Thursday, April 30, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (नवम कड़ी)

आजु साँझ मे माँ के अरुणाचल जेबाक छैन्ह। हमरा खराप तs लागि रहल अछि मुदा एहि बेर हम कानैत नहि छी। माँ बड उदास छैथ। एक तs हमरे छोरय मे हुनका नीक नहि लागैत छलैन्ह, आ आब तs बिन्नी के सेहो छोरय परि रहल छैन्ह।माँ बिन्नी के हमरा आ काका के कहला पर छोरि कs जा रहल छथि। पन्द्रह दिन सs बिन्नी के बुखार छलैन्ह ठीक तs भs गेलैन्ह मुदा ओ बहुत कमजोर भs गेल छथि। डॉक्टर हुनका लs कs ओतेक दूर जएबाक लेल मना कs देने छथिन्ह । बाबुजी के चिट्ठी आयल छलैन्ह हुनक मोन ख़राब छैन्ह। माँ के किछु नहि फ़ुराइत छलैन्ह जे ओ की करथि। जखैन्ह हम कहलियैन्ह जे अहाँ जाऊ बिन्नी के रहय दियौन्ह तs ओ अरुणाचल जयबाक लेल तैयार भs गेलीह।


निक्की बड ताली छथि हुनका कोनो काज काका स वा दोसर किनको सs करेबाक होयत छैन्ह तs ततेक नय नाटक करय छथि जे लोग के ओ सच बुझा जायत छैक आ हुनका ओ काज करय लेल भेट जाइत छैन्ह। जखैन्ह सs माँ के जेबाक चर्च शुरू भेलैक निक्की माँ सँग जेबाक लेल हल्ला करय लगलीह।काका कतबहु निक्की के बुझेबाक प्रयास केलैथ मुदा ओ नहि मानलिह आ हुनकर नाटक के आगू सब के हुनकर बात मानय परलैन्ह। माँ निक्की के अपना सँग अरुणाचल लs जएबाक लेल तैयार भs गेलीह।


साँझ मे माँ सोनी, अन्नू, छोटू आ निक्की के लs मुजफ्फरपुर चलि गेलीह। इ कहने रहथिन्ह जे मुजफ्फरपुर बस अड्डा आबि जेताह आ ओहि ठाम सs माँ सब के अपन कॉलेज लs जयताह माँ सब भरि दिन कॉलेजक गेस्ट हाउस मे रहि साँझ के अवध आसाम मेल पकरि कs चलि जेतीह। माँ के गेलाक बाद सs घर एकदम सुन भs गेल छलैक। एहि बेर बहुत दिन माँ सँग रहल रहि से आओर खराप लागैत छल। राति मे काका बहुत उदास छलैथ, हुनका निक्की के बिना नीक नहि लागैत छलैन्ह।


आय रबि छैक हमरा कॉलेज नहि जएबाक छलs। भरि दिन प्रयास मे रहि जे बिन्नी के असगर नहि छोरियैन्ह। बेर बेर हुनका दिस देखियैन्ह जे ओ उदास तs नहि छथि। एक तs हमही छोट बिन्नी तs हमरो सs करीब नौ साल छोट छथि मुदा ओ हमरा पकरि मे नहि आबय दैथ जे हुनका माँ के याद अबैत छैन्ह। दिन भरि काका सेहो बिन्नी लग बैसल रहथि आ हुनका हंसेबाक प्रयास करैत रहलाह। राति मे काका कहलाह काल्हि तs अहाँक कॉलेज अछि अहाँ अपन समय पर चलि जायब।


सोम दिन हमर दू टा क्लास होयत छलs आ दुनु भोरे मे छल। हम कॉलेज जाय लगलहुं तs बिन्नी के समझा बुझा देलियैन्ह आ मौसी रहबे करथि। हमर क्लास १० बजे तक छलs, क्लासक बाद हम घर जल्दी जल्दी पहुँच सीधा अपन कोठरी मे गेलहुँ कियाक तs माँ के गेलाक बाद बिन्नी हमरे कोठरी मे हमरे सँग रहैत छलिह। जओं अपन कोठरी मे पहुँचति छी तs बिन्नी आ इ दूनू गोटे बिछाओन पर बैसि कs गप्प करैत आ हँसैत छलाह। हमरा देखैत देरी बिन्नी तुंरत कहय लगलीह, "दीदी निक्की बोमडिला(बोमडिला, अरुणाचल मे छैक) नहि गेलीह। ततेक नय नाटक केलिह जे ठाकुर जी कs पहुँचाबय लेल आबय परलैन्ह"।


साँझ मे काका बड खुश छलथि, निक्की आपस जे आबि गेल रहथि। दोसर दिन इ फेर मुजफ्फरपुर आपस चलि गेलाह।

Monday, April 27, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(आठम कड़ी)

साँझ मे हम चाह लs कs जखैन्ह घर मे घुसलहुं तs इ आराम करैत छलाह मुदा हमरा देखैत देरी उठि कs केबार बंद कs लेलथि आ हमरा लग आबि बैसैत कहलाह "अहाँ सs हमरा किछु आवश्यक गप्प करबाक अछि"। हम किछु बजलियैन्ह नहि मुदा मोन मे पचास तरहक प्रश्न उठैत छलs। चाह पीबि कप राखैत कहलाह "अहाँ सच मे बड़ सुध छी, अहाँ हमर बुची दाई छी"। हम तखनहु किछु नहि बुझलियैन्ह आ नय किछु बजलियैन्ह, मोने मोन सोचलहुं इ बुची दाई के छथि। हम सोचिते रही जे हिनका सs पुछैत छियैन्ह, इ बुची दाई के छथि ताबैत धरि इ उठि कs एकटा कागज लs हमरा लग बैसि रहलाह। हमरा सs पुछलाह हरिमोहन झा कs नाम सुनने छी? हम सीधे मुडी हिला कs नहि कहि देलियैन्ह, ठीके हमरा नहि बुझल छलs। ठीक छैक हम अहाँ के बुची दाई आ हरी मोहन झाक विषय में दोसर दिन बतायब। पहिने इ कहू, अहाँ के तs हमरा देखि कs खुशी आ आशचर्य दूनू भेल होयत। हिनका देखि कs हमरा खुशी आ आश्चर्य तs ठीके भेल छलs मुदा हिनका कोना कहितियैन्ह हमरा कहय में लाज होयत छलs, तथापि पुछि देलथि तs मुडी हिला कs हाँ कहि देलियैन्ह। इ अपन हाथ महक कागज़ हमरा दिस आगू करैत कहलाह, इ अहाँ के लेल हम किछु सम्बोधानक शब्द लिखने छी, अहाँ के अहि मे सs जे नीक लागय वा अहाँ जे संबोधन करय चाहि लिखी सकैत छी, मुदा आब चिट्ठी अवश्य लिखब। कोनो तरहक लाज, संकोच करबाक आवश्यकता नहि अछि। बादक गप्प के कहय हम तs इ सुनतहि लाज सs गरि गेलहुँ। हम सोचय लगलहुं हिनका हमर मोनक सबटा गप्प कोना बुझल भs जायत छैन्ह। थोरबे काल बाद इ हमरा अपनहि कहय लगलाह हम अहाँक किताब देखैत छलहुँ तs ओहि मे सs हमरा ओ चिट्ठी भेटल जे अहाँ हमरा लिखने छलहुँ। ओहि मे अहाँ हमरा संबोधन तs नहि कयने छी मुदा ओ हमरे लेल लिखल गेल अछि से हम बुझि गेलहुँ। कोनो कारण वश अहाँ नहि पठा सकल होयब इ सोचि हम पढि लेलहुँ। पढ़ला पर दू टा बात बुझय मे आयल, पहिल इ जे अहाँक मोन एकदम सुध आ निश्छल अछि, आ दोसर इ जे अहाँ मोन सs चाहैत छलहुँ जे हम आबि, आ देखू हम पहुँची गेलहुँ। अहाँ हमरा चिट्ठी एहि द्वारे नहि लिखी पाबैत छी नय जे अहाँ के सम्बोधनक शब्द नहि बुझल अछि, कोनो बात नहि।एहि मे लाजक कोनो बात नहि छैक, अहाँ के जे किछु बुझय मे नहि आबय आजु सs ओ अहाँ हमरा सs बिना संकोच कयने पुछि सकैत छी। ओहि दिन नहि जानि कियाक, हमरा बुझायल जे बेकारे लोक के घर वाला सs डर होयत छैक। पहिल बेर हुनक जीवन मे हमर महत्व आ स्थान केर आभास भेल आ हमरा मोन मे संकोचक जे देबार छलs से ओहि दिन पूर्ण रूपेण हटि गेल। नहि जानि कियाक, बुझायल जेना एहि दुनिया में हमरा सब सs बेसी बुझय वाला व्यक्ति भेंट गेलैथ।


जाहि दिन हमर विवाह भेल छलs ओहि समय हमर बडकी दियादिन केर सेहो द्विरागमन नहि भेल छलैन्ह। आ ओ राँची अपन नैहर मे छलिह। दोसर दिन साँझ मे इ कहलाह जे काल्हि भौजी सs भेंट करय लेल जयबाक अछि आ ओकर बाद परसु मुजफ्फरपुर चलि जायब। आजु चलु राँची(राँची केर मुख्य बाज़ार मेन रोड के लोग राँची कहैत छैक) दुनु गोटे घूमि कs अबैत छी। बरसातक मास आ बादल सेहो लागल छलैक तथापि हम सब निकलि गेलहुँ। रिक्शा किछुएक दूर आगू गेला पर भेंट गेल। घर सs मेन रोड जयबा मे करीब आधा घंटा लागैत छलैक। हम सब आगू बढ़लहुं ओकर १५ मिनट केर बाद सs पानि भेनाइ आरम्भ भs गेलैक। विष्णु सिनेमा हॉल सs किछु पहिनहि हम दूनू गोटे पूरा भीजि गेलहुँ। सिनेमा हॉल लग पहुँची इ कहलाह, भीजि गयबे केलहुं,चलू सिनेमा देखि लैत छी तs आपस घर जायब, कपड़ा सिनेमा हॉल में सुखा जायत।


राति में अचानक माथक दर्द आ प्यास सs नींद खुजि गेल, बुझायल जेना हमर देह सेहो गरम अछि। उठि कs पानि पीबि फेर सुति गेलहुँ। भोर में मोन ठीक नहि लागैत छलs मुदा हम किनको सs किछु कहलियैन्ह नहि, भेल कहबैक तs बेकार में सब के चिंता भs जयतैन्ह। मोन बेसी खराब लागल तs जा कs सुति रहलहुं। जखैन्ह आँखि खुजल तs देखैत छी डॉक्टर हमरा सोंझा मे अपन आला लेने ठाढ़ छलथि। हमरा ततेक बुखार छल जे चादरि ओढ़ने रही तथापि कांपति छलहुँ।डॉक्टर की कहलैथ से हम किछु नहि बुझलियैक। हमरा थोर बहुत बुझय मे आयल जे कियो हमर तरवा सहराबति छलथि, आ कियो गोटे पानिक पट्टी दs रहल छलथि , मुदा हम बुखारक चलते आँखि नहि खोलि पाबति छलहुँ, हम बुखार मे करीब करीब बेहोश रही। जखैन्ह हमरा होश आयल आ आँखि खुजल तs प्यास सs हमर ओठ सुखायत छल, मुदा साहस नहि छलs जे उठि कs पानी पिबतहुं। जहिना करवट बदललहुं तs हिनका पर नजरि गेल। हिनका हाथ मे एकटा रुमाल छलैन्ह आ बिना तकिया सुतल छलथि। हमरा इ बुझैत देरी नहि भेल जे इ हमरा रुमाल सs पट्टी दैत दैत सुति रहल रहथि। हमरा हिम्मत तs नहि छल तथापि हम चुप चाप उठि जहिना हिनकर माथ तर तकिया देबय चाहलियय इ उठि गेलाह। हमरा बैसल देखि तुंरत कहि उठलाह अहाँ कियाक उठलहुं अहाँ परल रहु। इ सुनतहि हम फेर तुंरत परि रहलहुं।


भोर मे उठलहुं त कमजोरी तs छलs मुदा बुखार बेसी नहि छल। मौसी सs पता चलल जे चाय पिबय के लेल जखैन्ह मधु उठाबय गेलीह तs हम बुखार सs बेहोश रही। इ देखि तुंरत डॉक्टर के बजायल गेलैक। डॉक्टर के गेलाक बाद बड राति तक माँ आ इ दूनू गोटे बैसल रहथि आ ठंढा पानी सs पट्टी दs बुखार उतारबाक प्रयास मे लागल रहथि। माँ के बाद मे इ सुतय लेल पठा देलथि आ अपने भरि राति जागल रहथि कियाक तs बुखार कम भेलाक बादो हम नींद में बड़ बड़ करैत छलियैक। दोसर दिन सs हमर बुखार कम होमय लागल मुदा हमरा पूर्ण रूप सs ठीक होयबा में एक सप्ताह लागि गेल। हिनका कतबो कहलियैन अहाँ चलि जाऊ, क्लास छूटैत अछि मुदा इ कहलाह, अहाँ ठीक भs जाऊ तखैन्ह हम जायब।


एक सप्ताह इ कतहु नहि गेलाह हमरे कोठरी में बैसि कs अपन पढ़ाई करथि। साँझ में काका लग बैसि कs खूब गप्प होयत छलैन्ह। ओहि एक सप्ताह में काका सेहो हिनका सs बहुत प्रभावित भs गेलथि आ इहो काका के स्वभाव सs परिचित भेलाह। साँझ में परिचित सब हिनका सs भेंट करय लेल आबथि। एहि तरहे पूरा सप्ताह बीमार रहितहुँ हमरा खूब मोन लागल।


आइ भोर सs हमरा एको बेर बुखार नहि भेल। काल्हि भोर मे हिनका मुजफ्फरपुर जयबाक छैन्ह भरि दिन इ हमरा सँग गप्प करैत रहलाह। साँझ मे काका ऑफिस सs अयलाह तs इ हुनका लग बैसि हुनका सs गप्प करय लगलाह आ हम अपन कोठरी मे छलहुँ। माँ मौसी जलखई के ओरिआओन करैत छलिह बाकी भाई बहिन सब बाहर खेलाइत छलैथ। हमरा इ सोचि कs एको रति नीक नहि लागैत छलs जे काल्हि इ चलि जेताह आ ओकर किछु दिनक बाद माँ सेहो चलि जयतीह।


राति मे सुतय काल इ कहलाह भोरे तs हम जा रहल छी मुदा हमर ध्यान अहीं पर ता धरि रहत, जा धरि अहाँक चिट्ठी नही भेंटत जे अहाँ पूरा ठीक भs गेलहुँ अछि। एहि बेर माँ के जाय काल नहि कानब, ओ बड दूर रहति छथि हुनको अहिं पर ध्यान लागल रह्तैन्ह। अहि बेर रोज एकटा कs चिट्ठी अवश्य लिखब, आ हमरा दिस देखैत आ मुस्की दैत कहलाह आब तs अहाँ के चिट्ठी लिखय मे सेहो कोनो तरहक दिक्कत नहि हेबाक चाहि। हमहु हिनकर मुस्कीक जवाब मुस्की सs दs देलियैन्ह।

Saturday, April 18, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(सातम कड़ी)

आय भोरे बाबुजी असगर चलि गेलाह। माँ कs मोन नहि मानलन्हि जे ओ हमरा कानैत छोरि कs जैतथि। बाबुजी कs गेलाक बाद हमरा बड अफसोस होयत छलs जे माँ के हमरा चलते रहय परि गेलैन्ह, आ आब बच्चा सब के लs असगर जाय परतैन्ह।


कॉलेज जयबाक खुशी एतबे दिन मे समाप्त भs गेल, कियाक से नहि जानि। कॉलेज जाइ अवश्य मुदा जेना कतो आओर हेरायल रहैत छलहुँ।घर आबि तs घर मे सेहो एकदम चुप चाप जा अपन कोठरी मे परि रहैत रही। माँ सब सोचथि हम थाकि जायत होयब आ सुतल छी, मुदा हम घंटो ओहिना परल रहैत रही। हमरा अपनहु आश्चर्य होयत छलs। स्कूल गेनाई तs हम मोन ख़राब मे सेहो नहि छोरैत रही , फेर हमरा एहि तरहे कियाक भेल जा रहल छलs। काल्हि बाबुजी चलि गेलाह से आओर घर सुन लागैत छलैक ताहि पर कॉलेज जयबाक से मोन नहि होयत छलs। कहुना कॉलेज तs गेलहुँ मुदा ओहियो ठाम नीक नहि लागल।कॉलेज सs आपस अयलाक कs बाद नहि जानि मोन जेना बेचैन लागैत छलs। हमरा बुझय मे नहि अबैत छल जे एहि तरहे कियाक भs रहल अछि। जहिना हाथ पैर धो कs अयलहुं मौसी (जे की हमर काकी सेहो छथि) जलखई लs कs ठाढ़ रहथि आ हमरा आगूक जलखई दैत बजलीह जल्दी सs पहिने जलखई कs लिय। अहाँ सब दिन बहाना कs दैत छियैक जे भूख नहि अछि एतबहि दिन मे केहेन दुब्बर भs गेल छी। नीक सs खाऊ पिबू नहि तs ठाकुर जी अओताह तs कहताह एतबहि दिन मे सब हमर कनियाँ के दुब्बर कs देलैथ। ठाकुर जी नाम सुनतहि नहि जानि कतय सs हमरा मुँह पर मुस्की आबि गेल। बुझि परल जेना फूर्ति आबि गेल हो। मौसी के एकटा नीक मौका भेंट गेलैंह आ ओ तुंरत माँ के बजा कहय लागलिह "हे बहिन, अहाँ तs किछु नय बुझैत छियैक, कुसुम थाकय ताकय किछु नय छथि रोज तीन चारि बेर ठाकुर जी कs नाम लs नय लेल करू, सब ठीक रहतैक"। आब हमरा कोनो दोसर उपाय नहि बुझाइत छल, हम बिना किछु बजने चुप चाप मौसी के हाथ सs जलखई लs लेलियैन्ह।


सब राति हम आ काका विविध भारतिक हवा महल अवश्य सुनैत रही। हमरा दुनु गोटे कs इ कार्यक्रम बड़ पसीन छलs। सब सुति रहथि मुदा हम दुनु गोटे हवा महल के बाद सुतय लेल जाइत रही। हमरा कतबो पढ़ाई कियाक नहि हो सब दिन काका हमरा हवा महल काल अवश्य बजा लेत छलाह। आइयो हवा महल जहिना शुरू भेलैक मधु के भेजि कs हमरा बजा पठेलथि। हवा महल सुनलाक बाद हम अपन कोठरी मे सुतय लेल चलि गेलहुँ आ काका अपन कोठरी मे।


जहिना इ कहने रहथि, तहिना सब दिन हिनकर चिट्ठी आबैन्ह आ ओकर जवाब सब दिन राति मे सुतय काल लिखय चाहि मुदा हिनका हम की सम्बोधन कs चिट्ठी लिखियैन्ह इ हमरा बुझय मे नहि आबति छलs आ हम पुछबो किनका सs करितहुँ । हम अपन पहिल चिट्ठी जे हिनका बौआ सँग मुजफ्फरपुर पठौने रहियैन्ह ताहू दिन सोचैत- सोचैत जखैन्ह किछु नय फुरायल छलs तs हम हिनका "ठाकुर जी" सम्बोधन कs चिट्ठी लिखि पठा देने रहियैन्ह। ओ चिट्ठी पता नहि कोना , हिनकर कोनो दोस्त देख लेने रहथि आ हिनका कहि देने रहथिन्ह जे अहाँक सारि चिट्ठी बड़ सुन्दर लिखति छथि।इ ओकर चर्च हमरा लग हँसैत हँसैत कयने रहथि। हमरा ओहि दिन अपना पर तामस अवश्य भेल छलs मुदा हमरा बुझले नय छलs जे लोग की संबोधन कs घरवाला के चिट्ठी लिखैत छैक। आब तs "ठाकुर जी "सम्बोधन कs सेहो नहि लिखि सकैत छलहुँ । जखैन्ह हम सुतय लेल अयलहुं तs इ सोचिये कs आयल छलहुँ जे, किछु भs जाय आइ हम चिट्ठी लिखबे करबैन्ह।हमरा अपने बहुत खराप लागैत छलs जे हम एकोटा चिट्ठिक जवाब नहि देने रहियैन्ह। बहुत सोचलाक बाद जखैन्ह हमरा सम्बोधनक कोनो शब्द नहि फुरायल तs हम ओहि भाग कs छोरि चिठ्ठी लिखय लगलहुँ । चिट्ठी में कैयाक ठाम हम लिखिये जे हमरा मोन नहि लागति अछि जल्दी चलि आऊ मुदा ओ फेर हम काटि दियय । खैर बिना सम्बोधन वाला चिट्ठी लिखि कs हम एकटा किताब मे इ सोचि कs राखि देलियैक जे भोर तक किछु नय किछु फुरा जयबे करत। तखैन्ह ओ लिखि कs कॉलेज जाय काल खसा देबैक। पोस्ट ऑफिस हमर घरक बगल मे छलैक।


चिट्ठी लिखलाक बाद हम सोचलहुँ सुति रही मुदा कथि लेल नींद होयत। बड़ी काल तक बिछौना पर परल परल जखैन्ह नींद नहि आयल तs उठि कs पानि पीबि लेलहुँ आ फेर बिछौना पर परि कs हिनकर देल किताब "साहब बीबी और गुलाम पढ़य" लगलहुँ । दू चारि पन्ना पढ़लाक बाद किताबो सs मोन उचटि गेल आ जओं घड़ी दिस नजरि गेल तs देखलियैक भोर के चारि बाजति छलs। सोचलहुँ आब की सुतब, जाइत छी चिट्ठी पूरा कs तैयार भs जायब। इ सोचि जहिना उठि कs कलम हाथ मे लेलहुँ कि बुझायल जे कियो केबार खट खटा रहल छथि। हमरा मोन मे जेना एक बेर आयल कहीं इ तs नहि अयलाह। हम जल्दी सs आगू बढ़ि कs जहिना केबार खोलति छी तs ठीके इ एकटा बैग लेने ठाढ़ छलथि। हम किछु क्षण ओहिना ठाढ़ भs हिनकर मुँह ताकैत रही गेलहुँ अचानक मोन परल आ हिनका सs बिना किछु पूछने वा कहने ओहि ठाम स तुरन्त भागि गेलहुँ । ता धरि काका के छी करैत ओहि ठाम पहुँच गेलाह आ हमरा भागैत देखि पुछलथि" के छथि"? हम बिना किछु कहने ओहि ठाम सs भागि अपन कोठरी मे जा बैसि गेलहुँ। काका हिनका देखैत देरी अ हा हा ... ठाकुर जी आयल जाओ बैसल जाओ कहैत हिनका घर मे बैसा तुरंत ओहि ठाम सs जोर जोर सs भौजी भौजी करैत भीतर आबि सब के उठा देलथि। थोरबहि काल मे भरि घरक लोग उठि गेलथि। तुरंत मे चाह पानि सबहक ओरिओन होमय लागल। राँची में तs हमर पितिऔत चारि भाई बहिन सेहो रहथि। जाहि महक तीन गोटे हिनका देखनेहो नहि रहथि, मधु टा विवाह मे छलिह। सब हिनका देखय लेल जमा भs जाय गेलथि। मौसी सs सेहो हिनका पहिल बेर भेंट भेल छलैन्ह। विवाह मे मौसी नहि रहथि नीलू दीदी कs विवाह के बाद सोनूक (छोटका बेटा) मोन खराप भs गेल छलैन्ह आ काका मौसी, सोनू, निक्की आ पप्पू के राँची छोरि आयल छलथि। हुनका एतबो समय नहि भेंटलैन्ह जे मौसी के फेर अनतथि।


हम अपन कोठरी मे चुप चाप बैसल रही, रतुका बेचैनी आब नहि छलs मुदा हमरा किछु नहि बुझाइत छलs जे हम की करी। इ सोचैत रही जे कॉलेज जाइ या नहि, जयबाक मोन तs नहि होयत छलs, ताबैत मौसी हमरा कोठरी मे कुसुम कुसुम करैत हाथ मे चाह लेने घुसलीह। हमरा देखैत कहय लगलीह "अहाँ अहिना बैसल छी, जल्दी सs चाह पीबि लिय आ तैयार भs जाऊ। हमरा इ सुनतहि बड़ तामस भेल, हमरा मोन मे भेल कहू तs इ अखैन्हे अयलाह अछि आ मौसी हमरा कॉलेज जाय लेल कहैत छथि हम धीरे सs कहलियैन्ह हमर माथ बड़ जोर सs दुखायत अछि। इ सुनतहि मौसी के मुँह पर मुस्की आबि गेलैन्ह आ कहलथि तैयार भs जाऊ मोन अपनहि ठीक भs जायत, आ आय कॉलेज नहि जयबाक अछि। इ सुनतहि हमरा भीतर सs खुशी भेल, बुझायल जेना हम यैह तs चाहैत रही, जे कियो हमरा कहथि अहाँ कॉलेज नहि जाऊ। हम जल्दी सs चाह पीबि तैयार होमय लेल चलि गेलहुँ।


ओना तs हमरा तैयार हेबा में बड़ समय लागैत छलs मुदा ओहि दिन जल्दी जल्दी तैयार भs गेलहुँ। अपन कोठरी में पहुँचलहुं तs मौसी हमरे कोठरी में रहथि आ किछु ठीक करैत छलिह। हमरा देखैत बाजि उठलिह "बाह आय तs अहाँ बड़ फुर्ती सs तैयार भs गेलहुँ, आब माथक दर्द कम भेल"? हम हुनका दिस देखबो नही केलियैन्ह आ दोसर दिस मुँह घुमेनहि हाँ कही देलियैन्ह।


काका के विवाहे बेर सs हिनका सँग खूब गप्प होयत छलैन्ह। हमर काका बड़ निक आ हंसमुख व्यक्ति, ओ हिनका सs कखनहु कखनहु कs हँसी सेहो कs लेत छलाह। हिनको काका सs गप्प करय में बड़ नीक लागैत छलैन्ह। हम तैयार भs कs पहुँचलहुं ता धरि ओ सब गप्प करिते छलाह। मौसी हमरे कोठरी सs काका के सोर पारि हुनका सs कहलथि" ठाकुर जी कs तैयार होमय लेल कहियोक नहि, थाकल होयताह "।किछुए कालक बाद इ हमर वाला कोठरी में अयलाह, हम चुप चाप ओहि ठाम बैसल रही। हिनका देखैत देरी हमरा की फुरायल नहि जानि झट दय गोर लागि लेलियैन्ह।गोर लगलाक बाद हम चुप चाप फेर आबि कs बैसि रहलियैक। मोन में पचास तरहक प्रश्न उठैत छल।इहो आबि कs हमरा लग बैसि रहलाह आ पुछ्लाह अहाँ कानैत कियाक रही, आ हमरा देखि कs आजु भागि कियाक गेलहुँ। अहाँक बाबुजी जखैन्ह सs इ कहलाह जे अहाँ कs कनबाक चलते माँ रही गेलीह, आ आब एक मास बाद जयतीह, तखैन्ह सs हमरो मोन बेचैन छलs। अहाँ के बाबुजी के गाड़ी में बैसा सीधे हॉस्टल गेलहुँ आ ओहिठाम मात्र कपडा लs जे पहिल बस भेंटल ओहि सs सीधा आबि रहल छी। हिनकर इ गप्प सुनतहि हमर आँखि डबडबा गेल। हमरा अपनहु इ नहि बुझल छलs जे हम कियाक भागल रही आ नहि इ, जे हमरा कियाक कना जायत छल।



Friday, April 10, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (छठम कड़ी)

दादी बाबा कs गाम गेलाक बाद माँ, बाबुजी, हम सब छहु भाई बहिन, आ ई, ओहि दिन मोतिहारी रही गेल रही। हमारा सब कs दोसर दिन मोतिहारी सs मुजफ्फरपुर जेबाक छsल। साँझ मे ई हमरा कहलाह माँ के कहि दियौन्ह आ चलू हम सब सिनेमा देख कs अबैत छी। पहिने तs हम तैयारे नहि होइत छलिये मुदा जखैन्ह ई बहुत कहलाह तs हम जएबाक लेल तैयार तs भs गेलहुँ मुदा माँ सs कहबा मे हमारा लाज होयत छलs। जखैन्ह हम माँ सs कहय लेल तैयार नहि भेलहुँ तs ई हमर छोटकी बहिन अन्नू के बजा कs कहलथिन, "अहाँ अपन माँ सs चुप चाप कहि दियौन हम दुनु गोटे सिनेमा जाइत छी"। अन्नू बेचारी तs ठीके माँ सs चुप चाप जा कs ई गप्प कहलथि, मुदा कोना नय कोना हमर तेसर बहिन बिन्नी ई गप्प सुनि लेलथिन आ तकर बाद एक के बाद एक सब भाई बहिन सब सिनेमा जएबाक लेल हल्ला करय लागय गेलीह, सब छोटे छोट छलथि। माँ सब के बुझबति छलिह मुदा कियो मानय लेल तैयार नहि छलथि।बहुत बुझेला पर आओर सब गोटे तs मानि गेलिह बिन्नी नहि मानलिह। हमरा आर हिनका "अपना देश ", विवाह कs बादक पहिल सिनेमा बिन्नी कs सँग देखय परल। हम सब सिनेमा की देखब बिन्नी के सम्हारय मे हमर सबहक समय बीति गेल।हम की कहियो ओहि दिनका देखल सिनेमा बिसरी सकैत छी।


दोसर दिन भोरे हम सब मुजफ्फरपुर के लेल बिदा भs गेलहुँ। पहिने तs हमर सबहक कार्यक्रमक अनुसारे हमारा सबके मुजफ्फरपुर मे रहबाक नय छलs मुदा हिनकर आग्रह के बाबुजी मानि गेलाह आ हमसब मुजफ्फरपुर मे सेहो दू दिन रहि गेलहुँ। ओहि दिन हमरा सब के पहुँचलाक बाद इ अपन हॉस्टल इ कहि कs गेलाह जे अपन सामान राखि आ जानकारी लs कि कॉलेजक हरतालक की भेलैक इ आबि जेताह आ दिनका भोजन इ हॉस्टल सs करि कs अओताह। दुपहर मे इ अयलाह आ हिनक सँग हमर दीयरि सल्लन जी, जे हिनका सs दू बरखक छोट छथि आ हिनके कॉलेज मे पढैत छलाह हमारा सs भेंट करय कs लेल सेहो अयलाह।


सल्लन जी सs हमरा पहिल बेर भेंट छल। बरियाति आयल छलाह, मुदा एक तs गामक बरियाति, दोसर बरियाति सब पहिने आँगन मात्र सुहाग देबय कs लेल आबति रहथि। थोरेक काल गप्प, आ चाह नाश्ताक बाद इ हमरा आ सब बच्चा(हमर भाय बहिन) सब के सिनेमा लs जयबाक लेल कहि तैयार होयबाक लेल कहलथि सब खुशी खुशी तैयार भs जाय गेलथि आ हमर छोटका भाय के छोरि, बाकि पूरा बटालियनक सँग हम सब सिनेमा देखबाक लेल बिदा भs गेलहुँ। हमरा सब सँग सल्लन जी सेहो रहथि हम मोने मोन सोचलहुं आय इ एतेक गोटे सँग सिनेमा देखबाक लेल तैयार कोना भs गेलाह। फेर मोन मे आयल ओहि दिन बच्चा सब कानैत रहथि, इ सोचि सब के लs जयबाक सोचने होयताह, सल्लन जी आ बौआ(हमर बडका भाय ) सेहो सँग रहबे करथि।


घर सs निकलतहि रिक्शा भेंट गेलs एक टा रिक्शा पर हम दुनु गोटे आ बाकि दू टा पर सल्लन जी आ बौआक सँग सब बच्चा सब बैसि जाय गेलथि। ओना हम मुजफ्फरपुर दोसर बेर आयल छलहुँ, मुदा पहिल बेर मात्र राति भरि जनकपुर सs राँची जाय काल लंगट सिंह कॉलेजक गेस्ट हाउस मे रहि। हमर सबहक रिक्शा पाछू छलैक आ तेहेन ख़राब सड़क जे हमर ध्यान दोसर दिस नहि छल, हमरा होयत छल कहीं खसि नय परी। हम मात्र सड़क आ रिक्शा दिस देखैत सिनेमा हॉल लग पहुँची गेलहुँ।


रिक्शा सs उतरतहि इ रिक्शा वाला के पाई दs हमरा कहलथि चलू। हम किछु बूझलियैक नहि आ पुछलियैन्ह,"आ बाकि सब गोटे"? इ मुस्कुरैत कहलाह बच्चा पार्टी के सल्लन अपना सँग दोसर सिनेमा देखाबय लेल लs गेलाह। हम हुनका सँग सिनेमा हॉल मे जा जखैन्ह बैसलहुं तs सिनेमा शुरू होयबा मे थोरेक समय छलैक। इ हमरा कहलाह हमरा सिनेमा देखबाक ओतेक इच्छा नहि छलs हमरा तs अहांक सँग रहबाक छलs आब फेर कतेक दिनक बाद भेंट होयत नहि जानि, आ ओहि ठाम इ सम्भव नहि छलs। हमर कोरा वाली सारि सब जे छथि, ओ हमरा एको मिनट असगर कथि लेल रहय देतीह। सल्लन हमरा सँग आबिते छलाह, हुनका अहाँ सs भेंट करबाक छलैन्ह। हम सोचलहुं सिनेमा देखबाक नाम पर सब तैयार भs जेतिह , आ सल्लन सs पुछलियैन्ह तs कोरा खेलाबय वाली सारि सब सँग सिनेमा देखय लेल तैयार भs गेलाह। ओहि ठाम कहितौंह त फेर हल्ला भs जायत तकर आशंका सs हम अहूँ के किछु नहि कहलहुं। प्रकाश(हमर पैघ भाय ) आ सल्लन के सबटा बुझल छलैन्ह, ताहि लेल हुनकर सबहक रिक्शा आगू गेलैन्ह आ हमर सबहक पाछू छsल । इ सुनि हमरो निक लागल, जखैन्ह सs हम सब गाम सs निकललहुं तखैन्ह सs नहि जानि कियाक हमरो मोन इ सोचि उदास छलs जे पता नहि आब कहिया भेंट होयत। हमरो आ हिनको दुनु गोटे के कॉलेज खुजल छsल दोसर हमरा लागैत छsल जे रांची सs मुजफ्फरपुर बहुत दूर छैक।


हम सब सिनेमा की देखब गप्पे मे समय बीति गेल। इ तs निक छsल जे दीपक सिनेमाक सब हिनका चिन्हैत छलैन्ह दोसर ओहि दिन एकदम कम भीर छलैक आ हमरा सब के एकदम कात में सीट भेन्टल छल जाहि ठाम कियो बैसल नही छलथि राति मे हम सब आपस अयलहुं तs बच्चा सब सल्लन जी आ बौआ कs सँग आपस हमरा सब सs पहिनहि आबि गेल रहथि हमरा तs होयत छल हमर बहिन सब हमरा सब के देखि कs हल्ला करतीह मुदा ओ सब किछु नही बजलिह। सल्लन जी अपन हॉस्टल आपस चलि गेलाह।


ओहि राति हमरा एको रत्ती नींद नहि भेल। दोसर दिन हमर सबहक रेल गाड़ी छल। हिनकर कॉलेज तs खुजि गेल छलैन्ह मुदा इ हमरा कहि देने रहथि जे एक दिनक गप्प छैक, ताहि लेल इ हमरा सबके गेलाक बाद सs अपन क्लास करताह। साँझ मे हमरा सब के छोरय के लेल हमरा सब सँग इहो स्टेशन अयलाह हमरा स्टेशन पर ठाढ़ हेबा मे सब दिन सs बड़ ख़राब लागैत छsल मुदा ओहि दिन नहि जानि कियाक, होइत छsल जे रेल गाड़ी जतेक देरी सs आबैक से निक। कथी लेल, गाड़ी अपन निर्धारित समय पर आबि गेलैक आ हमरा ओहि पर सवार होमय परल।


रेल गाड़ी खुजय सs पहिनहि इ मौका देखि कs चुपचाप हमरा लग आबि कहलाह "आब चिट्ठी अवश्य लिखब नहि तs हमारा पढ़य मे मोन नहि लागत"। हमहू मुडी हिला जवाब दs देलियैन्ह। जहिना जहिना गाड़ी खुजय के समय होयत छलैक हमरा बुझाइत छsल जेना हमरा कियो जबरदस्ती पठा रहल अछि। गाड़ी आब ससरय लागल मुदा हम दूनू गोटे एक टक एक दोसरा के ताबैत देखैत रही गेलहुँ जाबैत धरि आँखि सs ओझल नहि भs गेलहुँ।


रांची पहुँचलाक दोसर दिन हम कॉलेज गेलहुँ मुदा हमर कॉलेज मे एको गोट हमर स्कूलक संगी नहि भेंटलिह। हम चुप चाप जा कs पछुलका बेंच पर बैसी गेलहुँ। क्लास मे हम असगर रही जनिकर कि बियाह भेल छलैक। हमरा क्लास मे नन(nun) सब सेहो कैयेक टा छलिह। हमरा बगल मे सब दिन आबि कs एकटा नन बैसि जाइत छलिह।


एक सप्ताहक बाद बाबुजी जएबाक चर्च करय लगलाह, हुनका गेनाइ आवश्यक छलैन्ह। ओ तs आयल छलाह नीलू दीदी, हमर पितिऔत बहिनक बियाहक हिसाबे छुट्टी लs कs मुदा हमर विवाहक चलते हुनका छुट्टी बढाबय परि गेलैन्ह । हमर माँ बाबुजी अरुणाचल मे रहैत छलथि, जाहि ठाम मात्र छोटका बच्चा सब के लेल स्कूल छलैक ।हम आ बौआ (हमर बडका भाय ) तीन चारि बरख सs पढ़ाई लेल माँ बाबुजी लग नहि रहि छोटका काका लग राँची मे रहैत छलहुँ। हुनका लोकनि के जएबाक चर्च जखैन्ह जखैन्ह होय हमर मोन छोट भs जायत छsल, हम कात मे जाय खूब कानी। हमर माँ सैत इ देखि लेत छलिह, एक दिन हमरा पुछि देलथि "अहाँ कियाक कानैत छी"। हमरा आओर कना गेल मुदा हम बजियैन्ह किछु नहि। हमरा सब दिन सs इ रहल, यदि हमरा मोन मे दुःख होइत अछि तs हम किनको किछु नहि कहैत छियैन्ह आ कात मे जा असगरे कानैत छी।एक दिन माँ हमरा असगरे लs जाय कs पुछलथि हमरा कहु अहाँ कियाक कानैत छी नय तs हमरा ओतहु जाय कs ध्यान लागल रहत। इ सुनतहि हमरा आओर कना गेल। माँ तखैन्ह बुझि गेलैथ आ पुछलैथ कहु तs हम नहि जाई आ किछु दिन अहाँ लग रही जाइ, अहाँक बाबुजी असगरे चलि जयताह। हम किछु नहि बजलियैन्ह मुदा हमरा इ सुनि निक लागल।


हमर माँ, बाबुजी के कहि सुनि कs हुनका असगर जएबाक लेल तैयार कs लेलकनि। हमर काका सुनि s पहिने माँ के रूकबा लेल मना कयलथि मुदा माँ के मोन देखि s ओहो चुप s गेलथि। एक सप्ताहक बाद बाबुजी के अरुणाचल जायब तय भेलैंह। बाबुजी के रांची सs मुजफ्फरपुर जा ओतहि सs अवध आसाम मेल सs अरुणाचल जएबाक छलैन्ह।

Sunday, April 5, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (पांचम कड़ी)

हम महादेव झा क विषय में सोचति सोचति नहि जानि कतय ध्यान मग्न भs गेलहुँ, अचानक हमर ध्यान खुजल तs देखति छी इ हमरा सोझां मे ठाढ़ भs मुस्की दs रहल छथि। इ देखि कs हमरा लाज भs गेल, आ इ तुंरत हमरा दिस हाथ आगू कs कहलाह, " लिय, अहाँक लेल हम मुँह बजाओन अनलहुं अछि, ई हमरा दिस सs अहाँक लेल पहिल उपहार थिक। चतुर्थी दिन वाला तs दादक कीनल छलैन्ह, ई हमरा दिस सs अछि"। ई कहि हमरा दिस एकटा किताब आगू बढ़ा देलथि।



पंचमी दिन भोरे भोर दादी सभ गोटे कs उठा देलथिन। हिनको उठय परि गेलैन्ह, इहो भोरे भोर तैयार भs गेलाह, हिनको हमारा संग पूजा पर बैसय कs छलैन्ह। पूजा पर बैसैत बैसैत ९ बाजि गेलैक। दादी भरि गामक लोक कs हकार दियबोने रहथि मुदा पूजा काल गामक सभ गोटे नहि आयल छलैथ। हाँ, अपन दियादि महक सभ कियो अवश्य आयल रहथि। परंच भरि दिन लोकक एनाइ गेनाइ लागल छलय। पूजा आ कथा समाप्त होयत होयत १ बाजि गेलय। सब सs पहिने हिनकर भोजनक व्यवस्था कs हिनका खुआयल गेलैन्ह, तकर बाद अहिबाति सबहक खेनाइ कs ओरिओन कs हुनका सब कs बैसायल गेलैन्ह। हमरो हुनके सबहक संग बीच में बैसि कs खेबाक छलs। हमारा मिट्ठ खेबाक एको रत्ती इच्छा नहि होयत छलs। सब गोटे खेबाक लेल जिद्द कs देलैथ इ कहि जे बस एकर बाद आब मिट्ठ नहि खाय परत । दोसर साँझ भेला पर किछु नय खेबाक छल, कहुना कनि खीर खा कs उठि गेलहुँ


पूजा पर सs उठला पर ततेक नय थाकि गेल रहि जे होयत छलs जे चुप चाप सुति रहि मुदा कनि कनि काल पर कियो नय कियो आबि जायत रहथि आ हुनका सब लग बैसय लेल तुंरत बजाहटि आबि जायत छल। दुपहर मे हम सब फेर फूल लोढ़य लेल गेलहुँ ओहि दिन हम बहुत थाकल रहि, तथापि जेना जेना सभ गोटे फूल पत्ति तोरथि तहिना हमहुँ तोरि कs राखने जाइ, ओहि दिन बुझ परैत छलs सब थाकल रहथि, ओहि दिन हम सभ जल्दिये आपस भs गेलहुँ।


प्रतिदिन हमसब फूल लोढ़य लेल जाइ आ एक पथिया करीब रोज फूल पात आनि। बारहम दिन हमसब कनि जल्दी जाs कs फूल जाहि जूही लs अनलियय ओहि दिन बहुत लोकक ओतहि पाहुन कs अयबाक छलैन्ह, किनको ससुर कs अयबाक छलैन्ह तs किनको वर कs। बारहम दिन धरि करीब खिड़की तक फुल पातक टालि लागि गेलैक, ताहि पर उपर सs दूध, जल प्रसाद चढायल जायत छलैक। कोहबर घर मे ओना तs धूप दीप जरति छलैक मुदा तइयो कनेक मनेक गंध रहति छलैक। बारहम दिन साँझ मे पूजा वाला सबटा फूल पात हटाs कs ओहि ठाम साफ करायल गेलैक, कियैक तs मधुश्रावणी दिन फेर सs सभटा फूल पात हटेलाक बाद ओतहि साफ कs फेर सs अरिपन परैत छैक। जखैन्ह फूल पात हटायल जायत छलैक तखैन्ह बुझय मे आयल जे हमसभ कतेक फूल पात आ जाहि जूही तोरने रहि, खत्मे नहि होयत छलैक ।


साँझ में हमर ससुर अपने, हमर एकटा पितिऔत दियोर कs संग भार लs कs अयलाह। तखैन्ह सs घर में सबगोटे आओर व्यस्त भs जाय गेल्थिन।हमर दादी आ माँ भार देखबा आ देखेबा मे व्यस्त छलिह। बिधक की सब आयल अछि की सब नहि। हमर ससुर सेहो विवाहक बाद पहिल बेर आयल छलाह। हिनको अपन दादा (पिताजी) सs विवाहक बाद पहिल बेर भेंट भेल छलैन्ह, गप्प सप मे देरी भs गेलैक।


हम सुनने रहि जे मधुश्रावणी दिन कनिया कs सासुर सs बिधक सामान संग टेमी सेहो अबैत छैक आ ओहि सs कनिया कs दुनु ठेहुन कs डाहल जायत छैक। टेमी सs डाहलाक बाद ओकरा पर पान आ सुपारी दs ओकरा रगरि देल जायत छैक जाहि सs फोका अवश्य होय। फोका भेला सs निक मानल जायत छैक। सब दिन फुल लोढ़य काल इ सब गप्प होयत रहैत छलैक। हम सांझे सs डरल रहि आ जखैन्ह सs हमर ससुर आबि गेलाह तखैन्ह सs दर्दक कल्पना कs आओर डरि जायत रहि। दादी कs गप्प मोन परि जाय जे "मधुश्रावणी लोकक एके बेर होयत छैक"। किनको सs किछु पुछबो नय करियैन्ह।


राति मे सुतय मे देर तs भs गेल छलैक, भगवान भगवान कs सुतय लेल गेलहुँ हम अहुना कम बाजति छलौंह ओहि दिन आओर किछु नय बाजल नहि होयत छलs इ हमरा सs दू तिन बेर पुछ्लाह किछु भेल अछि, हम सब बेर नहि कहि दियनि मुदा हिनका बुझs मे आबि गेलैन्ह कि किछु गप्प अवश्य छैक। जखैन्ह इ हमरा बहुत पुछ्लथि तs हम धीरे सs कहलियैन्ह, "हमरा डर होयत अछि"। हिनका किछु बुझय मे नय अयलैन्ह, अचानक हमरा डर कियैक होयत छलs। इ हमरा बहुत निक सs बुझा कs पुछ्लाह "डरबाकs आखिर कोन गप्प छैक", अहाँ पहिने डरु नय आ हमरा कहु की गप्प छैक"? हम डरैत हिनका कहलियैन्ह "हमरा टेमी सs डर होयत अछि"। "टेमी... कियाक टेमी सs डर होइत अछि"? हम हुनका तुंरत सभटा कहि देलियैन्ह जे काल्हि कs लेल डरि रहल छलन्हु। इ हमरा कहलाह "अहाँ जुनि डरु एकतs हमरा बुझलि अछि जे हमारा ओतय टेमी नहि होयत अछि, दोसर जाओं होयतो होयत तs अहाँ कs नहि होमय देबैक, हमर गप्प के कियो नय काटतिह "। ओहि दिन पता नहि कोना आ कियाक, तुंरत हिनका पर पूर्ण रूपेण विश्वास भs गेल, हम निश्चिंत भs गेलहुँ जे आब हमरा टेमी नहि परत। ओकर बाद हमरा मोन मे कोनो डर नहि छलs।


भोरे उठी कs तैयार भेलन्हु मुदा मोन मे कनिको डर नहि छलs। मधुश्रावणी दिन पूजा मे कनेक आओर बेसी समय लगलैक, जखैन्ह टेमी देबाक भेलs तs जहिना हमर बिधकरि उठलथि इ तुंरत कहि देलथिन हमरा सब मे टेमी नय होयत अछि। इ सुनतहि हमरा ततेक नय खुशी भेल जकर वर्णन नहि कयल जा सकति अछि। बिधकरि उठि कs एकटा टेमि आनि कहलथिन ठीके हिनका सभके शीतल टेमि होयत छैन्ह। एकटा टेमि मे चंदन लगा ओहि सs हमर दुनु ठेहुन मे लगा देल गेल।


ओहि दिन फेर अहिबातिक संग खेबाक छलs। हमर ससुरक सौजनि सेहो छलैन्ह। पाबनि सs उठलाक बाद हिनकर भोजनक व्यवस्था आ हमर ससुरक सौजनि भेलैन्ह आ हम खेलाक बाद जहिना सोचलौन्ह आब आराम करैत छि कि माँ आबि कs कहलैथ तैयार होयबाक अछि हमर ससुर, दादा जी आबैत होयताह। दादा जी कs आदेश छलैन्ह जे ओ हमरा भगवति घर मे देखताह। हम फेर तैयार भs भगवति घर चलि गेलंहु । दियोर आ दादा जी दुनु गोटे भगवति घर अयलाह आ कनि दूर ठाढ़ भs गेलाह। हमरा संग जे छलिह ओ हमरा जाs कs गोर लागय लेल कहलैथ, हम ठाढ़ भs दादा जी लग जा हुनका गोर लागि लेलियैन्ह आ ओहि ठाम बैसि गेलंहु, ओ तुंरत देखेबाक लेल कहलैथ आ हुनका जहिना देखा देल गेलैन्ह हमरा हाथ में एकटा गहना दs ओतय सs चलि गेलाह।


दादा जी साँझ मे चलि गेलाह। हमारो सबके दू दिन बाद जेबाक छलs। हमर छोट भायक मुंडन छलैन्ह अरेराज मंदिर मे, हुनकर मुंडन करा हमरा राँची में छोरति, छोटका भाय आ तिनु बहिन के संग माँ बाबुजी कs अरुणाचल जयबाक छलैन्ह बाबुजी कs छुट्टी से ख़तम भs गेल छलैन्ह। हिनका सेहो मुंडन में उपस्थित रहबाक लेल माँ बाबुजी सब कहैत रहथि।


राति मे इ हमरा सs हमर मोन जांचय लेल पुछ्लथि अहाँक माँ बाबुजी हमरो मुंडन में उपस्थित होयबाक लेल कहैत छथि, हम की करि । हम पहिने त चुप रहि मुदा टेमी वाला बातक बाद स हमर कनि धाख टुटि गेल छल। हम धीरे सs कहलियनि छुट्टी अछि त अहुँ हमरे सब संग चलु , मुंडन कs बाद अहाँ मुजफ्फरपुर चलि जायब आ हम सब राँची चलि जायब। इ हमरा कहलथि हमर कॉलेज में हरताल चलैत अछि। जाहि दिन शुरू भेल छलैक ओहि दिन अहाँक बाबुजी पहुँचि गेलाह , हम सोचिते छलहुँ अयबाक लेल ताधरि हमरा बाबुजी कहि देलैथ छुट्टी अछि तs अहि ठाम कि करब चलु हमरा संग आ हम चलि आयल रहि। दोसर अहाँ चिट्ठी जे लिखने रही, हमरा ततेक नय ख़ुशी भेल जे हम तुंरत आबय चाहति रहि।


हम हिनकर गप्प सुनी कs मोने मोन बड खुश भेलहुँ , मुदा इ हमर मोनक गप्प कोना बुझि गेलाह से नहि जानि। इ हमरा अपने मोने कहय लगलाह राँची तs अहि ठाम स दूर छैक परंच हम कोशिश करब जखैन्ह छुट्टी होयत हम आबि जायब अहाँ चिंता जुनि करब, खूब मोन स पढ़ब। हम इ सुनतहि उदास भ गेलौहुं, तखनि हमरा लागल जे आब हमरा हिनका सs अलग रहय मे निक नय लागत।


तेसर दिन हम दुनु गोटे, माँ बाबूजी, हमर भाय बहिन सब दादी बाबा कs संग गाम सs अरेराज कs लेल बिदा भs गेलहुँराति सबगोटे मोतिहारी मे रुकि भोरे भोर हमसब मन्दिर पहुँची गेलहुँ आ मुंडन भेला पर सबगोटे मन्दिर दर्शन करय लेल जाय गेलथि , हम आ ई बाहरे सs भोला बाबा कs गोर लागि लेलियैन्ह। दादी कहने छलथि विवाहक एक बरख धरि लोग मन्दिर कs भीतर नहि जायत छैक। सबगोटे वापस फेर मोतिहारी आबि गेलहुँ, दादी बाबा गाम चलि गेलाह आ हमसब ओहि दिन मोतिहारी रुकि गेलहुँ , दोसर दिन हमारा सब के मुजफ्फरपुर सs राँची के लेल रेल गाड़ी छलs।






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