Wednesday, September 15, 2010

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (पचिसम कड़ी)

लल्लन जी केर बीमारिक किछुए दिन बाद पता चललैक जे प्रभाकर जी (हिनक मित्र श्री पशुपति जी केर सबस छोट भाई ) जे पहिनहिं सँ बीमार छलाह केर किडनी के बीमारी छैन्ह आ हुनका डॉक्टर वेल्लोर लs जेबाक लेल कहि देने रहथिन्ह । ओ सभ जखैन्ह वेल्लोर सs अयलाह तs पता चललैक जे प्रभाकर जी केर दोसर किडनी लगाबय परतैक जाहि में बहुत पाइक काज परतैक । सब चिंतित छलाह मुदा लल्लन जी अपना दिस सs हुनका लोकनि के आश्वासन देलथिन्ह आ अपने बीमार रहितो एकटा नाटक लिखी कs ओकरा सँग सांस्कृतिक कार्यक्रम केर आयोजन करि ओकर टिकट सँ जे पाई जमा भेलैक ओ प्रभाकर जी केर इलाजक लेल राखि देल गेलैक ।


लल्लन जी केर बीमारिक विषय में शायद हमरा सँ बेसी वर्णन नहीं कयल होयत मुदा एतबा जरूर छैक हम आब सोचैत छियैक तs हमारा अपनहि आश्चर्य होइत अछि जे ओहि समय में भगवान पता नहि कोना ओतेक शक्ति देने रहैथ। एक तs हम हुनक बीमारिक विषय में सुनलाक बादो अपन संतुलन बनेने रही , दोसर सब दिन संग में रहितहु हम नहि हुनका आ नहि कहियो दोसर के अपन मानसिक स्थिति केर पता चलय देलियैक । मुदा हमर नींद एकदम चलि गेल, सब राति करवट बदलि कs बिताबैत छलहुँ। कैयेक राति ततेक नहि घबराहट होइत छलs जे हम उठि कs टहलय लागैत छलहुँ । ताहि पर विडम्बना जे नहि हम किनकहु सs लल्लन जी केर बीमारिक विषय में कहने रहियैंह आ नहि कहि सकैत छलियैक ।


डॉक्टर कहनहीं रहथिन्ह जे हड्डी में दर्द होयतैंह ख़ास कs बाँहि में। राति में हम ततेक सम्हारि कs सूती, डर होइत छल जे कहीं चोट नहि लागि जायेन्ह। भरि राति दर्द ठीके होइत छलैन्ह आ हम जौं बिसरियो जाइयैक तs हुनक दर्द से कुहरैत देखि तुरंत मोन परि जाइत छल । हमरा तs जेना आदति भs गेल छल हमेशा एक हाथ हिनक बाँह पर धs कs धीरे धीरे दबाबैत रहैत छलियैक ।


कहबी छैक "डूबते को तिनके का सहारा "। हमरा जहिना कतहु पता लागय जे कोनो नीक डॉक्टर छथि चाहे ओ होम्योपैथी हो व आयुर्वेदी हम कोसिस करी जे लल्लन जी के देखा दियैक । लल्लन जी केर बीमारी के विषय में मात्र बिनोद जी के सबटा बुझल छलैन्ह । हुनाका पता चललैंह जे कोनो होम्योपैथी डॉक्टर बनारस में छैक आ ओ कैंसर तक केर इलाज करैत छैक अपने डॉक्टर आ नीक डॉक्टर रहैत ओ बनारस गेलाह आ हिनका लेल होम्योपैथी दबाई आनलथिन । डॉक्टर कहने छलैक जे एक दम समय पर दबाई देबाक छैक आ हर तीन तीन घंटा पर दबाई देबाक छलैक । हम हर तीन घंटा पर दबाई दियैक आ राति में सेहो घड़ी में अलार्म लगा लगा कs दियैक । ओना तs हमरा नींद नहि होइत छल, मुदा कहीं नींद लागि गेल आ दबाई छूटि नहि जाय से सोचि अलार्म लगा लियैक , मुदा भगवान तहियो नहि सुनलाह। एक दिन पता नहि कोना भोरका पहर ३ बजे दबाई देबाक छल मुदा हमर आंखि लागि गेल आ अलार्म सेहो नहि बाजलैक । भोर में हरबरा कs उठलहुँ आ उठला पर हमरा ततेक अफ़सोस भेल भरि दिन कानैत रही गेलहुँ । नहि भरि दिन खेबाक इच्छा भेल आ नहि कोनो काज में मोन लागय । साँझ में लल्लन जी हमरा बहुत समझेलाह आ कहलाह एक बेर किछु देरी सs दबाई देला सs किछु नहि होयतैक । खैर दबाई तs जतबा डॉक्टर कहने रहैन्ह ततेक पूरा खेलाह आ ओहि दिन केर बाद कोनो दिन एको मिनट देरी सs नहि देलियैन्ह । किछु दिन बाद पता चललैक जे ओ डॉक्टर बेईमान छलैक आ ओ दबाई में steroid मिला कs बेचैत छलैक ।


एक दिन लल्लन जी केर ऑफिस में एक गोटे सँ पता चललैन्ह जे पूना में एकटा बहुत पुरान डॉक्टर छथि ओ एहि बीमारिक इलाज करैत छथि । बस हम सब पूना जएबाक अपन कार्यक्रम बना लेलहुँ । हमर बड़का बेटा पुत्तु, ओहि बेर पूना में नाम लिखेने छलाह ओ अपन सामन लेबय ले आबय वाला छलाह , तय भेलैक जे ओ आबिये रहल छथि हुनके सँग पूना जायल जेतैक ।


हमर सब केर पूना जेबाक तैयारी होइत छलैक एहि बीच में लल्लन जी केर मोन किछु बेसी ख़राब भs गेलैन्ह । जमशेदपुर केर अस्पताल में भरती भेलाह । पता चलैक जे फेर खून बहुत कम छलैन्ह , डॉक्टर खून चढेबा लेल कहलैंह आ विचार विमर्श के बाद भेलैक जे एहि बेर टाटा मेमोरिअल refer कs रहल छैन्ह कियैक तs ओहि ठाम डॉक्टर अडवानी छथि जे कि भारत केर सब सँ नीक oncologist छलैथ । डॉक्टर सब अस्पताल सँ छोरय समय refer कs देलथिन्ह । आब हम सब तय केलियैक जे बम्बई तक पुत्तु सँग हम सब जायब आ ओहि ठाम देखेलाक बाद पूना सेहो जायब । पुत्तु के सेहो देखि लेबैन्ह कोना रहैत छथि आ पूना वाला डॉक्टर सs सेहो देखा लेबैक। ओना तs कहल गेल छैक जाबैत साँस ताबैत आस..... मुदा वेल्लोर में डॉक्टर के हमरा सोंझा हिनकर बिमारी केर विषय में कहलाक बावजूदो हमरा एको रत्ती ई विश्वास नहीं छलs जे हिनका एहि तरहक बिमारी होयतैंह । एहेन नीक लोक के सेहो एहि तरहक बीमारी आ कष्ट लिखल छैक से हमरा विश्वास नहीं छलs । आ ताहि चलते जहिना टी एम एच केर डॉक्टर हिनका बम्बई  लs जएबाक विषय में कहलैथ तs हमरा ओ सुझाव नीक लागल आ तुरन्त बम्बई अयबाक लेल तैयार भs गेल रही . मोन में होइत छल कहीं बम्बई में हिनक इलाज संभव हो। लोक सब सs पता से लागल छल जे oncology में डॉ. अडवानी के जवाब नहीं छैक । खैर , आस पर दुनिया टिकल छैक हम सब बम्बई अयलहुं आ जाहि दिन डॉक्टर अडवानी के देखाबय के लेल टाटा मेमोरिअल जाइ छलहुँ मोन में एकटा नब आशंका छल ....कखनो बुझाइत छल एहि ठाम देखेलाक बाद इ अवश्य नीक भ जेताह । कखनो सिनेमा के ओ दृश्य आँखिक सोंझाँ में आबि जायत छल जाहि में सीधा एम्बुलेंस सs अभिनेता के टी एम एच लs जायल जाइत छैक आ ओ ओहि ठाम स घर आपस नहीं आबि पाबैत छथि, कैयेक टा सिनेमा में देखने छलियैक से मोन में जेना एकटा आदंक पैसल छल ।


भरि राति हम सुति नहि पयलहुं भोर में  डॉक्टर अडवानी सँ देखेबाक लेल अस्पताल पहुँचि गेलहुँ । पता नहि कियैक हमर मोन भीतर सँ कानैत छल मुदा बाहर सs प्रकट तs नहि होमय दैत छलियैक। किछु प्रतीक्षाक बाद हमर सबहक डॉक्टर अडवानी लग जएबाक बारी आयल आ हम सब डॉक्टर आडवाणी के कक्ष में पहुँचि गेलहुँ। सब रिपोर्ट देखलाक बाद ओहो किछु जांच केर आदेश देलाह आ रिपोर्ट लs अयबाक आदेश देलाह । ओहि दिन आ ओकर दोसर दिन सब जांच करेलाक बाद डॉक्टर अडवानी लग जयबाक छलैक । डॉक्टर अडवानी लग जाहि दिन जायत छलहुँ ओहि दिन हमर मोन आओर भारी लागैत छल एक अन्जान दुखक संकेत छल बुझि परैत अछि। पचास तरह केर आशंका सs मोन विचलित छल।  खैर डॉक्टर अडवानी देखलाह मुदा ओ हिनक रिपोर्ट सs संतुष्ट नहि छलाह। हुनका हिसाबे दवाई ठीके चलैत छलैक मुदा ओहि हिसाबे ओकर प्रतिक्रया नहि छलैक वा कहि सकैत छियैक जे बिमारी में सुधार नहि छलैक, जे नीक नहि छलैक। ओ किछु आओर दवाई देलाह आ छौ मास बाद आबय के लेल कहलाह ।


खैर हम सब डॉक्टर सs देखा पूना चलि गेलहुँ आ दोसर दिन भोर में डॉक्टर केर पता लs खोजय निकललहुँ । पता जे छल ताहि पर पहुँचि तs गेलहुँ आ डॉक्टर अपनहि निकलल मुदा ओकर व्यवहार आ बात करय के ढंग तेहेन छलैक जे बुझायल जेना हम सब भिखमंगा होइ । ओ हमरा सब के एकटा पता बतेलैथ आ इ कहि भगा देलैथ जे ओहि ठाम जाऊ मरीजक इलाज ओहि ठाम होइत छैक इ हमर घर अछि । खैर हम सब खोजैत पहुँचि तs गेलहुँ, ओहि ठाम डॉक्टर बहुत समय रुकलाक बाद भेंटलथि आ इहो पता चलल जे असल में डॉक्टर ओ व्यक्ति छलाह जिनका ओहि ठाम हम सब पहिने गेल छलहुँ आ पहिने ओ घर पर देखय छलाह । इ हुनक एकटा सहायक डॉक्टर छथिन्ह । खैर लल्लन जी एकदम देखाबय लेल तैयार नहि छलाह तथापि हम हुनका मना कs देखाबय लेल तैयार केलियैंह । जखैन्ह डॉक्टर सs पुछलियैन्ह जे कतेक समय लागत तs ओ इम्हर उम्हर करैत छल आ मात्र एतबा कहलैथ बैठिये अभी समय लगेगा आ सब किछु संदेहास्पद बुझाइत छल । लल्लन जी इशारा दs हमरा अपना दिस बजेलाह आ कहलाह चलु हम एहि ठाम नहि देखायब । हम कतबहु कहलियैन्ह नहि मनलाह आ हम सब बिना देखेनहि वापस भs गेलहुँ ।

क्रमशः .............

Monday, September 6, 2010

मैथिली हाइकु : शिष्य देखल

"शिष्य देखल "

विद्वान छथि  
ओ शिष्य कहाबथि  
छथि विनम्र 

गुरु हुनक 
सौभाग्य हमर ई 
ओ भेंटलथि

इच्छा हुनक 
बनल छी माध्यम
तरि जायब 

भरोस छैन्ह 
छी हमर प्रयास
परिणाम की ?

भाषा प्रेमक 
नहि उदाहरण 
छथि व्यक्तित्व 

छैन्ह उद्गार
देखल उपासक  
नहि उपमा 

कहथि नहि
विवेकपूर्ण छथि 
उत्तम लोक  

सामर्थ्य छैन्ह 
प्रोत्साहन अद्भुत 
हुलसगर

प्रयास करि 
उत्तम फल भेंटs 
तs कोन हानि 

सेवा करथि 
गंगाक उपासक 
छथि सलिल 

- कुसुम ठाकुर -





Saturday, July 31, 2010

मैथिली विरोधी !!


बिहारक चुनाव जँ जँ लग आयल जा रहल अछि सरगर्मी बढी रहल अछि ......कथिक सरगर्मी से तs हम आ समूचा देशक लोक बूझि रहल छथि. नेतागण आरोप प्रत्यारोप एक दोसर पर तेना लगा रहल छथि जेना आशीर्वाद  हो . लेखा जोखा भs रहल अछि मुदा अपन कार्यक नहि....दोसर नेता की नहि केलाह ताहि केर . जनता केर बुझाबय के प्रयास में कोनो तरहक कोताही कियैक छोड़ताह . सूतल नेता सब जागि गेलाह अछि . अपन भरि कार्यकाल मद में मस्त छलथि, बटोरय सs फुर्सत कहाँ छलैन्ह जे ओ सब जनताक सुख दुःख के विषय में सोचितथि.

आब जाहि पर नोन मिरचाई छिरकने छलाह ताहि लहरि केर कम करबाक प्रयास केनाई तs उचिते. जाहि प्रमंडल केर नाम मात्र उगाही करबाक प्रयोजन के लेल भेल होयतैंह ताहि ठाम जा अपन उपस्थिति दर्ज तs करबे करताह..... आ.. वाह रे जनता.

 आजु कतहु हम पढ़य छलहुँ जे कोनो कांग्रेसी नेताक बयान छलैन्ह "नितीश जी मैथिली विरोधी छथि .......चुनाव लग आबि देखि नितीश जी के मैथिली आ विद्यापति याद आबि गेलैन्ह. यदि ई नहि तs मैथिली के सिलेबस सs कियैक हटेलाह". हम ओहि नेता सँ सहमति छी..... नितीश जी मैथिली विरोधी छथि ......ओ मात्र चुनाव लग देखि इ सब देखेबाक लेल कs रहल छथि ........जनता केर अपना पक्ष में करबाक लेल कs रहल छथि. मुदा ओ कांग्रेसी नेता की इ बिसरि गेलाह जे आजु मैथिली भाषाक इ दशा ख़ास कs बिहार में कियैक छैक ? काग्रेसी नेता के जँ मैथिली सँ प्रेम रहितियेंह तs आजु मैथिली बिहारक द्वितीय भाषा रहितियैक . मुदा ओहि समय में मुख्यमंत्री जी वोट लेल मैथिली केर बलि देने छलाह आ आजु नितीश जी के वोटक लेल मैथिली आ विद्यापति के याद आबि गेलैन्ह तs एहि में कोन पैघ गप्प भs गेलैक.

मैथिली आ विद्यापति जहिना नितीश जी के लेल हथियार छैन्ह तहिना ओहि समय में पदासीन मुख्यमंत्री जी के लेल छलैन्ह आ जे मंत्री आजु नितीश जी पर आरोप लगा रहल छथि हुनको लेल . सब अपन अपन स्वार्थ मात्र के लेल . चाहे ओ नितीश जी होइथ वा कोनो आओर नेता ........चाहे ओ हुनका मैथिली सs प्रेम होउक वा नहि होउक ताहि सs की .

मुदा इ सोचनीय विषय अवशय अछि जे लुप्त भेल जारहल एहि समृद्ध भाषा केर कोना बचायल जाय? जाहि भाषा आ विद्वानक प्रतिष्ठा सौंसे अछि जाहि भाषाक अपन व्याकरण अछि अपन इतिहास अछि ओकरा कोना बचायल जाय ? की हमारा लोकनिक कोनो कर्त्तव्य नहि.......मात्र नेता के कोसैत रहि आ हाथ पर हाथ धरि बैसल रहि ?

लुप्त कहला पर किछु लोक केर आपत्ति होयतैंह ......इ हम जानैत छी ....मुदा हमारा हिसाबे मैथिली लुप्त प्राय जेना छैक. कियैक नहि ओकरा अष्ठम सूची में स्थान भेट गेल हो.

Friday, June 25, 2010

मैथिली हाइकु : एक प्रयास

" मैथिली हाइकु : एक प्रयास "

हाइकु छैक  
विधा सरल तैयो
रचि ज्यों पाबि  

हमरा लेल 
गर्वक गप्प बस 
हमहू  जानि 

नहि बुझल 
इ विधाक लिखब
कोन आखर 

सलिल जीक 
इ मार्ग प्रदर्शन 
भेटल जानी 

मोन प्रसन्न 
भेटल नव विधा 
छी तैयो शिष्या

डेग बढ़ल 
सोचि नहि छोरब  
ज्यों दी आशीष 

- कुसुम ठाकुर -

Sunday, May 23, 2010

हमर पहिल हाइकु


  संस्कृत साहित्य में सहस्त्रों वर्षों पूर्व त्रिपदिक छंद रचे गए जिनमें गायत्री तथा ककुप प्रसिद्ध हैं. हाइकु मूलतः त्रिपदिक (तीन पदों अर्थात पंक्तियों का ) जापानी छंद है. जापान में इस छंद में प्राकृतिक छटा का वर्णन करने की परंपरा है किन्तु हिन्दी में हाइकु किसी विशेष विषय तक सीमित नहीं है. गीता का हाइकु में अनुवाद हुआ है. हाइकु गीत और ग़ज़ल लिखे गए हैं. हाइकु में खंड काव्य भी है. हाइकु में पंक्तियाँ केवल ३ होती हैं. पहली पंक्ति में ५ अक्षर होते हैं, दूसरी पंक्ति में ७ तथा तीसरी पंक्ति में ५ अक्षर होते हैं.  मूलतः  तो संस्कृत की देन है जो जापान जाकर फिर नया रूप लेकर भारत में आयी कविन्द्र रविन्द्र नाथ जी तथा कुछ अन्य कवि इसे जापान से भारत में लाये तथा इसमें लिखा.हाइकु में अक्षर या वर्ण गिनते  समय लघु या दीर्घ  मात्र में अंतर न कर दोनों को एक माना जाता है. संयुक्त अक्षर (क्त, द्य, क्ष आदि) भी एक ही गिने जाते हैं. जापान में कई अन्य त्रिपदी छंद स्नैर्यु आदि भी हैं.


हाइकु के शिल्प के सम्बन्ध में एक बात और: हाइकु में पदों की तुक के बारे में पूरी छूट है. तुक मिलाना जरूरी नहीं है. हिन्दी कविता में सरसता तथा गेयताजनित माधुर्य की परंपरा है, किन्तु केवल समर्थ कवि ही तुक में लिख पाते हैं.


इस दृष्टि से हाइकु के ५ प्रकार हो सकते हैं: १. तुक विहीन, २. पहले-दूसरे पद की तुक समान हो, ३. पहले-तीसरे पद की तुक समान हो, ४. दूसरे-तीसरे पद की तुक समान हो, ५. तीनों पदों की तुक समान हो.

इ हमर पहिल हाइकु अछि जाहि केर श्रेय आचार्य श्री संजीव वर्मा"सलिल" के जाइत छैन्ह . हुनके प्रोत्साहन पर आइ हम अपन पहिल हाइकु लिखलहुं  अछि .

"अहिंक धीया "

आस बनल 
अछि अहाँक अम्बे
हम टूगर

ध्यान धरब
हम कोना आ नहि
सूझे तइयो 

पाप बहुत 
हम कयने छी हे 
अहिंक धीया

जायब कत
आब नहि सूझय
करू उद्धार 

- कुसुम ठाकुर-
  


Sunday, May 9, 2010

अलग राज्यक माँग कतेक सार्थक !!

ओना तs हमर स्वभाव अछि हम नहि लोक के उपदेश दैत छियैक आ नहि अपन मोनक भावना लोकक सोझां में प्रकट होमय दैत छियैक । हम सुनय सबकेर छियैक मुदा हमरा मोन में जे ठीक बुझाइत अछि ओतबा धरि करैत छियैक। एकर परिणाम इ होइत अछि जे हमरा सलाह देबय वाला केर कमी नहि छैक। सब के होइत छैन्ह जे ओ जे कहताह कहतिह से हम अवश्य मानि लेबैन्ह।अपन अपन भावना केर हमरा पर थोपय के कोशिश बहुत लोक करय छथि। परोपदेश देनाइयो आसान होइत छैक । मुदा हमर भलाई केर विषय में के सोचि रहल छथि इ ज्ञान तs हमरा अछि ।  मुदा दोसराक विचार सुनालाक किछु फायदा सेहो छैक। लोकक विचार सुनि अपन विचार व्यक्त करय में आसानी होइत छैक आ आत्म विशवास सेहो बढैत छैक।  


एकटा कहबी छैक "कोठा चढ़ी चढ़ी देखा सब घर एकहि लेखा " सब ठाम कमो बेसी एके स्थिति छैक, मुदा दोसरा केर विषय में कम बुझय में, आ देरी सs बुझय में आबैत छैक, अपन तs लोक के सबटा बुझल रहैत छैक। पारिवारिक हो सामाजिक हो वा देशक, सब ठाम आपस में विचार में मतान्तर होइत रहैत छैक जे कि मनुष्य मात्र के लेल स्वाभाविक छैक आ हेबाक सेहो चाहि । जखैन्ह दस लोकक विचार होइत छैक तs ओहि में किछु नीक किछु अधलाह सेहो विचार सोंझा में आबैत छैक। मुदा आजु काल्हि सब ठाम स्वार्थ सर्वोपरि भs जाइत छैक । लोक के लेल देश समाज सs ऊपर अपन स्वार्थ भs गेल छैक। 


संस्था व न्यास केर स्थापना होइत छैक समाज आ संस्कृति केर उत्थानक लेल । मुदा संस्थाक स्थापना भेलैक नहि कि ओहि संस्थाक मुखिया पद आ कार्यकारणी में सम्मिलित होयबाक लेल राजनीति शुरू भs जाइत छैक । एकटा संस्था में कैयैक टा गुट बनि जाइत छैक । आ ओहि में सदस्य ततेक नहि व्यस्त भs जाइत छथि कि हुनका लोकनि के सामाजिक कार्य आ संस्कृति के विषय में सोचबाक फुर्सते कहाँ रहैत छैन्ह । आ ताहू सs जौं बेसी भेलैक आ बुझि जाय छथि जे आब हुनक ओहि ठाम चलय वाला नहि छैन्ह तs एक टा नव संस्था केर स्थापना कs लैत छथि। सामाजिक कार्य केर नाम पर  साल में एकटा वा दू टा सांस्कृतिक कार्यक्रम कs लैत छथि आ बुझैत छथि समाज केर उद्धार कs रहल छथि । ओहि कार्यक्रम में पैघ पैघ हस्ती , नेता के बजा अपन डंका बजा लैत छथि।बाकि साल भरि गुट बाजी आ साबित करय में बिता दैत छथि जे हुनक कार्यकाल में कार्यक्रम बेसी नीक भेलैक। हम मानय छियैक जे कार्यक्रम अपन संस्कृति केर आइना होइत छैक, मुदा ओ तs स्थानीय कलाकार के मौक़ा दs कs सेहो करवायल जा सकैत छैक। इ कोन समाजक उत्थान भेलैक जे लोक सs मांगि कs कोष जमा कैल जाय आ मात्र कार्यक्रम में खर्च कs देल जाय। बहुतो एहेन बच्चा शहर वा गाम में छथि जे मेधावी रहितो पाई के अभाव में आगू नहि पढि पाबय छथि। दवाई केर अभाव में कतेक लोकक जान नहि बचा पाबय वाला परिवारक मददि केनाई समाजक उद्धार नहि भेलैक? आय काल्हि तs लाखक लाख खर्च करि कs एकटा कार्यक्रम कैल जाइत छैक। कहय लेल हम ओहि महान हस्ती केर पर्व मना रहल छी। कार्यक्रम करू मुदा कि अपन गाम शहर के भूखल के खाना खुआ तृप्त कs ओहि महान हस्ती के श्रद्धाँजलि नहि देल जा सकैत छैक। इ तs मात्र एक दू टा समाज के सहायतार्थ काज भेलैक ओहेन कैयैक टा सामाजिक काज छैक जे कैल जा सकय छैक । यदि सच में लोक के अपन समाज आ संस्कृति सs लगाव छैन्ह तs जतेक कम संस्था रहतैक ततेक नीक काज आ समाजक उत्थान होयतैक। ओहि लेल मोन में भावनाक काज छैक नहि कि दस टा संस्थाक ।


देश में नित्य नव नव राज्यक माँग भs रहल अछि। ओहि में मिथिलांचलक माँग सेहो छैक। हमरा सँ सेहो बहुत लोक पूछय छथि "अहाँ मिथिला राज्य अलग हेबाक के पक्ष में छी कि नहि "? हम एकहि टा सवाल हुनका लोकनि सँ पूछय छियैंह "कि राज्य अलग भेला सँ मिथिलाक उत्थान भs जेतैक "? इ सुनतहि सब के होइत छैन्ह हम मैथिल आ मिथिलाक शुभ चिन्तक नहीं छी। बुझाई छैन्ह जे अलग राज्य बनि गेला सँ मिथिलांचलक काया पलट भs जेतैक । एक गोटे जे अपना के मिथिला के लेल समर्पित कहय छथि, साफ़ कहलाह "मैथिल के मोन में मिथिला के लेल जे प्रेम हेतैक से दोसरा के  नहि" । हमर हुनका सँ एकटा प्रश्न छल "कि पहिने बिहार में मैथिल मुख्य मंत्री, मंत्री नहि भेल छथि "? जवाब भेंटल " ओ सब मैथिल छलथि मिथिलाक नहि"। अलग राज्य भेलाक बाद जे कीयो मुख्य मंत्री होयताह ओ मिथिलाक होयताह आ मात्र मिथिला के लेल सोचताह । 

हमरा इ बुझय में नहि आबैत अछि जे लोकक  मानसिकता के कोना बदलल जा सकैत छैक ? एखैंह ओ दरभंगा के छथि , ओ सहरसा के .....ओ मुंगेर के छथि ....कि  अलग राज्य भेला सँ आदमी केर मानसिकता बदलि जेतैक .....कि दरभंगा , सहरसा आ कि मुंगेर वाला भेद भाव मोन में नहि औतेक ? आ जौं इ भेद भावना रहतैक तs सम्पूर्ण राज्यक विकास कोनाक भs सकैत छैक  ? कि मिथिलाक होइतो ओ सम्पूर्ण मिथिला केर विषय में सोचताह ?


छोट  छोट राज्य नीक होइत छैक , ओकर पक्ष में हमहू छी मुदा बिना राज्यक बंटवारा केने सेहो बहुत काज कैयल जा सकैत छैक, जौं करय चाहि तs । ओना सब अपन स्वार्थ सिद्धि में लागल रहय छथि इ अलग गप्प छैक। कि नीक स्कूल कॉलेज कारखाना के लेल बिना राज्य अलग बनने प्रयास नहि कैयल जा सकैत छैक? कि मात्र मिथिला राज्य बनि गेला सँ मिथिलाक उद्धार भs जयतैक ? मिथिला राज्यक अलग हो ताहि आन्दोलन में अनेको लोक सक्रीय छथि , मुदा हुनका लोकनि सs एकटा प्रश्न .......ओ सब आत्मा सs पुछथि कि ओ सब मात्र राज्य आ समाज के लेल सोचय छथि कि हुनका लोकनि के मोन में लेस मात्र स्वार्थक भावना नहि छैन्ह ?


कैयैक टा राज्य अलग भेलैक अछि मुदा बेसी केर स्थिति पहिने सs बेसी खराब भs गेल छैक, झारखण्ड ओकर उदाहरण अछि । खनिज संपदा सँ संपन्न राज्यक स्थिति बिहार सs अलग भेलाक बाद आओर खराब भs गेल छैक। एहि राज्य में नौ साल के भीतर सात टा मुख्यमंत्री बनि चुकल छथि । लोक के उम्मीद छलैक जे १० साल के भीतर एहि राज्य केर उन्नति भs जयतैक। उन्नति भेलैक अछि, मुदा राज्य केर नहि नेता सब केर । चोर उचक्का खूनि  सब नेता भs गेल छथि आ पैघ सs पैघ गाड़ी में घुमि रहल छथि , देश आ जनता केर संपत्ति केर उपभोग कs रहल छथि इ कि उन्नति नहि छैक ? 
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