छी दादी कs हाथ में गिलास छलैन्ह। हम कानय लगलियय। ई देखि कs दादी हमरा तुंरत हँसैत कहलैथ गर्मी छलैक ताहि द्वारे ठंढा क देलियौक। हमरा
बड़ तामस भेल।


हम सब जखैन घर पहुँचलौं, हम कानैत माँ सs कहलियय हम कहियो दादी संग विवाह देखैक लेल नय जायब। हमर एकटा पीसी ओहि ठाम बैसल रहैथ, कहि उठलीह, " नय कानि तोहरे निक लेल केलथुन"। हमरा किछु नय बुझय में आयल आ बकलेल जकां हुनकर मुंह देखैत पुछलियैन्ह "कि निक भेल, सभटा कपड़ा भीजि गेल"? ई सुनि कs ओ कहलैथ "गय बरियाती कs जेबा काल पानि माथ पर देला सs लोकक विवाह जल्दि होयत छैक ताहि लेल तोरा पानि देलथुन "। हम आर जलि भुनि कs ओतहि सs चलि गेलौंह। ओकर कनिये दिनक बाद हमर विवाह भs गेल।



जहिया हमर विवाह भेल ओहि समय हमर घरवाला श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर इंजीनियरिंग के अन्तिम बरख में पढैत छलाह। हम मैट्रिक के परीक्षा देने रहि आ परीक्षा फल सेहो निकलि गेल छलs। हमर विवाह आषाढ़ मास में, (दिनांक १३ जुलाई) भेल छलs। विवाहक तुंरत बाद मधुश्रावणी छलैक ताहि द्वारे हम गाम पर रही गेलौं आ हमर काका मधु(हमर पितिऔत बहिन) के संग रांची चलि गेलाह । काका हमरा कहैत गेलाह जे ओ हमर परीक्षा फल आदि स्कूल सs लs कॉलेज में हमर नाम लिखवा देताह। तैं हम निश्चिन्त रही। हमर काका नाम लिखवेलाक बाद हमरा खबरि सेहो कs देलाह। हमर नाम "निर्मला कॉलेज रांची" में लिखायल छल।


दादी के आग्रह पर हमरा गाम पर रहि मधुश्रावनी करवा के छलs, बहिनक विवाह सs अपन विवाह आ मधुश्रावनी धरि करिब दू मास सs बेसी रहय परल छलs। हम पहिल बेर अपना होश में एतेक दिन गाम पर एक संग रहल रहि। ओना तs हम सब, सब साल गाम जायत रही, मुदा एक संग एतेक दिन नय रहैत रहि। ओ पहिल आ अन्तिम बेर छलs जे हम गामक मजा निक जकां लs सकलियैक।

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (दोसर कड़ी)

जाहि दिन हम पन्द्रह बरखक भेलौं ओकर दोसरे दिन हमर विवाह भ गेल। ओहि समय हम विवाहक अर्थ की होइत छैक सेहो नय बुझैत छलियैक। हमत मैट्रिक केर परीक्षा द अपन पितिऔत बहिन केर विवाह देखय लेल गाम गेल रही। हमारा की बुझल छल जे हमरो विवाह भ जायत। ओहि समय हमर बाबूजी अरुणाचल (ओहि समय केर नेफा ) में पदासीन छलाह, हम रांची में अपन छोटका काका लग रहि क पढ़ैत रहि ।


हमर पितिऔत बहिन केर विवाह भेलाक तुरंत बाद हमर बाबूजी आ छोटका काका कत्तो बाहरि चलि गेलाह, कतय गेलाह से हम नय बुझलियैय। हम सब भाई बहिन आ हमर छोटका काका के बड़की बेटी, अर्थात हमर पितिऔत बहिन सेहो हमरा सब संग गाम पर रहि गेलि, कारण हमरा सबहक स्कूल में गर्मी छुट्टी छलैक , हम सब खूब आम खाइ आ खेलाइ। मुदा हम देखि जे हमर दादी हमरा किछु बेसी मानैथ। अचानक एक दिन भोर में जखैन हम उठलौं त देखैत छी जे सब कियो व्यस्त छैथ। हमर दादी सब काज करनिहार सब के डाँटि रहल छलीह, कहैत छलीह " आब समय नय छैक, जल्दी जल्दी काज करय जो"। हमरा किछु नय फ़ुराइत छल जे ई की भ रहल अछि। हमरा देखिते हमर दादी कहलैथ "हे देखियौ, अखैन तक ई त फराके पहिर क घूमि रहल छैथ"। हमरा किछु बूझय में नय आबि रहल छल जे ओ की बजैत छलीह तखैन हमरा ध्यान आयल जे शायद हमर जन्मदिन काल्हि छैक ताहि दुआरे दादी कहैत हेतीह हमरा चिढाबय के लेल।ओ सब दिन कहैत छलीह जे अय बेर जन्मदिन में अहाँ के साड़ी पहिरय पड़त, आ हम चिढ जायत छलिअय। ई सब सोचिते छलौं ताबैत देखलियय जे छोटका काका आंगन दिस आबि रहल छलाह। हुनका संग हमर बाबा सेहो छलाह । ओ दुनु गोटे दलान पर स आबि रहल छलाह , से बाबा के देखला स बुझय में आबि गेल । हुनका सबके देखिते हमर माँ आ दादी दुनु गोटे आगू बढ़ि क हुनकर स्वागत केलैथ, आ माँ के कहैत सुनलियैन्ह "आब कहू जल्दी स लड़का केहेन छथि"। हमरा किछु नय बुझना जाइत छल, ताबैत हमर काका हमरा दिस देखलैथ आ देखिते देरी कहलैथ अरे तोहर बियाह ठीक क क आयल छियो मिठाई खुआ।


हम त एकदम अवाक् रहि गेलौं, हम ओतय स भागि क अपन कोठरी में आबि बैसि क सोचय लगलियै, आब की होयत हम त अपन दोस्त सब के कहि क आयल रहि जे अपन दीदी के बियाह में जा रहल छी , ओ सब की सोचत। हमरा एतबो ज्ञान नही छल जे हम बियाहक विषय में सोचितौं , हमरा चिंता छल जे दोस्त सब चिढायत।खैर, कनि कालक बाद स हमर भाय बहिन सब खुशी खुशी हमरा लग अबैथ, आ सब गोटे खुशी खुशी कहैथ," हम सब नबका कपड़ा पहिरबय"। ओ सब त आर बहुत छोट छोट छलैथ, हमही सबस पैघ छी।


हमर काका जल्दी जल्दी स्नान ध्यानक बाद भोजन क तुरंत चलि गेला, पता चलल जे ओ बरियाती आनय लेल गेलाह। ओहि दिन, दिनभरि सब व्यस्त छलैथ। हम अपन माँ के व्यस्त देखियैन्ह परंच खुश नय लगलीह । भरि गामक लोकक एनाइ गेनाइ लागल छलय। दोसर दिन भोरे हमर बाबूजी अयलाह । हुनका चाय देलाक बाद आ हुनका स गप्प केलाक बाद माँ के हम प्रसन्न देखलियैन्ह। ताबैत धरि हमहू बूझी गेल छलियैय जे आब सत्ते हमर विवाह भ रहल अछि, आ हमरा दोस्त सब सं बात सुनइये पड़त, आ ओ सब चिढायत तकरा स हम नहि बचि सकैत छी। ओहि दिन हमर जन्मदिन सेहो छलैय, साँझ में दादी के मोन रहि गेलैंह आ हमरा साड़ी पहिरय पड़ल।


खैर हमर विवाह बड़ धूम धाम स भेल आ हम तेहेन लोकक जीवन संगनी बनलों जे हमर जीवन धन्य भ गेल।

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी)

सन् १९९६ क गप्प थिक, एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर तs लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जाइत अछि जे नहि, हमरा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन करबाक अछि। 

हम सदिखन अपना के हुनकर शिष्या सहचरी आ नहि जानि कि सब बुझैत रही। हुनक एकोटा रचना एहेन नहि होइत छलैक जाहि केर पूरा होमs सs पहिने हम कैएक बेर नहि सुनैत रही। हम तs हुनक एक-एक रचना के ततेक बेर सुनैत रही जे करीब करीब कंठस्त भs जाइत छल। एक एक संवाद आई धरि ओहिना हमर कान में गूंजैत रहैत अछि। हम तs हुनक सबस पैघ आलोचक, सबस पैघ प्रशंसक रही। अद्भुद कलाकार छलाह, एक कलाकार में एक संग एतेक रास गुण भैरसक नहि होइत छैक। लेखक, निर्देशक, अभिनेता,गीतकार, संगीतकार, सब गुण विद्यमान छलैन्ह। हमारा कि बुझल जे नीक लोकक संग बेसी दिनक नहि होइत छैक। भगवनोके नीक लोकक ओतबे काज होइत छैन्ह जतबा कि मनुष्य के। हम तs भगवान् सs कहियो किछु नहि मांगलियैंह, बस हुनक संग सदा भेंटय. यैह टा कामना छल। मुदा एक टा बात निश्चित अछि, जओं भगवान छैथ आ कहियो भेंटलैथ तs अवश्य पुछ्बैन्ह जे ओ हमारा कोन गल्तिक सजा देलैथ, हम तs कहियो ककरो ख़राब नै चाहलिये।


एतेक कम दिनक संग परंच ओ जे हमरा पर विश्वास केलैंह आ हमारा स्नेह देलैंह शायद हमरा सात जन्मों में नहि भेंट सकैत छल। एखनो जं हम हुनक फोटो के सामने ठाढ़ भs जाइत छी तs बुझाइत अछि जे ओ कहि रहल छथि हम सदिखैन अहाँक संग छी।
चिट्ठाजगत IndiBlogger - The Indian Blogger Community